हरियाणा के 11 जिलों में दो साल से जिला खेल अधिकारी नहीं, कार्यवाहक के भरोसे चल रहा काम
Yuva Haryana: हरियाणा में खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने और खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं देने के दावों के बीच खेल विभाग में अधिकारियों की कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। प्रदेश के 11 जिलों में पिछले करीब दो साल से नियमित जिला खेल अधिकारी (DSO) तैनात नहीं हैं। इन जिलों में कार्यवाहक अधिकारियों के सहारे काम चलाया जा रहा है। इसका असर विभाग के प्रशासनिक कामकाज के साथ-साथ खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों से जुड़े मामलों पर भी पड़ने की आशंका है।
जिला खेल अधिकारी का पद जिले में खेल गतिविधियों के संचालन, खेल सुविधाओं की निगरानी, खिलाड़ियों की समस्याओं और विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में लंबे समय तक नियमित अधिकारी की नियुक्ति नहीं होने से कई जरूरी काम प्रभावित हो सकते हैं।
पदोन्नति का इंतजार कर रहे वरिष्ठ प्रशिक्षक
खेल विभाग में लंबे समय से कार्यरत कई वरिष्ठ प्रशिक्षक जिला खेल अधिकारी बनने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। कुछ प्रशिक्षकों ने पदोन्नति से संबंधित अपनी फाइलें और जरूरी दस्तावेज भी जमा करा दिए हैं, लेकिन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है।
बताया गया है कि यदि समय पर पदोन्नति हो जाती तो पांच से छह वरिष्ठ खेल प्रशिक्षक अब तक डिप्टी डायरेक्टर के पद तक पहुंच सकते थे। इससे विभाग में अधिकारियों की कमी भी कुछ हद तक दूर हो सकती थी। लेकिन पदोन्नति प्रक्रिया लंबित रहने के कारण प्रशिक्षकों को इंतजार करना पड़ रहा है।
विभागीय स्तर पर पदोन्नति में देरी का असर कर्मचारियों के मनोबल पर भी पड़ सकता है। लंबे समय से एक ही पद पर काम कर रहे प्रशिक्षकों को अपनी वरिष्ठता और अनुभव के अनुसार जिम्मेदारी मिलने की उम्मीद रहती है।
11 जिलों में खाली हैं जिला खेल अधिकारी के पद
प्रदेश के कुल 23 जिलों में से 11 जिलों में जिला खेल अधिकारी के पद खाली होने की जानकारी सामने आई है। इन जिलों में कार्यवाहक व्यवस्था के जरिए जिम्मेदारियां संभाली जा रही हैं। हरियाणा खेल विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध जिला खेल अधिकारियों की सूची में भी कई जिलों के अधिकारियों के नाम के साथ ‘Officiating’ यानी कार्यवाहक दर्ज है।
आधिकारिक सूची में अंबाला, भिवानी, चरखी दादरी, फरीदाबाद, गुरुग्राम, करनाल, महेंद्रगढ़, पलवल, रेवाड़ी और रोहतक सहित कई जिलों में कार्यवाहक अधिकारियों का उल्लेख है। इससे स्पष्ट है कि विभाग में नियमित और कार्यवाहक नियुक्तियों का मुद्दा अब भी बना हुआ है।
खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों के काम पर पड़ सकता है असर
जिला खेल अधिकारी के पास खेल गतिविधियों के संचालन से जुड़े कई प्रशासनिक अधिकार होते हैं। इनमें खेल मैदानों और सुविधाओं की निगरानी, खिलाड़ियों की जरूरतों पर कार्रवाई, प्रशिक्षण केंद्रों की व्यवस्था और विभागीय योजनाओं को लागू कराने जैसे काम शामिल हैं।
जब किसी जिले में नियमित अधिकारी नहीं होता, तो कार्यवाहक अधिकारी को अतिरिक्त जिम्मेदारी संभालनी पड़ती है। ऐसे में एक अधिकारी पर कई जगहों का काम होने से फैसले लेने और फाइलों के निपटारे में देरी हो सकती है। खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए भी इंतजार करना पड़ सकता है।
कार्यवाहक व्यवस्था में अधिकारियों के पास निर्णय लेने की स्वतंत्रता और अधिकारों को लेकर भी व्यावहारिक सीमाएं हो सकती हैं। हालांकि, सभी जिलों में कामकाज प्रभावित होने की स्थिति एक जैसी हो, यह जरूरी नहीं है।
हरियाणा खेलों में आगे, लेकिन प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत करना जरूरी
हरियाणा ने कुश्ती, बॉक्सिंग, हॉकी, एथलेटिक्स और अन्य खेलों में राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। राज्य सरकार भी खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने और खेल सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए कई योजनाएं चला रही है। जून 2026 में खेल मंत्री गौरव गौतम ने 23 उत्कृष्ट खिलाड़ियों को वरिष्ठ और कनिष्ठ कोच के पदों पर नियुक्ति पत्र दिए थे। इनमें तीन वरिष्ठ और 20 कनिष्ठ कोच शामिल थे।
ऐसे में खेल विभाग में जिला स्तर पर अधिकारियों की नियमित नियुक्ति और पदोन्नति प्रक्रिया को समय पर पूरा करना जरूरी है। यदि खाली पदों को भरा जाता है तो प्रशासनिक कामकाज में तेजी आने के साथ प्रशिक्षकों को भी आगे बढ़ने के अवसर मिल सकते हैं।
प्रदेश में खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं है। जरूरत इस बात की है कि खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण और सुविधाएं देने वाली प्रशासनिक व्यवस्था भी उतनी ही मजबूत हो।

