Yuva Haryana: हरियाणा में कई महत्वपूर्ण संवैधानिक और प्रशासनिक संस्थाओं के शीर्ष पद खाली पड़े हुए हैं। इन पदों पर नई नियुक्तियों का इंतजार लंबा होने के साथ ही संभावित दावेदारों की हलचल और सक्रियता काफी बढ़ गई है।
सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारियों, पूर्व न्यायाधीशों और प्रभावशाली लोगों की निगाहें इन संस्थाओं के प्रमुख पदों पर टिकी हुई हैं। नियुक्तियों को लेकर प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है।
- प्रमुख खाली पद और वर्तमान स्थिति
हरियाणा लोक सेवा आयोग (HPSC): आयोग के चेयरमैन आलोक वर्मा का कार्यकाल समाप्त हो चुका है। प्रथम और द्वितीय श्रेणी की सरकारी भर्तियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले इस आयोग के अध्यक्ष पद के लिए सेवानिवृत्त आईएएस और आईपीएस अधिकारियों में जबरदस्त लॉबिंग चल रही है।
हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (HERC): चेयरमैन नंद लाल शर्मा के निधन के बाद से नियमित चेयरमैन का पद रिक्त पड़ा है। फिलहाल आयोग के सदस्य मुकेश गर्ग को कार्यवाहक चेयरमैन की जिम्मेदारी दी गई है। हाल ही में गुरुग्राम और नूंह में बिजली वितरण के लिए निजी कंपनी को लाइसेंस देने के फैसले से प्रदेश में बहस छिड़ी हुई है, इसलिए यहां नियमित चेयरमैन की नियुक्ति काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
हरियाणा सेवा का अधिकार आयोग: पूर्व मुख्य आयुक्त टी.सी. गुप्ता का कार्यकाल पूरा होने के बाद यह पद खाली है। सरकारी विभागों की जवाबदेही और नागरिकों को समय पर सेवाएं उपलब्ध कराने में इस आयोग की अहम भूमिका रही है।
लोकायुक्त एवं अन्य संस्थाएं: हरियाणा लोक सेवा आयोग से लेकर लोकायुक्त तक कई अहम संवैधानिक पद इस समय रिक्त हैं।
- रिटायर्ड अधिकारियों की दूसरी पारी पर सबकी नजर
हरियाणा में यह परिपाटी लंबे समय से चली आ रही है कि वरिष्ठ अधिकारी सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद आयोगों, बोर्डों या प्राधिकरणों में महत्वपूर्ण पद हासिल कर लेते हैं।
मुख्यमंत्री के पूर्व प्रधान सचिव अरुण कुमार गुप्ता सहित कई सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारियों के रिटायर होने के बाद अब यह सवाल चर्चा में है कि सरकार भविष्य में किसे कहां समायोजित करेगी। इसके अलावा हरियाणा के पुलिस महानिदेशक रह चुके शत्रुजीत कपूर भी बीएसएफ के महानिदेशक पद से रिटायर होने वाले हैं।
- कामकाज प्रभावित होने की आशंका
इन संवैधानिक संस्थाओं का सीधा संबंध निम्नलिखित व्यवस्थाओं से है:
- सरकारी भर्तियां
- बिजली नियमन
- नागरिक सेवाएं
- भ्रष्टाचार से जुड़ी शिकायतों का निस्तारण
विशेषज्ञों का मानना है कि इन शीर्ष पदों पर नियुक्तियों में देरी होने से संस्थाओं के नियमित कामकाज पर असर पड़ सकता है। फिलहाल प्रदेश सरकार की ओर से नई नियुक्तियों को लेकर कोई अंतिम निर्णय या तस्वीर सामने नहीं आई है, और सभी की निगाहें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।

