Yuva Haryana: योजना का उद्देश्य: प्रधानमंत्री मोदी के नाम पर शुरू की गई ‘पीएम राहत’ (प्रधानमंत्री सड़क दुर्घटना पीड़ित अस्पताल में भर्ती और सुनिश्चित उपचार) योजना का उद्देश्य सड़क दुर्घटना पीड़ितों को तुरंत चिकित्सा सहायता देना है। भारत सरकार के सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने इसे शुरू किया था और फरवरी 2026 में प्रधानमंत्री ने इसका शुभारंभ किया था।
प्रशासनिक लापरवाही: पायलट परियोजना के तहत हरियाणा, असम व एक अन्य राज्य में इसे शुरू किया गया था। आठ महीने बीतने के बावजूद अंबाला को छोड़कर हरियाणा के अन्य जिलों के अधिकारी लाभार्थियों को इसका लाभ नहीं दे सके हैं और प्रशासनिक अमला प्रक्रियाओं में ही फंसा रहा।
आंकड़ों की स्थिति: इस साल हरियाणा में करीब 10 हजार सड़क हादसे हुए, जिनमें से 6 हजार मामलों में उपचार के लिए आवेदन ऑनलाइन आए और 4817 केसों ही भुगतान के लिए स्वीकृत हुए। नूंह, फरीदाबाद, कैथल, सिरसा, झज्जर, पानीपत आदि जिलों में तो आंकड़ा दो अंकों तक भी नहीं पहुंच पाया है।
योजना में मुख्य अड़चनें
प्रक्रिया में देरी: पुलिस विभाग द्वारा दुर्घटना की पुष्टि होने पर तय समय में केस अथॉरिटी को भेजा जाना चाहिए और वह भी समय से आगे प्रक्रिया बढ़ाए, जो अभी नहीं हो पा रहा है। पुलिस द्वारा मामला स्वीकृत होने के 10 दिन में इसे स्टेट हेल्थ अथॉरिटी को संबंधित इंश्योरेंस काउंसिल या जिला प्रशासन को भेजना होता है, लेकिन दोनों स्तरों पर यह मामले लटके रहते हैं।
बीमा और प्रशासनिक समस्याएं: जिन वाहन का इंश्योरेंस नहीं है, वह केस जिला प्रशासन के पास आते हैं। एक उपायुक्त का तबादला होने पर दूसरे की स्वीकृति देने वाली आईडी को आरबीआई के खाते से लिंक होने में दो महीने तक लग जाते हैं।
लंबित मामले: अंबाला में अभी 44 केस स्टेट हेल्थ अथॉरिटी के पास सत्यापन के लिए लंबित हैं, जबकि 46 मामले जिला प्रशासन के पास सत्यापन के लिए हैं।
दिशा कमेटी की बैठक में उठे सवाल
हाल ही में अंबाला में दिशा कमेटी की बैठक के दौरान इस योजना की समीक्षा की गई। इसमें अंबाला लोकसभा सांसद वरुण चौधरी और राज्य सभा सांसद कार्तिकेय शर्मा ने योजना की धीमी चाल पर सवाल उठाए और आरटीओ व डीएसपी को निर्देश दिए कि योजना में तेजी लाई जाए।
सांसद वरुण चौधरी ने कहा कि इस योजना का प्रचार-प्रसार ठीक से हुआ ही नहीं है, यही कारण है कि लाभार्थियों की संख्या काफी कम है। इसके साथ ही प्रक्रिया ऐसी है कि लाभ भी समय से नहीं मिल रहा। उन्होंने पुलिस विभाग और प्रशासन को निर्देश दिया है कि योजना पर जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम करें।

