हरियाणा के सभी सरकारी और निजी स्कूलों का होगा सुरक्षा ऑडिट, बच्चों की निगरानी और आपातकालीन व्यवस्था की होगी जांच
Yuva Haryana: हरियाणा में स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश के सभी सरकारी और निजी स्कूलों का सुरक्षा ऑडिट कराया जाएगा। इस दौरान स्कूलों में छोटे बच्चों और विशेष आवश्यकता वाले विद्यार्थियों की निगरानी, सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था, शिक्षकों और सहायक कर्मचारियों की ड्यूटी तथा आपातकालीन स्थिति में कार्रवाई के इंतजामों की जांच की जाएगी। यह फैसला पंचकूला के सेक्टर-20 स्थित सरकारी स्कूल में छह साल की बच्ची के साथ हुई कथित मारपीट की गंभीर घटना के बाद लिया गया है।
शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने स्पष्ट किया है कि बच्चों की सुरक्षा और उनके कल्याण से किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकार ने बच्ची के इलाज का पूरा खर्च उठाने का भी फैसला किया है। मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति गठित की गई है, जिसे सात दिन के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
पंचकूला की घटना के बाद सरकार सख्त
28 अक्टूबर को पंचकूला के सेक्टर-20 स्थित सरकारी स्कूल में छह साल की विशेष आवश्यकता वाली बच्ची के साथ कथित तौर पर एक अन्य छात्र ने मारपीट की थी। बच्ची को गंभीर चोटें आईं और उसे इलाज के लिए पीजीआई चंडीगढ़ में भर्ती कराया गया। पुलिस के अनुसार, बच्ची की हालत अब खतरे से बाहर है।
घटना के सामने आने के बाद स्कूल में बच्चों की निगरानी, शिक्षकों की मौजूदगी और सीसीटीवी कैमरों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे। बच्ची के परिजनों ने स्कूल प्रशासन पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। हालांकि, मामले में जिम्मेदारी और घटना की पूरी परिस्थितियों का पता जांच पूरी होने के बाद ही चलेगा।
पांच सदस्यीय समिति करेगी जांच
पंचकूला जिला प्रशासन ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति बनाई है। इसकी अध्यक्षता अतिरिक्त उपायुक्त (ADC) करेंगे। समिति में जिला शिक्षा अधिकारी, जिला बाल संरक्षण अधिकारी, पुलिस आयुक्त की ओर से नामित पुलिस अधिकारी और विशेष शिक्षक या बाल मनोवैज्ञानिक को शामिल किया गया है।
समिति को सात दिन के भीतर विस्तृत रिपोर्ट देने को कहा गया है। जांच में सीसीटीवी फुटेज के आधार पर घटना का क्रम समझा जाएगा। इसके अलावा यह भी देखा जाएगा कि घटना के समय कक्षा में शिक्षक, सहायक कर्मचारी और विशेष शिक्षक मौजूद थे या नहीं। बच्ची को प्राथमिक उपचार देने और अस्पताल पहुंचाने में कोई देरी तो नहीं हुई, इसकी भी पड़ताल होगी।
स्कूलों में इन व्यवस्थाओं की होगी जांच
प्रदेशव्यापी सुरक्षा ऑडिट में स्कूलों की निगरानी प्रणाली और आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र को विशेष रूप से परखा जाएगा। इसमें मुख्य रूप से निम्न बिंदुओं पर ध्यान दिया जाएगा:
- छोटे बच्चों और विशेष आवश्यकता वाले विद्यार्थियों की निगरानी की व्यवस्था।
- स्कूलों में सीसीटीवी कैमरों की उपलब्धता और उनके नियमित संचालन की स्थिति।
- शिक्षकों, सहायकों और विशेष शिक्षकों की ड्यूटी तथा उपस्थिति।
- किसी घटना के समय प्राथमिक उपचार और अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था।
- स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी और सुरक्षा नियमों का पालन।
सरकार यह भी सुनिश्चित करना चाहती है कि स्कूलों में सुरक्षा से जुड़े नियम केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि उनका पालन जमीनी स्तर पर हो।
बच्ची के इलाज का खर्च उठाएगी सरकार
शिक्षा मंत्री ने कहा है कि बच्ची के इलाज का पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी। परिवार की सहायता के लिए एक वरिष्ठ अधिकारी को भी जिम्मेदारी दी गई है। पुलिस इस मामले की अलग से जांच कर रही है। पुलिस ने स्कूल प्रशासन के खिलाफ कथित लापरवाही को लेकर एफआईआर दर्ज की है। वहीं, घटना में शामिल नाबालिग बच्चों से संबंधित प्रक्रिया किशोर न्याय अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार आगे बढ़ाई जाएगी।
हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने भी मामले का संज्ञान लिया है और स्कूल में बच्चों की निगरानी, स्टाफ की उपलब्धता तथा घटना के बाद उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी है।
बच्चों की पहचान उजागर करने पर हो सकती है कार्रवाई
सरकार और प्रशासन ने लोगों तथा मीडिया से अपील की है कि घटना से जुड़े ऐसे वीडियो या जानकारी सोशल मीडिया पर साझा न करें, जिनसे बच्ची या दूसरे नाबालिग बच्चे की पहचान उजागर हो। किशोर न्याय अधिनियम के तहत बच्चे की पहचान सार्वजनिक करना दंडनीय हो सकता है।
केंद्र सरकार की स्कूल सुरक्षा एवं संरक्षा दिशानिर्देश-2021 में भी स्कूल प्रबंधन, प्रधानाचार्य और शिक्षकों की जिम्मेदारियां तय की गई हैं। इनमें बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण, शिकायत की प्रक्रिया और सुरक्षा संबंधी जवाबदेही पर जोर दिया गया है।
अब प्रदेशव्यापी सुरक्षा ऑडिट के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि स्कूलों में मौजूदा व्यवस्थाएं कितनी प्रभावी हैं और कहां सुधार की जरूरत है। सरकार की इस पहल का उद्देश्य भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकना और हर बच्चे के लिए सुरक्षित स्कूल वातावरण सुनिश्चित करना है।

