Yuva Haryana : हरियाणा के श्रम कल्याण विभाग में हुए 1500 करोड़ रुपए के बड़े घोटाले में इस विभाग के अलावा अन्य विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी गाज गिर सकती है।
एक प्रमुख समाचार पत्र में प्रकाशित खबर के अनुसार श्रम विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ-साथ ग्राम सचिवों, अन्य विभागों के टेक्निकल अधिकारियों पर भी जांच बैठाई जा सकती है।
जानकारी के अनुसार श्रमिकों की वर्क स्लिप को ग्राम सचिव, पटवारी, नायब तहसीलदार के अलावा विभिन्न विभागों के जेई और एसडीओ द्वारा वेरीफाई किया गया था और उसके बाद ही स्लिप को पोर्टल पर अपलोड किया गया था।
इन अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा पोर्टल पर अपनी आईडी द्वारा सत्यापन का कार्य किया गया था और इसके बाद ही श्रम विभाग द्वारा लोगों के खातों में योजना के तहत भुगतान किया गया।
योजना के तहत 18 से 59 और 60 साल से कम उम्र तक के लाभार्थी को 90 दिन का काम करना दिखाना पड़ता है। इस स्कीम के लिए 2008 से 2018 तक ऑफलाइन आवेदन होते थे। लेकिन 2018 के अंत में इस प्रक्रिया को ऑनलाइन कर दिया गया था।
श्रम विभाग का जिम्मा संभालते ही अनिल विज के संज्ञान में गड़बड़ी का यह बड़ा मामला आ गया था। एक ही व्यक्ति द्वारा हजारों श्रमिकों का वेरिफिकेशन करने की जानकारी मिलने पर विज को बड़ी गड़बड़ी की आशंका हुई और इसके बाद उन्होंने जांच करवाई तो सामने आया कि 13 जिलों में करोड़ों रुपए का घोटाला किया गया है। हालांकि, अभी 9 जिलों की रिपोर्ट आना बाकी है, ऐसे में घोटाले की रकम और भी बड़ी होगी।
इस घोटाले में सीएससी सेंटर संचालकों से लेकर बीच के दलालों की भी भूमिका की भी जांच करवाई जा सकती है।



