Yuva Haryana : गुरुग्राम में लगातार गहराते जल संकट और मानसून के दौरान होने वाले जलभराव को लेकर हरियाणा एवं पंजाब हाईकोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया है। लंबे समय से लंबित रिट याचिकाओं की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि यदि उचित और प्रभावी कदम आक्रामक तरीके से नहीं उठाए गए तो स्थिति गंभीर बनी रह सकती है।
तेजी से घट रहा भूजल स्तर
8 सितंबर को पारित आदेश में मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की पीठ ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी के नजदीक होने के कारण गुरुग्राम में तेजी से शहरीकरण और आबादी बढ़ रही है, लेकिन जल संसाधनों के प्रबंधन की स्थिति चिंताजनक है।
कोर्ट ने रिकॉर्ड का अध्ययन करते हुए कहा कि गुरुग्राम में एक ओर पीने के पानी की कमी और भूजल भंडार में गिरावट है, वहीं दूसरी ओर मानसून के दौरान भारी बारिश से शहर के कई हिस्सों में जलभराव की स्थिति पैदा हो जाती है।
भूजल दोहन और बोरवेल पर चिंता
हाईकोर्ट ने कहा कि निजी बोरवेल के जरिए लंबे समय से भूजल के अत्यधिक दोहन के कारण गुरुग्राम की नगरपालिका सीमा में भूजल स्तर में लगातार गिरावट आई है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि प्राकृतिक जल निकायों में काफी कमी आई है और जल निकासी वाले चैनलों के बड़े हिस्से पर अवरोध की स्थिति बनी हुई है। इसके चलते बारिश का पानी भूमिगत जलभृतों तक पर्याप्त रूप से नहीं पहुंच पा रहा है।
सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता का इस्तेमाल हो
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सीवेज के उपचार और पुन: उपयोग से जुड़े मुद्दों पर भी चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों का संचालन उनकी इष्टतम क्षमता के अनुसार किया जाना चाहिए, ताकि उपचारित पानी का बेहतर इस्तेमाल हो सके।
कोर्ट ने गुरुग्राम नगर निगम, गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण और हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण से जुड़े अधिकारियों को अगली सुनवाई में जवाब देने के निर्देश दिए हैं।
भूजल स्तर और पानी की उपलब्धता पर रिपोर्ट मांगी
हाईकोर्ट ने केंद्रीय भूजल प्राधिकरण और केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय को गुरुग्राम की नगरपालिका सीमा में भूजल स्तर और पानी की उपलब्धता में हो रही गिरावट का व्यापक आकलन करने के लिए हलफनामा दाखिल करने को कहा है।
कोर्ट ने इससे पहले मामले की निगरानी की जिम्मेदारी नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल को स्थानांतरित करने के अनुरोधों को भी स्वीकार नहीं किया था।
बारिश में जलभराव पर भी सख्ती
गुरुग्राम में मानसून के दौरान जलभराव की समस्या को लेकर भी अदालत ने अधिकारियों से प्रभावी कदम उठाने को कहा। कोर्ट ने कहा कि बारिश के पानी को प्राकृतिक जलभृतों तक पहुंचाने और जल निकासी व्यवस्था को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
मामले की अगली सुनवाई 1 अक्टूबर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए होगी।
पुरानी याचिकाओं पर हो रही सुनवाई
यह मामला करीब दो दशक पुरानी कई रिट याचिकाओं से जुड़ा है। याचिकाओं में अनियंत्रित निर्माण, निजी कॉलोनाइजरों द्वारा व्यावसायिक विस्तार और पर्यावरणीय मानकों के उल्लंघन जैसे मुद्दे उठाए गए हैं।
याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि तेजी से हो रहे रियल एस्टेट विकास के कारण पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन हुआ और बिना मीटर वाले ट्यूबवेलों के जरिए बड़े पैमाने पर भूजल निकासी की गई।

