हरियाणा के 145 निजी स्कूलों ने पोर्टल पर अपलोड नहीं किए मान्यता के दस्तावेज, अटक सकता है बजट
Yuva Haryana: हरियाणा में चिराग योजना के तहत निजी स्कूलों की ओर से मान्यता से जुड़े दस्तावेज पोर्टल पर अपलोड नहीं करने का मामला सामने आया है। प्रदेश के 23 जिलों में 145 निजी स्कूलों ने अब तक मान्यता प्रमाण पत्र और इससे संबंधित जरूरी जानकारी पोर्टल पर अपडेट नहीं की है। शिक्षा विभाग ने इस पर चिंता जताते हुए स्कूल संचालकों को 5 नवंबर तक सभी दस्तावेज अपलोड करने के निर्देश दिए हैं। तय समयसीमा तक जानकारी उपलब्ध नहीं कराने वाले स्कूलों के लिए बजट और फीस प्रतिपूर्ति की प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका है।
शिक्षा निदेशालय के अनुसार, चिराग योजना के तहत निजी स्कूलों को अपनी मान्यता से संबंधित दस्तावेज पोर्टल पर दर्ज करना जरूरी है। इसके आधार पर विभाग स्कूलों की पात्रता और योजना के तहत मिलने वाली सरकारी सहायता से जुड़े रिकॉर्ड की जांच करता है। ऐसे में दस्तावेज अधूरे रहने या अपलोड नहीं होने से बजट आवंटन और अन्य विभागीय प्रक्रियाओं में परेशानी आ सकती है।
आठ महीने बाद भी 145 स्कूलों ने नहीं दी जानकारी
शैक्षणिक सत्र शुरू हुए करीब आठ महीने बीत चुके हैं, लेकिन 23 जिलों के 145 निजी स्कूलों ने अब तक मान्यता का प्रमाण पत्र पोर्टल पर अपलोड नहीं किया है। शिक्षा निदेशालय ने इस स्थिति पर एतराज जताते हुए स्कूल संचालकों को जल्द से जल्द रिकॉर्ड पूरा करने के निर्देश दिए हैं।
विभाग ने पांच नवंबर तक पोर्टल पर मान्यता से जुड़े सभी जरूरी दस्तावेज अपलोड करने को कहा है। स्कूलों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके दस्तावेज सही और अद्यतन हों, ताकि विभाग उनकी जानकारी का सत्यापन कर सके।
हिसार में सबसे ज्यादा 20 स्कूलों की जानकारी लंबित
जिलेवार आंकड़ों के अनुसार, हिसार में सबसे ज्यादा 20 निजी स्कूलों ने मान्यता संबंधी जानकारी अपलोड नहीं की है। भिवानी में 18, करनाल में 12, कैथल में 11, जींद में 10 और रेवाड़ी में 10 स्कूलों का रिकॉर्ड लंबित बताया गया है।
इसके अलावा नूंह में एक, पलवल में एक, पानीपत में एक और सोनीपत में दो स्कूलों ने जानकारी पूरी नहीं की है। बाकी जिलों में भी ऐसे स्कूलों की पहचान की गई है। कुल मिलाकर प्रदेश के 23 जिलों में 145 स्कूलों का रिकॉर्ड अपडेट होना बाकी है।
बजट और सरकारी भुगतान पर पड़ सकता है असर
चिराग योजना के तहत पात्र विद्यार्थियों को मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों में पढ़ाई का अवसर दिया जाता है। योजना के नियमों के अनुसार, सरकारी स्कूलों से आने वाले पात्र विद्यार्थियों को निर्धारित शर्तों के तहत निजी स्कूलों में दाखिला दिया जाता है और संबंधित स्कूलों को फीस की प्रतिपूर्ति की जाती है।
मौलिक शिक्षा निदेशालय की ओर से शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए जारी दिशा-निर्देशों में भी स्पष्ट किया गया है कि फीस प्रतिपूर्ति के लिए स्कूलों का पोर्टल पर जरूरी विवरण और फीस संबंधी जानकारी अपडेट होना आवश्यक है। दाखिले के बाद विद्यार्थियों का रिकॉर्ड एमआईएस पोर्टल पर दर्ज करना भी जरूरी है।
ऐसे में मान्यता प्रमाण पत्र अपलोड नहीं करने वाले स्कूलों की जानकारी अधूरी रहने पर सत्यापन और भुगतान की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इससे स्कूल संचालकों को फीस प्रतिपूर्ति मिलने में देरी की आशंका भी बनी हुई है।
पहले भी दस्तावेजों की कमी से अटकी थी प्रक्रिया
हरियाणा में निजी स्कूलों के दस्तावेज और मान्यता का मुद्दा पहले भी सामने आ चुका है। प्रदेश के 1,107 निजी स्कूलों का एमआईएस पोर्टल एक्सेस रोक दिया गया था। इनमें 145 ऐसे स्कूल भी शामिल थे जिन्हें जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों की मंजूरी तो मिली थी, लेकिन मान्यता नहीं मिल पाई थी। रिपोर्ट में गुरुग्राम के 99 स्कूलों का भी उल्लेख किया गया था।
वहीं, चिराग योजना के तहत दाखिले के बाद स्कूलों को विद्यार्थियों का पूरा डेटा एमआईएस पोर्टल पर अपडेट करना जरूरी है। ऐसा नहीं करने पर फीस प्रतिपूर्ति का दावा जारी नहीं किया जा सकता।
पांच नवंबर तक दस्तावेज अपलोड करने के निर्देश
शिक्षा विभाग ने स्कूल संचालकों को पांच नवंबर तक मान्यता से जुड़े सभी दस्तावेज पोर्टल पर अपलोड करने को कहा है। जिला शिक्षा अधिकारियों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे संबंधित स्कूलों से संपर्क कर लंबित जानकारी पूरी करवाएं।
अब देखना होगा कि तय समयसीमा में सभी 145 स्कूल अपना रिकॉर्ड अपडेट कर पाते हैं या नहीं। यदि दस्तावेज समय पर अपलोड नहीं होते हैं तो चिराग योजना के तहत बजट और फीस प्रतिपूर्ति से जुड़ी प्रक्रिया में अड़चन आ सकती है।

