Yuva Haryana: गुरुग्राम में मानसून के दौरान सड़कों पर गंभीर जलभराव (Waterlogging) होता है, लेकिन इस बारिश के पानी का सही इस्तेमाल भूजल रीचार्ज (Groundwater Recharge) के लिए नहीं हो पा रहा है। नतीजा यह है कि हर दिन शहर में 10 करोड़ लीटर (100 MLD) से अधिक भूजल निकाला जा रहा है।
वर्ष 2023 से 2026 के आंकड़ों के अनुसार, गुरुग्राम शहर और आसपास के इलाकों में जल स्तर (Water Table) 33.55 मीटर से गिरकर 33.76 मीटर पर पहुंच गया है, यानी प्रति वर्ष औसतन 7 सेमी (0.07 मीटर) की गिरावट दर्ज की गई है।
हाई कोर्ट के निर्देश के बाद MCG की बड़ी कार्रवाई
22 सितंबर को पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने टिप्पणी की थी कि गुरुग्राम एक तरफ पीने के पानी की भारी कमी झेल रहा है, तो दूसरी तरफ मानसून की बारिश का फायदा नहीं उठा पा रहा है।
हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए नगर निगम गुरुग्राम (MCG) ने 6 अक्टूबर को जीएमडीए (GMDA) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) को एक ड्राफ्ट प्लान भेजा है:
- 94 ट्यूबवेल होंगे बंद: जिन क्षेत्रों में नहरी पानी की पर्याप्त आपूर्ति (Canal Water Supply) है, वहां जनवरी तक 94 ट्यूबवेल बंद कर दिए जाएंगे। इससे प्रतिदिन 9.7 MLD भूजल निकासी कम होगी।
- बाकी 487 ट्यूबवेल की समीक्षा: नगर निगम के कुल 581 बोरवेलों में से बाकी 487 ट्यूबवेलों की हर तिमाही (Quarterly) समीक्षा की जाएगी।
मांग और आपूर्ति में भारी अंतर
वर्तमान मांग: सेक्टर 1 से 115 तक प्रतिदिन 815 मिलियन लीटर (MLD) पानी की मांग है।
वर्तमान आपूर्ति: बासई और चंदू बुढेड़ा ट्रीटमेंट प्लांट से केवल 770 MLD पानी ही उपलब्ध हो पाता है।
भविष्य की जरूरत: जीएमडीए के अनुमान के मुताबिक, वर्ष 2031 तक गुरुग्राम-मानेसर अर्बन कॉम्प्लेक्स में पानी की मांग बढ़कर 1,135 MLD हो जाएगी।
भूजल का अवैध दोहन और सीएजी/सीजीडब्ल्यूबी की रिपोर्ट
केंद्रीय भूजल प्राधिकरण (CGWB) ने 2013 से ही गुरुग्राम को “अति-शोषित” (Over-exploited) श्रेणी में रखा है। सीजीडब्ल्यूबी के 2024 के मूल्यांकन के अनुसार, गुरुग्राम अर्बन में भूजल निकासी रीचार्ज की तुलना में 326.52 प्रतिशत अधिक है।
हरियाणा जल संसाधन प्राधिकरण (HWRA) ने जांच में पाया कि शहर में 60 बिल्डर्स और उद्योग अवैध रूप से भूजल निकाल रहे हैं। हालांकि, अब तक केवल 9 बोरवेल ही सील किए गए हैं।
जीएमडीए (GMDA) का मास्टर प्लान और रीचार्ज योजनाएं
GMDA के सीईओ पीसी मीणा के अनुसार, शहर में सड़कों से पानी बहाने के बजाय उसे जमीन के अंदर सोखने (Porous Ground) योग्य बनाने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। इससे जलभराव की समस्या कम होगी और भूजल रीचार्ज भी बढ़ेगा।
मार्च 2027 तक: 312 पार्कों तक उपचारित जल (Treated Water) पहुंचाया जाएगा।
मई 2027 तक: रैनवॉटर हार्वेस्टिंग (Rainwater Harvesting) संरचनाओं की मरम्मत की जाएगी।
दिसंबर 2028 तक: MCG के 113 तालाबों में से प्राथमिकता के आधार पर तालाबों का जीर्णोद्धार (Pond Revival) पूरा किया जाएगा।
जीएमडीए और एमसीजी द्वारा अगले 30 दिनों के भीतर एक अंतिम समन्वित योजना (Coordinated Plan) पेश की जाएगी।

