Yuva Haryana: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के कर्मचारियों और उनके बुजुर्ग माता-पिता के हित में एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि माता-पिता को मिलने वाली मामूली वृद्धावस्था पेंशन (Old-Age Pension) उनके अपने बच्चे पर आश्रित (Dependent) होने के दावे को खारिज नहीं कर सकती।
न्यायाधीश हरप्रीत सिंह बराड़ की एकल पीठ ने 10 हरियाणा सरकार के कर्मचारियों के उन मेडिकल रीइम्बर्समेंट (चिकित्सा प्रतिपूर्ति) दावों को खारिज करने वाले आदेशों को रद्द कर दिया, जिन्हें सिर्फ इस आधार पर खारिज किया गया था कि उनके माता-पिता को वृद्धावस्था पेंशन मिल रही थी।
हाईकोर्ट की मुख्य टिप्पणियां:
कल्याणकारी योजना का दोहरा रवैया गलत: कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा, “राज्य सरकार एक तरफ सामाजिक कल्याण के नाम पर बुजुर्ग नागरिक को मामूली पेंशन देती है, और दूसरी तरफ उसी पेंशन को आधार बनाकर उन्हें अपने बच्चे पर आश्रित मानने से मना कर देती है। ऐसा रवैया एक कल्याणकारी योजना को दूसरी योजना के जरिए बेअसर (Neutralise) करने जैसा है।”
हास्यास्पद और तकनीकी तर्क: हाईकोर्ट ने दावों को इस आधार पर खारिज किए जाने को “अत्यधिक तकनीकी दृष्टिकोण” (Hyper-Technical Approach) करार दिया, जो एक आदर्श नियोक्ता (Model Employer) की भूमिका के विपरीत है।
क्या था पूरा मामला?
अदालत 10 अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। इनमें से एक याचिका हरियाणा के प्राथमिक शिक्षा विभाग में कार्यरत जेबीटी (JBT) शिक्षक सुनील कुमार ने दाखिल की थी।
3.72 लाख का क्लेम खारिज: सुनील कुमार ने अपनी 70 वर्षीय मां के इलाज पर हुए ₹3,72,502 के खर्च के भुगतान के लिए क्लेम किया था। उनकी मां गंभीर बीमारियों से पीड़ित थीं और सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त (Empanelled) अस्पताल में भर्ती थीं।
₹3,500 की आय सीमा का दिया गया हवाला: स्वास्थ्य विभाग ने 13 मार्च 2024 और 21 अप्रैल 2025 के आदेशों के तहत इस क्लेम को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि मां की कुल पारिवारिक आय ₹3,500 प्रति माह की सीमा से अधिक हो जाती है, क्योंकि उन्हें ₹3,000 की वृद्धावस्था पेंशन मिल रही थी।
याचिकाकर्ता और राज्य पक्ष की दलीलें
याचिकाकर्ता के वकील: वकील प्रशांत और संदीप कुमार गोयलत ने तर्क दिया कि ‘पंजाब मेडिकल अटेंडेंस रूल्स, 1940’ के तहत कर्मचारियों के “पूर्ण रूप से आश्रित” माता-पिता को परिवार का हिस्सा माना गया है और इसमें कोई आय सीमा तय नहीं की गई है। कोई भी प्रशासनिक निर्देश (Executive Instructions) वैधानिक नियमों (Statutory Rules) को निष्प्रभावी नहीं बना सकता।
अदालत का स्पष्टीकरण: हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य सेवाएं महानिदेशक, हरियाणा के 3 फरवरी 2025 के पत्र का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि ₹3,000 की वृद्धावस्था पेंशन एक कल्याणकारी वित्तीय सहायता (Awarded Amount) है, इसे नियमित आय (Income) के रूप में नहीं गिना जा सकता।
दो महीने के भीतर भुगतान करने का निर्देश
माननीय अदालत ने संबंधित अधिकारियों को आदेश दिया है कि वे आदेश की प्रमाणित प्रति (Certified Copy) प्राप्त होने के दो महीने (Two Months) के भीतर सभी पात्र रीइम्बर्समेंट दावों की प्रक्रिया पूरी कर राशि स्वीकृत और जारी करें।

