पेपर लीक और नकल पर हरियाणा में भी 10 साल तक जेल, 50 लाख रुपये जुर्माना; संगठित गिरोह पर 10 करोड़ की पेनल्टी
Yuva Haryana: हरियाणा में प्रतियोगी और सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक, नकल, फर्जीवाड़े और संगठित तरीके से धांधली करने वालों के खिलाफ अब सख्त कानूनी कार्रवाई की तैयारी है। केंद्र सरकार के सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन कानून, 2026 के तहत दोषी पाए जाने पर 10 साल तक की जेल और 50 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान किया गया है। वहीं, यदि परीक्षा में गड़बड़ी के पीछे संगठित गिरोह या नेटवर्क शामिल पाया जाता है, तो दोषियों को कम से कम 7 साल और अधिकतम 10 साल की सजा तथा कम से कम 10 करोड़ रुपये का जुर्माना भुगतना पड़ सकता है।
हरियाणा के उच्चतर शिक्षा विभाग ने भी केंद्र के नए कानून के प्रावधानों के पालन को लेकर सरकारी कॉलेजों और संबंधित संस्थानों को निर्देश जारी किए हैं। उच्चतर शिक्षा महानिदेशक एस. नारायणन की ओर से जारी परिपत्र में अधिकारियों को कानून की जानकारी कर्मचारियों तक पहुंचाने और परीक्षा संबंधी गतिविधियों में नियमों का पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है।
परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों पर सख्त कार्रवाई
केंद्र सरकार ने सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों को रोकने के लिए वर्ष 2024 में कानून बनाया था। अब 2026 के संशोधन के जरिए इसमें सजा और जुर्माने की राशि बढ़ाई गई है। नए प्रावधानों के अनुसार, पेपर लीक करने, परीक्षा में नकल या अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने और अन्य प्रतिबंधित गतिविधियों में शामिल व्यक्ति को 5 से 10 साल तक की जेल हो सकती है। इसके साथ अधिकतम 50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है।
संगठित अपराध के मामलों में सजा और भी कड़ी होगी। ऐसे अपराध में शामिल लोगों को कम से कम 7 साल की जेल होगी, जिसे 10 साल तक बढ़ाया जा सकता है। इसके अलावा कम से कम 10 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है।
पेपर लीक से लेकर फर्जी वेबसाइट बनाने तक अपराध
नए कानून के दायरे में केवल प्रश्नपत्र लीक करना या परीक्षा में नकल करना ही नहीं, बल्कि परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित करने वाली कई गतिविधियां शामिल हैं। इनमें प्रमुख रूप से:
- प्रश्नपत्र या उत्तर कुंजी लीक करना।
- OMR शीट या उत्तर पुस्तिका में छेड़छाड़ करना।
- कंप्यूटर नेटवर्क या परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ी करना।
- परीक्षार्थियों को अनधिकृत तरीके से मदद पहुंचाना।
- फर्जी वेबसाइट बनाकर एडमिट कार्ड या नियुक्ति पत्र जारी करना।
- परीक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी को गलत तरीके से हासिल करना या छिपाना।
- निर्धारित अनुमति के बिना परीक्षा केंद्र से बाहर परीक्षा आयोजित करना।
इन गतिविधियों में शामिल पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई हो सकती है।
परीक्षा कराने वाली एजेंसियां भी होंगी जिम्मेदार
नए कानून में परीक्षा आयोजित करने वाली निजी एजेंसियों और सेवा प्रदाताओं की जवाबदेही भी तय की गई है। यदि कोई एजेंसी परीक्षा में गड़बड़ी या अनुचित गतिविधियों में शामिल पाई जाती है, तो उस पर 5 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलावा उसे अधिकतम 8 साल तक सार्वजनिक परीक्षाएं आयोजित करने से प्रतिबंधित किया जा सकता है।
यदि एजेंसी के निदेशक या वरिष्ठ अधिकारी भी गड़बड़ी में शामिल पाए जाते हैं, तो उन्हें 5 से 10 साल तक की जेल और 5 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है। परीक्षा दोबारा आयोजित कराने पर आने वाला खर्च भी संबंधित एजेंसी से वसूला जा सकता है।
दो महीने में जांच, तीन महीने में सुनवाई का प्रावधान
संशोधित कानून में जांच और न्यायिक प्रक्रिया को तेज करने पर भी जोर दिया गया है। पुलिस में मामला दर्ज होने के बाद जांच दो महीने के भीतर पूरी करने का प्रावधान है। जांच अधिकारी का पद DSP या ACP से नीचे नहीं होना चाहिए। केंद्र सरकार जरूरत पड़ने पर जांच किसी केंद्रीय एजेंसी या विशेष कार्यबल को भी सौंप सकती है।
इसके अलावा प्रत्येक राज्य और केंद्रशासित प्रदेश को विशेष फास्ट ट्रैक अदालतें नामित करनी होंगी। इन अदालतों में मामले की सुनवाई दिन-प्रतिदिन के आधार पर होगी और चार्जशीट दाखिल होने के तीन महीने के भीतर ट्रायल पूरा करने का प्रावधान रखा गया है।
हरियाणा में पहले से मौजूद है अपना परीक्षा कानून
गौरतलब है कि हरियाणा में पेपर लीक और अनुचित साधनों को रोकने के लिए वर्ष 2021 में ही हरियाणा सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम बनाया गया था। अब केंद्र के संशोधित कानून के बाद परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
केंद्र का कानून UPSC, SSC, रेलवे भर्ती बोर्ड, IBPS, NTA और केंद्र सरकार के मंत्रालयों तथा विभागों की अधिसूचित परीक्षाओं पर लागू होता है। इसलिए राज्य की प्रत्येक भर्ती परीक्षा पर इसकी स्वतः लागू होने की बात नहीं मानी जानी चाहिए। हरियाणा के सरकारी कॉलेजों और संबंधित संस्थानों को जारी निर्देशों के अनुसार अपने अधिकार क्षेत्र में नियमों का पालन सुनिश्चित करना होगा।
सरकार का उद्देश्य परीक्षा में मेहनत करने वाले योग्य उम्मीदवारों के हितों की रक्षा करना और पेपर लीक तथा नकल के संगठित नेटवर्क पर प्रभावी रोक लगाना है।

