Yuva Haryana: उच्च शिक्षा, डिग्रियां और योग्यता होने के बावजूद हरियाणा में युवाओं का भविष्य धुंधला नजर आ रहा है। सालों-साल सरकारी भर्ती परीक्षाओं के इंतजार में युवाओं की उम्र सीमा खत्म हो रही है। हताश होकर अपने और अपने परिवार का पेट पालने के लिए ये पढ़े-लिखे युवा अब छोटे-मोटे काम करने को मजबूर हैं।
हरियाणा के विभिन्न जिलों से युवाओं की ऐसी दर्दभरी कहानियां सामने आई हैं:
- पीएचडी चयन के बावजूद दुकानों पर नींबू-मिर्च बेचने को मजबूर (फतेहाबाद)
अनिल कुमार (गांव लाली, फतेहाबाद): MA पास अनिल कुमार ने UGC NET क्लियर किया है। दिल्ली विश्वविद्यालय में PhD के लिए उनका सिलेक्शन हो गया था, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण एडमिशन नहीं ले पाए।
दर्द: ग्रुप-डी की परीक्षा में महज 1 अंक से चूक गए। सरकारी भर्ती का इंतजार करते-करते 7 सितंबर को उनकी तय उम्र (42 वर्ष) पार हो गई।
मौजूदा स्थिति: परिवार चलाने के लिए अनिल अब दुकानों पर नींबू-मिर्च टांग रहे हैं और घरों में पेंट-पुताई का काम कर रहे हैं।
- दो बार HTET पास, फिर भी पढ़ा रहे ट्यूशन (सिरसा)
जयपाल (गांव गुड़िया खेड़ा, सिरसा): 44 वर्षीय जयपाल ग्रेजुएट और JBT पास हैं। उन्होंने हरियाणा अध्यापक पात्रता परीक्षा (HTET) दो बार पास की।
दर्द: शिक्षक भर्ती का इंतजार करते-करते वर्ष 2023 में वे ओवरएज हो गए। उनकी थोड़ी-बहुत खेत की जमीन भी सेम (जलभराव) से प्रभावित हो गई।
मौजूदा स्थिति: अब वे बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर जीवन-यापन कर रहे हैं।
- ठेकेदारी के शोषण से तंग आकर लगाया चाय का ठेला (रोहतक)
परमवीर (रोहतक): BA पास परमवीर ने नगर निगम में नौकरी के लिए आवेदन किया था, लेकिन ठेकेदार के अधीन उन्हें स्वीपर का काम दे दिया गया।
दर्द: 45 साल की उम्र पूरी होने पर विभाग ने उन्हें ओवरएज घोषित कर बाहर कर दिया।
मौजूदा स्थिति: ठेकेदारी प्रथा में शोषण से तंग आकर अब वे सड़क किनारे चाय का ठेला चला रहे हैं।
- ट्यूशन से चल रहा दो परिवारों का गुजारा (चरखी दादरी)
संदीप (गांव भागवी, चरखी दादरी): B.Ed और MA पास संदीप को उनके पिता ने मजदूरी करके पढ़ाया था।
दर्द: 25 साल से नौकरी के लिए भटक रहे संदीप की सरकारी उम्र सीमा निकल गई। 2020 में पिता का साया भी उठ गया।
मौजूदा स्थिति: संदीप अब ट्यूशन पढ़ाकर दो परिवारों (अपना और अपने बेरोजगार बड़े भाई का) का गुजारा कर रहे हैं।
- MA, B.Ed और CTET पास… फिर भी मानदेय के 10 हजार (पानीपत)
अनु (रिसालु, पानीपत): BA, MA, B.Ed और CTET (केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा) पास अनु पिछले 5 साल से HKRN (हरियाणा कौशल रोजगार निगम) में आवेदन कर रही हैं।
दर्द: नौकरी के इंतजार में उम्र 42 वर्ष पार हो गई।
मौजूदा स्थिति: आउट ऑफ स्कूल सर्वे में सिर्फ 10 हजार रुपये प्रति माह पर 6 महीने काम मिलता है, बाकी 6 महीने वे बेरोजगार घर बैठती हैं।
- 10 साल नौकरी तलाशी, अब कर रहे दिहाड़ी मजदूरी (कैथल)
रामनिवास (गांव छौत, कैथल): 43 वर्षीय रामनिवास ने 2008 में ग्रेजुएशन की थी।
दर्द: 10 साल तक नौकरी की तलाश की। 5 साल पहले HKRN में रजिस्ट्रेशन कराने के बाद भी कोई मैसेज या कॉल नहीं आया।
मौजूदा स्थिति: मजबूरी में दुकानों पर काम करने के बाद अब वे दिहाड़ी मजदूरी करने को विवश हैं।
यह कहानी केवल इन 6 युवाओं की नहीं, बल्कि हरियाणा के हजारों-लाखों ऐसे अभ्यर्थियों की आपबीती है जो सालों तक किताबों में सिर खपाने और परीक्षाएं पास करने के बावजूद आज सिस्टम और बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं।

