रात में भी खेतों की निगरानी, आग लगाने पर FIR-चालान के साथ जमीन के रिकॉर्ड में होगी ‘रेड एंट्री; किसानों को मशीनरी के इस्तेमाल पर ₹1,200 प्रति एकड़ प्रोत्साहन
Yuva Haryana : हरियाणा में धान की पराली जलाने पर रोक लगाने के लिए सरकार ने इस बार निगरानी और कार्रवाई का नया तंत्र तैयार किया है। जिला और ब्लॉक स्तर पर ‘पराली संरक्षण बल’ तैनात किए जाएंगे। ये दल खेतों में आग की घटनाओं पर नजर रखने के साथ मौके पर पहुंचकर कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे। निगरानी के लिए ड्रोन का इस्तेमाल होगा और देर शाम से रात तक पैट्रॉल भी बढ़ाई जाएगी।
मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने गुरुवार को पराली जलाने की रोकथाम और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के निर्देशों के अनुपालन को लेकर राज्य कार्ययोजना की समीक्षा की। बैठक में बताया गया कि पराली संरक्षण बिल में पुलिस, कृषि विभाग, प्रशासन और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी शामिल होंगे।

रात में पराली जलाने वालों पर भी नजर
सरकार ने देर शाम और रात में विशेष निगरानी के निर्देश दिए हैं। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव विजयेंद्र कुमार के अनुसार, कुछ मामलों में किसान उपग्रह निगरानी से बचने के लिए अंधेरा होने के बाद खेतों में पराली जलाने का प्रयास करते हैं। ऐसे मामलों को रोकने के लिए जमीनी पैट्रॉल मजबूत की जा रही है।
खेतों में सक्रिय आग की लोकेशन मोबाइल एप के जरिए दर्ज की जाएगी। इसके बाद पराली संरक्षण बल मौके पर पहुंचकर कार्रवाई करेगा।
पराली जलाने पर तीन स्तरों पर कार्रवाई
सत्यापित मामले में केवल जुर्माना ही नहीं, बल्कि कई स्तरों पर कार्रवाई होगी। संबंधित किसान के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने, चालान करने और भूमि रिकॉर्ड में ‘रेड एंट्री’ करने का प्रावधान है। इसके अलावा निर्धारित पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति भी वसूली जाएगी।
किसानों को प्रति एकड़ ₹1,200 का प्रोत्साहन
सरकार ने पराली जलाने के बजाय फसल अवशेष प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए किसानों को ₹1,200 प्रति एकड़ प्रोत्साहन देने का प्रावधान किया है। इसके साथ ही फसल अवशेष प्रबंधन मशीनरी खरीदने पर सब्सिडी भी दी जा रही है।
धान की कटाई के समय किसानों को मशीनरी की कमी न हो, इसके लिए बेलर, रेकर्स और अन्य मशीनों को अलग-अलग जिलों में कटाई के कार्यक्रम के अनुसार स्थानांतरित करने की योजना बनाई गई है।
8,134 नोडल अधिकारी संभालेंगे गांवों की निगरानी
सरकार ने खेत स्तर पर निगरानी के लिए 8,134 ग्राम स्तरीय नोडल अधिकारी नियुक्त किए हैं। राज्य के करीब 5,600 गांवों में 6.21 लाख से अधिक पंजीकृत धान उत्पादक किसान हैं और लगभग 34.1 लाख एकड़ में धान की खेती होती है।
अब तक 6,04,314 किसानों को नोडल अधिकारियों द्वारा कवर किया जा चुका है। करीब 16,971 किसान अभी इस कवरेज से बाहर हैं।
हॉटस्पॉट गांवों में एक नोडल अधिकारी अधिकतम 50 किसानों और सामान्य गांवों में अधिकतम 100 किसानों से जुड़ा रहेगा।
ड्रोन से भी होगी निगरानी
सरकार ने ड्रोन आधारित निगरानी व्यवस्था को भी मजबूत करने का फैसला किया है। सीएक्यूएम के निर्देशों के तहत चिन्हित गांवों और संवेदनशील स्थानों पर ड्रोन तैनात किए जाएंगे। उपायुक्तों को पहले से ऐसे स्थानों की पहचान करने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके अलावा, खेतों में जले हुए क्षेत्र का आकलन करने के लिए अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया गया है और ‘भूवन’ एप के जरिए सर्वे करने के निर्देश दिए गए हैं।
पराली को उद्योगों तक पहुंचाने की भी तैयारी
सरकार पराली को केवल खेत से हटाने के बजाय उसके उपयोग की व्यवस्था पर भी जोर दे रही है। सरकारी और पंचायत भूमि पर पराली की गांठों के भंडारण की व्यवस्था की जाएगी। बेलिंग, पेलेटिंग और ब्रिकेटिंग जैसी सुविधाओं को चिन्हित कर किसानों को पराली का इस्तेमाल करने वाले उद्योगों से जोड़ने की योजना है।
सरकार के अनुसार, गांव और ब्लॉक स्तर पर अब तक 646 जागरूकता शिविर, संवाद कार्यक्रम और प्रदर्शन आयोजित किए जा चुके हैं, जिनमें 23 हजार से अधिक किसानों ने भाग लिया है। स्कूल-कॉलेजों में भी 370 जागरूकता गतिविधियां आयोजित की गई हैं।

