Yuva Haryana: हरियाणा में नशा तस्करों के खिलाफ पुलिस प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है। राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे नशा विरोधी अभियान के तहत जनवरी से सितंबर 2026 तक रिकॉर्ड 6,824 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। इस अवधि के दौरान नशा तस्करी के जरिए जुटाई गई 19.52 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति को भी अटैच (जब्त) किया गया है।
यह महत्वपूर्ण जानकारी मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में आयोजित राज्य स्तरीय नार्को समन्वय केंद्र (NCORD/एनसीओआरडी) की 14वीं बैठक में दी गई।
12 नशा तस्कर गिरोहों पर कस रहा शिकंजा
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में सक्रिय 12 बड़े नशा तस्करी गिरोहों (ड्रग कार्टेल) की पहचान कर ली गई है और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की तैयारी चल रही है। इसके अलावा, नशा तस्करी में शामिल 29 भगोड़ों की पहचान की जा चुकी है। अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर आरोपियों को दबोचने के लिए दो ‘ब्लू कॉर्नर नोटिस’ और एक ‘रेड कॉर्नर नोटिस’ भी जारी किया गया है।
अवैध संपत्तियों की जब्ती में 230% का उछाल
पिछले वर्ष की तुलना में इस बार नशा तस्करों की संपत्तियों पर कड़ी चोट की गई है। आंकड़ों के मुताबिक:
2025 (जनवरी से सितंबर): केवल 5.92 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच की गई थी।
2026 (जनवरी से सितंबर): यह आंकड़ा बढ़कर 19.52 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो लगभग 230 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्शाता है।
दिसंबर 2026 तक का लक्ष्य: सरकार ने इस साल के अंत तक कुल 30 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
मामलों की दर्ज संख्या और सजा दर में बढ़ोतरी
हरियाणा राज्य नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक संजय कुमार ने बताया कि इस वर्ष सितंबर तक एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के तहत 3,809 एफआईआर (FIR) दर्ज की गई हैं, जबकि बीते वर्ष इसी अवधि में यह संख्या 2,722 थी। तस्करों की गिरफ्तारियों में भी 26.53 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
कड़े पैरवी प्रयासों के चलते नशा तस्करी के मामलों में दोषसिद्धि दर (Conviction Rate) 53.33 प्रतिशत से बढ़कर 58.34 प्रतिशत हो गई है। एनडीपीएस के 50 विशेष मामलों को सख्त निगरानी के लिए चिन्हित किया गया है।
डार्कनेट, क्रिप्टो और सोशल मीडिया पर विशेष नजर
बदलते दौर में नशीले पदार्थों की ऑनलाइन खरीद-फरोख्त को रोकने के लिए पुलिस ने तकनीकी स्तर पर तैयारी की है। डार्कनेट, क्रिप्टोकरेंसी और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए होने वाली तस्करी को ट्रैक और क्रैक करने के लिए एक विशेष प्रकोष्ठ (Special Cell) विकसित किया जा रहा है।

