हर ब्लॉक के गांव में बनेंगे हरित शवदाह गृह, पंचायतों को अपने फंड से कराने होंगे निर्माण
Yuva Haryana: हरियाणा के गांवों में अंतिम संस्कार की व्यवस्था को पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में पहल की जा रही है। प्रदेश के हर ब्लॉक के एक गांव में हरित शवदाह गृह बनाए जाने की योजना है। इसके लिए पंचायतों को अपने फंड से निर्माण कराना होगा। पंचायती राज विभाग ने इस संबंध में गांवों में उपलब्ध उपलों की जानकारी जुटाने के लिए संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी है। योजना का उद्देश्य पारंपरिक अंतिम संस्कार की व्यवस्था को बेहतर बनाना और लकड़ी की खपत कम करने के विकल्पों को बढ़ावा देना है।
हर ब्लॉक के एक गांव में होगा चयन
प्रदेश के प्रत्येक ब्लॉक से एक गांव का चयन किया जाएगा, जहां हरित शवदाह गृह बनाया जाएगा। इसके लिए पंचायतों को अपने स्तर पर निर्माण की व्यवस्था करनी होगी। पंचायती राज विभाग गांवों में उपलब्ध उपलों और संबंधित संसाधनों का ब्योरा जुटा रहा है, ताकि योजना को लागू करने से पहले जरूरी जानकारी उपलब्ध हो सके।
हरित शवदाह गृह का उद्देश्य अंतिम संस्कार के दौरान लकड़ी पर निर्भरता कम करना और ऐसी व्यवस्था विकसित करना है, जिससे पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को सीमित किया जा सके। योजना को लेकर पंचायतों और संबंधित विभागों की भूमिका अहम होगी।
उपलों से अंतिम संस्कार की व्यवस्था पर जोर
हरित शवदाह गृह में उपलों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की योजना है। पारंपरिक तरीके से अंतिम संस्कार में बड़ी मात्रा में लकड़ी की जरूरत पड़ती है। इसके मुकाबले उपलों के उपयोग से लकड़ी की खपत कम करने का विकल्प मिल सकता है।
पंचायती राज विभाग ने इस संबंध में अधिकारियों से गांवों में उपलों की उपलब्धता का डेटा मांगा है। यह जानकारी योजना की व्यवहारिकता समझने और आवश्यक संसाधनों का आकलन करने में मदद करेगी। हालांकि, उपलों की उपलब्धता, उनकी गुणवत्ता और अंतिम संस्कार की व्यवस्था के लिए जरूरी सुविधाओं का आकलन भी महत्वपूर्ण होगा।
आधुनिक सुविधाओं के साथ पर्यावरण-अनुकूल व्यवस्था
हरित शवदाह गृह को केवल अंतिम संस्कार के स्थान के रूप में नहीं, बल्कि बेहतर और व्यवस्थित सुविधाओं वाली जगह के रूप में विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। ऐसी व्यवस्था में साफ-सफाई, पर्याप्त स्थान, सुरक्षा और लोगों की सुविधा का ध्यान रखना जरूरी होगा।
पर्यावरण-अनुकूल अंतिम संस्कार की व्यवस्था से लकड़ी की खपत घटाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, किसी भी वैकल्पिक ईंधन का पर्यावरणीय लाभ उसकी उपलब्धता, जलने की प्रक्रिया और उससे निकलने वाले धुएं पर निर्भर करता है। इसलिए निर्माण के दौरान उपयुक्त डिजाइन, वायु निकासी और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े मानकों का पालन करना जरूरी होगा।
पंचायतों को अपने फंड से करना होगा निर्माण
इस योजना की एक महत्वपूर्ण बात यह है कि गांवों में हरित शवदाह गृह का निर्माण पंचायतों को अपने फंड से कराना होगा। इससे पंचायतों की वित्तीय और प्रशासनिक भूमिका बढ़ जाएगी। गांव के स्तर पर स्थान का चयन, निर्माण की योजना और जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था करने में स्थानीय पंचायतों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभानी होगी।
निर्माण से पहले पंचायतों को उपलब्ध धनराशि, जगह और आवश्यक सुविधाओं का आकलन करना होगा। साथ ही, यह भी सुनिश्चित करना जरूरी होगा कि निर्माण के बाद शवदाह गृह का रखरखाव नियमित रूप से हो और ग्रामीणों को इसका उपयोग करने में परेशानी न आए।
गांवों में बेहतर सुविधाएं विकसित करने की पहल
हरित शवदाह गृह की योजना ग्रामीण क्षेत्रों में अंतिम संस्कार से जुड़ी सुविधाओं को व्यवस्थित बनाने की दिशा में एक कदम हो सकती है। यदि इसे सही ढंग से लागू किया जाता है, तो इससे गांवों में उपलब्ध संसाधनों का उपयोग बढ़ाने और लकड़ी की खपत कम करने में मदद मिल सकती है।
फिलहाल, योजना के तहत हर ब्लॉक से एक गांव के चयन और उपलों की उपलब्धता का ब्योरा जुटाने पर जोर है। निर्माण की समयसीमा, चयनित गांवों की सूची और अन्य विस्तृत दिशा-निर्देशों की जानकारी संबंधित विभाग की ओर से जारी होने पर स्पष्ट होगी।

