Yuva Haryana: हरियाणा में दूसरे राज्यों से आकर रहने वाले प्रवासी मजदूर और परिवार भी सरकारी राशन योजना का लाभ उठा रहे हैं। ‘एक देश, एक राशन कार्ड’ योजना के तहत दूसरे राज्यों के राशन कार्ड धारक हरियाणा में ही उचित मूल्य की दुकानों से राशन ले सकते हैं। वहीं, हरियाणा के निवासी भी दूसरे राज्यों में जाकर अपने राशन कार्ड के माध्यम से अनाज प्राप्त कर सकते हैं। सितंबर 2026 तक के आंकड़े इस व्यवस्था के बढ़ते इस्तेमाल को दर्शाते हैं।
सितंबर 2022 से सितंबर 2026 के बीच हरियाणा में दूसरे राज्यों के कुल 2,93,706 लाभार्थियों ने राशन प्राप्त किया। इसके उलट, इसी अवधि में उत्तर प्रदेश और बिहार में राशन लेने वाले हरियाणा के निवासियों की संख्या तुलनात्मक रूप से काफी कम रही। यह व्यवस्था खासतौर पर उन लोगों के लिए उपयोगी है, जो रोजगार की तलाश में अपना गृह राज्य छोड़कर दूसरे राज्यों में रहते हैं।
सितंबर 2026 में 65,589 बाहरी लाभार्थियों ने लिया राशन
सितंबर 2026 के आंकड़ों के मुताबिक, हरियाणा में दूसरे राज्यों के कुल 65,589 लाभार्थियों ने राशन लिया। इनमें उत्तर प्रदेश के 34,056 और बिहार के 28,263 लोग शामिल थे। इसके अलावा मध्य प्रदेश के 2,768 और राजस्थान के 222 लाभार्थियों ने भी हरियाणा में राशन प्राप्त किया।
ये आंकड़े बताते हैं कि हरियाणा में रोजगार और आजीविका के लिए रहने वाले प्रवासी परिवारों के लिए राशन की पोर्टेबिलिटी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इससे पात्र लाभार्थियों को केवल अपने गृह राज्य या जिले में जाकर राशन लेने की मजबूरी नहीं रहती।
चार साल में लगातार सामने आए बड़े आंकड़े
वार्षिक आंकड़ों के अनुसार, हरियाणा में दूसरे राज्यों के लाभार्थियों द्वारा राशन लेने की संख्या इस प्रकार रही:
- 2022: 50,890 लाभार्थी
- 2023: 60,622 लाभार्थी
- 2024: 55,662 लाभार्थी
- 2025: 60,943 लाभार्थी
- 2026: 65,589 लाभार्थी
इन आंकड़ों में 2026 का आंकड़ा सितंबर तक का है। इससे स्पष्ट है कि राज्य में दूसरे राज्यों के राशन कार्ड धारकों द्वारा राशन प्राप्त करने की सुविधा का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है।
यूपी-बिहार में राशन लेने वाले हरियाणवी कितने?
हरियाणा के ऐसे निवासी जो उत्तर प्रदेश और बिहार में राशन लेते हैं, उनकी संख्या इन आंकड़ों में काफी कम दिखाई देती है। 2022 में बिहार में 173 हरियाणवी लाभार्थियों ने राशन लिया, जबकि उत्तर प्रदेश में यह संख्या शून्य थी।
2023 में उत्तर प्रदेश में 13 और बिहार में 287 हरियाणवी लाभार्थियों ने राशन प्राप्त किया। 2024 में उत्तर प्रदेश में 834 और बिहार में 966 लोगों ने इस सुविधा का इस्तेमाल किया। 2025 में उत्तर प्रदेश में कोई लाभार्थी दर्ज नहीं हुआ, जबकि बिहार में 735 लोगों ने राशन लिया। सितंबर 2026 तक उत्तर प्रदेश में 569 लाभार्थी दर्ज हुए, जबकि बिहार में कोई लाभार्थी दर्ज नहीं हुआ।
पांच वर्षों के सितंबर महीने के आंकड़ों को मिलाकर उत्तर प्रदेश और बिहार में राशन लेने वाले हरियाणा के लाभार्थियों की कुल संख्या 2.48 लाख से अधिक बताई गई है। हालांकि, इस कुल संख्या और ऊपर दिए गए वार्षिक आंकड़ों के बीच अंतर दिखाई देता है, इसलिए इस आंकड़े की मूल सरकारी रिपोर्ट से पुष्टि आवश्यक है।
क्या है ‘एक देश, एक राशन कार्ड’ योजना ?
‘एक देश, एक राशन कार्ड’ व्यवस्था का उद्देश्य राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत पात्र राशन कार्ड धारकों को देशभर में राशन प्राप्त करने की सुविधा देना है। इसके माध्यम से लाभार्थी अपने गृह राज्य से बाहर रहने के दौरान भी दूसरे राज्य की उचित मूल्य की दुकान से निर्धारित पात्रता के अनुसार राशन ले सकते हैं।
यह सुविधा प्रवासी मजदूरों, निर्माण क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों और रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में रहने वाले परिवारों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। राशन की उपलब्धता को निवास स्थान से जोड़कर सीमित रखने के बजाय, यह व्यवस्था लाभार्थियों को अपने साथ राशन कार्ड की पात्रता का लाभ दूसरे राज्य में भी लेने की सुविधा देती है।
केंद्र सरकार के एकीकृत सार्वजनिक वितरण प्रणाली (IMPDS) पोर्टल पर राज्यवार राशन वितरण और लेनदेन के आंकड़े उपलब्ध हैं। हरियाणा का खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग भी सार्वजनिक वितरण प्रणाली के संचालन और पात्र परिवारों तक राशन पहुंचाने की जिम्मेदारी निभाता है।
इस तरह ‘एक देश, एक राशन कार्ड’ योजना प्रवासी परिवारों के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण व्यवस्था बनी हुई है।

