Yuva Haryana: हरियाणा के राखीगढ़ी की मिट्टी में दफन हजारों साल पुराने इतिहास से ऐसे नवीन प्रमाण सामने आए हैं, जो हड़प्पा सभ्यता के लोगों की जीवनशैली, तकनीकी दक्षता और आर्थिक गतिविधियों को गहराई से समझने में मदद करते हैं। हालिया अनुसंधानों से स्पष्ट हुआ है कि करीब पांच हजार साल पुरानी इस सभ्यता के लोग कपास का व्यापक उपयोग करते थे। उत्खनन के दौरान यहाँ कपास के बीज और वस्त्र निर्माण से जुड़े महत्वपूर्ण पुरातात्विक साक्ष्य मिले हैं।
शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय राखीगढ़ी महोत्सव के तहत आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में देश-विदेश के पुरातत्व विशेषज्ञों और शिक्षाविदों ने इन साक्ष्यों पर गंभीर मंथन किया। कॉन्फ्रेंस के दौरान राखीगढ़ी के उत्खनन से प्राप्त अवशेषों पर विशेष चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि इन साक्ष्यों से प्राचीन लोगों के रहन-सहन, खान-पान और शिल्प कौशल के साथ-साथ तत्कालीन कपड़ा निर्माण तकनीक पर प्रकाश पड़ता है।
वर्ष 1997 में राखीगढ़ी की खुदाई शुरू करवाने वाले डॉ. अमरेंद्र नाथ ने कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कपास के बीजों और वस्त्र निर्माण के प्रमाण साझा किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि राखीगढ़ी में 5,000 वर्ष पुरानी हड़प्पा सभ्यता के मजबूत साक्ष्य हैं और यहाँ इससे भी पहले की मानव बस्ती होने के प्रमाण मौजूद हैं। उत्खनन में बटन, बर्तन, धातु और विभिन्न शिल्प से जुड़ी वस्तुएं भी प्राप्त हुई हैं।
कृषि से आजीविका और अर्थव्यवस्था को समझने पर जोर
कॉन्फ्रेंस में डॉ. एडम ग्रीन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े। उन्होंने राखीगढ़ी में कृषि से संबंधित साक्ष्यों की जानकारी देते हुए बताया कि कृषि अवशेषों का अध्ययन प्राचीन समाज की आजीविका को समझने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। विद्वानों का मानना है कि कृषि, शिल्प और उद्योग किसी भी प्राचीन समाज की अर्थव्यवस्था के मुख्य आधार होते हैं।
बस्ती की संरचना और संरक्षण पर गहन चर्चा
अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में पद्मश्री आर.एस. बिष्ट, प्रोफेसर वसंत शिंदे, पंकज गोयल, डॉ. अनिल पोखरिया, डॉ. नीरज राय और प्रोफेसर वी.एन. प्रभाकर सहित कई प्रमुख विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे। चर्चा के दौरान पुरातात्विक साक्ष्यों के वैज्ञानिक अध्ययन और प्राचीन संस्कृति के संरक्षण पर जोर दिया गया।
पुरातत्त्व एवं संग्रहालय विभाग के उपनिदेशक डॉ. नरेंद्र परमार ने राखीगढ़ी की प्राचीन बस्ती के प्रारूप और उसकी योजनाबद्ध बनावट की जानकारी दी। पूरी कॉन्फ्रेंस के दौरान कपास, वस्त्र निर्माण, कृषि, धातु तकनीक, शिल्प, लेखन कला और बस्ती की संरचना जैसे विषय केंद्र में रहे। विशेषज्ञों ने निष्कर्ष निकाला कि राखीगढ़ी के अवशेषों से तत्कालीन समाज के संसाधन उपयोग और उन्नत तकनीकों को समझने में अभूतपूर्व मदद मिल रही है।

