हरियाणा में भर्ती के दौरान छोटी गलती पर अभ्यर्थी नहीं होंगे बाहर, हाईकोर्ट ने 145 याचिकाओं पर सुनाया बड़ा फैसला
Yuva Haryana: हरियाणा में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई उम्मीदवार निर्धारित कटऑफ तारीख पर भर्ती के लिए जरूरी योग्यता रखता है, तो ऑनलाइन आवेदन फॉर्म भरने या दस्तावेज अपलोड करने में हुई छोटी और सुधार योग्य गलती के कारण उसे भर्ती प्रक्रिया से बाहर नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने 145 याचिकाओं का एक साथ निपटारा करते हुए हरियाणा सरकार को तीन महीने के भीतर सभी भर्ती एजेंसियों के लिए एक समान भर्ती नीति बनाने का निर्देश दिया है।
यह फैसला हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (HSSC) और हरियाणा लोक सेवा आयोग (HPSC) की भर्तियों से जुड़े मामलों में आया है। जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने कहा कि भर्ती में दस्तावेजों की जांच का उद्देश्य उम्मीदवार की वास्तविक योग्यता की पुष्टि करना है, न कि यह परखना कि वह ऑनलाइन पोर्टल पर दस्तावेज कितनी कुशलता से अपलोड कर सकता है।
कटऑफ से अधिक अंक के बावजूद भर्ती से बाहर हुआ अभ्यर्थी
मामले की प्रमुख याचिका एक ऐसे अभ्यर्थी से जुड़ी थी, जिसने मेवात कैडर में प्राथमिक शिक्षक पद के लिए आवेदन किया था। उम्मीदवार BC-B श्रेणी से था और उसने आवेदन में अपने प्रमाणपत्र की सही जानकारी दर्ज की थी, लेकिन साइबर कैफे संचालक की गलती से पुराना प्रमाणपत्र अपलोड हो गया।
उम्मीदवार ने लिखित परीक्षा में 72.20 अंक हासिल किए थे, जबकि संबंधित श्रेणी का कटऑफ 70.30 अंक था। इसके बावजूद दस्तावेज में कमी के कारण उसकी उम्मीदवारी रद्द कर दी गई। अभ्यर्थियों का तर्क था कि जब वे निर्धारित तारीख पर पात्रता रखते थे और गलती केवल दस्तावेज अपलोड करने में हुई थी, तो उन्हें सुधार का मौका मिलना चाहिए था।
हाईकोर्ट ने तय किया पात्रता जांचने का तरीका
अदालत ने पात्रता और उसके प्रमाण के बीच अंतर स्पष्ट किया। कोर्ट के अनुसार, निर्धारित कटऑफ तारीख पर जरूरी योग्यता होना अनिवार्य है और इसमें छूट नहीं दी जा सकती। लेकिन उस योग्यता को साबित करने वाले दस्तावेज में सुधार योग्य कमी होने मात्र से उम्मीदवार की उम्मीदवारी समाप्त नहीं होनी चाहिए।
हाईकोर्ट ने इसके लिए ‘रूट ऑफ एलिजिबिलिटी टेस्ट’ नाम से चार चरणों वाला परीक्षण निर्धारित किया। इसके तहत देखा जाएगा कि उम्मीदवार कटऑफ तारीख पर पात्र था या नहीं, उसके दावे पर कोई कानूनी रोक तो नहीं थी, उसे गलती सुधारने का प्रभावी अवसर मिला या नहीं और उस कमी का भर्ती पर क्या असर पड़ा।
हालांकि, धोखाधड़ी, गलत जानकारी देने या सुधार का उचित अवसर मिलने के बावजूद उसका इस्तेमाल नहीं करने वाले उम्मीदवारों को इस राहत का लाभ नहीं मिलेगा।
प्रमाणपत्र के लिए समय पर आवेदन करने वालों को भी राहत
अदालत ने ‘पेंडिंग एप्लीकेशन रूल’ भी स्पष्ट किया। इसके अनुसार, यदि किसी उम्मीदवार ने कटऑफ तारीख से पहले निर्धारित सरकारी प्रक्रिया के तहत प्रमाणपत्र के लिए पूरा आवेदन कर दिया था, लेकिन प्रमाणपत्र बाद में जारी हुआ, तो आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर उसे कटऑफ तारीख पर पात्र माना जा सकता है।
हालांकि, उम्मीदवार को यह साबित करना होगा कि आवेदन समय पर किया गया था और प्रमाणपत्र उसी आवेदन के आधार पर जारी हुआ है। केवल शपथपत्र या पोर्टल में तकनीकी खराबी का सामान्य दावा पर्याप्त नहीं होगा।
HSSC और HPSC को देने होंगे सुधार के मौके
हाईकोर्ट ने भविष्य की भर्तियों के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। भर्ती एजेंसियों को आवेदन की अंतिम तारीख के बाद पर्याप्त समय की सुधार विंडो देनी होगी। दस्तावेजों की जांच के दौरान किसी कमी पर उम्मीदवार को अस्थायी अस्वीकृति का नोटिस देना होगा और उसे जवाब देने या गलती सुधारने के लिए कम से कम सात दिन का समय मिलेगा।
जहां प्रमाणपत्र संख्या या परिवार पहचान पत्र नंबर उपलब्ध कराया गया हो, वहां दस्तावेजों का सत्यापन SARAL पोर्टल या फैमिली इंफॉर्मेशन डेटा रिपॉजिटरी के माध्यम से किया जाना चाहिए। भर्ती विज्ञापनों में प्रमाणपत्र का निर्धारित प्रारूप, संबंधित वित्तीय वर्ष और जारी होने की अंतिम तारीख भी स्पष्ट बतानी होगी।
तीन महीने में बनेगी समान भर्ती नीति
हाईकोर्ट ने हरियाणा के मुख्य सचिव को तीन महीने के भीतर ऐसी समान नीति बनाने का निर्देश दिया है, जो HSSC और HPSC दोनों पर लागू होगी। अदालत ने 145 याचिकाकर्ताओं के मामलों पर आठ सप्ताह के भीतर दोबारा विचार कर कारण सहित आदेश जारी करने को कहा है।
जो उम्मीदवार पात्र और मेरिट के आधार पर चयन के योग्य पाए जाएंगे, उन्हें उपलब्ध रिक्तियों या जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त पद सृजित करके नियुक्ति देने का निर्देश दिया गया है। उन्हें वरिष्ठता जैसे काल्पनिक लाभ मिल सकते हैं, जबकि वेतन संबंधी वास्तविक लाभ ज्वाइनिंग की तारीख से मिलेगा। पहले से नियुक्त और लगातार काम कर रहे कर्मचारियों को हटाया नहीं जाएगा।
इस फैसले से उन अभ्यर्थियों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिनकी पात्रता सही होने के बावजूद आवेदन या दस्तावेजों की सुधार योग्य तकनीकी कमियों के कारण उम्मीदवारी प्रभावित हुई थी।

