Yuva Haryana: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कांग्रेस पार्टी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि पार्टी के पास साल के 365 दिन रैली करने के लिए हैं, लेकिन विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के लिए 1 नवंबर की तारीख चुनना गंभीर सवाल खड़े करता है।
1984 के सिख विरोधी दंगों की याद
मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में हर राजनीतिक दल को अपनी बात रखने का अधिकार है और सरकार उसका सम्मान करती है, लेकिन कांग्रेस ने इस विशेष तारीख को ही क्यों चुना? 1 नवंबर 1984 वह काला दिन था जब दिल्ली में सिख विरोधी हिंसा का भयानक दौर शुरू हुआ था। उस त्रासदी में हजारों सिख परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया था और उस दर्द की यादें आज भी लोगों के दिलों में जिंदा हैं। 1 नवंबर का दिन सिख समुदाय के लिए शोक और स्मरण का दिन है। ऐसे दिन पर जब सिख समुदाय अपने शहीदों को याद कर रहा हो, क्या कांग्रेस मंच सजाकर राजनीतिक नारे लगाएगी?
सरकारी नौकरियां और एसआईटी का गठन
सीएम सैनी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2015 में एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया था, जिससे 1984 की हिंसा से जुड़े लंबे समय से लंबित मामलों की फिर से जांच का रास्ता खुला। इस प्रक्रिया के तहत कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। उन्होंने बताया कि हरियाणा में इस हिंसा के दौरान 121 लोगों की जान गई थी, 20 गुरुद्वारे, 221 घर, 154 दुकानें और 57 कारखाने जलाए गए थे। सरकार ने जिम्मेदारी निभाते हुए विधानसभा में यह निर्णय लिया था कि इन 121 पीड़ित परिवारों के सदस्यों को सरकारी नौकरियां दी जाएंगी।
एसआईआर (SIR) एक सामान्य प्रक्रिया
मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह कोई नई प्रक्रिया नहीं है। मृत व्यक्तियों के नाम, अपना निवास बदल चुके लोगों और दोहरे प्रविष्टियों को हटाना स्वच्छ मतदाता सूचियां बनाए रखने और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए बेहद जरूरी है।
राहुल गांधी के नारे पर तंज
राहुल गांधी के ‘मोहब्बत की दुकान’ नारे पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्यार और भाईचारे की बात करना अच्छी बात है, लेकिन असली परीक्षा आचरण और जवाबदेही में होती है। कांग्रेस को यह स्पष्ट करना चाहिए कि 1984 की हिंसा से पीड़ित परिवारों के दर्द का उसकी ‘मोहब्बत की दुकान’ में क्या स्थान है।

