हरियाणा की 298 औद्योगिक इकाइयों पर बंदी और सीलिंग की कार्रवाई, पानीपत सबसे आगे; 72 यूनिट रडार पर
Yuva Haryana: दिल्ली-NCR में बढ़ते वायु प्रदूषण के बीच केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने हरियाणा की 298 औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ बंदी और सीलिंग की कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इन इकाइयों पर ऑनलाइन पोर्टल पर उत्सर्जन और अपशिष्ट निगरानी से जुड़ा निर्धारित डेटा उपलब्ध नहीं कराने का मामला है। प्रदेश में पानीपत सबसे ऊपर है, जहां 72 औद्योगिक इकाइयां इस कार्रवाई के दायरे में हैं। इसके बाद सोनीपत, फरीदाबाद, करनाल और गुरुग्राम का स्थान है।
CPCB की जांच में सामने आया कि कई उद्योगों ने ऑनलाइन कंटीन्यूअस एमिशन एंड एफ्लुएंट मॉनिटरिंग सिस्टम (OCEMS) के माध्यम से जरूरी आंकड़े निर्धारित स्तर तक उपलब्ध नहीं कराए। बोर्ड ने संबंधित राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को ऐसे उद्योगों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने और निगरानी व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए हैं।
पानीपत में सबसे ज्यादा 72 औद्योगिक इकाइयां
हरियाणा के NCR जिलों में कार्रवाई के दायरे में आई इकाइयों की संख्या इस प्रकार है:
- पानीपत: 72 इकाइयां
- सोनीपत: 60 इकाइयां
- फरीदाबाद: 53 इकाइयां
- करनाल: 29 इकाइयां
- गुरुग्राम: 23 इकाइयां
- झज्जर: 18 इकाइयां
- पलवल: 15 इकाइयां
- नूंह, जींद और रोहतक: 6-6 इकाइयां
- रेवाड़ी: 4 इकाइयां
- भिवानी: 3 इकाइयां
- फतेहाबाद: 2 इकाइयां
- चरखी दादरी: 1 इकाई
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि पानीपत और सोनीपत में औद्योगिक इकाइयों पर निगरानी और कार्रवाई का दबाव सबसे अधिक है। दोनों जिले प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में शामिल हैं।
NCR की 648 इकाइयों में डेटा उपलब्धता तय मानक से कम
CPCB के विश्लेषण में दिल्ली-NCR की कुल 648 औद्योगिक इकाइयों में निगरानी डेटा की उपलब्धता निर्धारित 85 प्रतिशत के स्तर से कम पाई गई। इनमें हरियाणा की 298, उत्तर प्रदेश की 260, राजस्थान की 80 और दिल्ली की 10 इकाइयां शामिल हैं।
यह विश्लेषण 25 सितंबर 2026 तक नए OCEMS पोर्टल पर डेटा भेजना शुरू कर चुकी इकाइयों के आंकड़ों के आधार पर किया गया। जांच में कुल 2,291 औद्योगिक इकाइयों के डेटा का अध्ययन किया गया था। इसमें अत्यधिक प्रदूषण फैलाने वाले उद्योग, कॉमन वेस्ट ट्रीटमेंट सुविधाएं और रेड कैटेगरी के उद्योग भी शामिल थे।
85 प्रतिशत डेटा उपलब्ध कराना जरूरी
CPCB ने औद्योगिक इकाइयों के लिए निगरानी से जुड़ा कम से कम 85 प्रतिशत डेटा उपलब्ध कराना जरूरी किया है। इसका उद्देश्य उद्योगों से निकलने वाले धुएं और अपशिष्ट की लगातार निगरानी करना है, ताकि प्रदूषण नियंत्रण के नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा सके।
बोर्ड ने निर्देश दिए हैं कि जिन इकाइयों का डेटा उपलब्धता स्तर कम है, उनका तत्काल निरीक्षण किया जाए। खासतौर पर 50 प्रतिशत से कम डेटा उपलब्ध कराने वाली इकाइयों को प्राथमिकता के आधार पर जांच के दायरे में रखने को कहा गया है।
संबंधित राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को हर महीने की 16 तारीख और अंतिम दिन कार्रवाई की रिपोर्ट CPCB को भेजनी होगी। इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि निर्देशों के बाद कितनी इकाइयों ने सुधार किया और कितनों के खिलाफ कार्रवाई हुई।
वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए सख्ती
CPCB ने वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 की धारा 18(1)(b) के तहत संबंधित बोर्डों को निर्देश जारी किए हैं। इसका उद्देश्य दिल्ली-NCR में औद्योगिक उत्सर्जन पर नियंत्रण रखना और प्रदूषण की निगरानी को प्रभावी बनाना है।
हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव योगेश कुमार के अनुसार, नियमों का पालन नहीं करने वाली औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ बंदी की कार्रवाई शुरू की गई है। उन्होंने बताया कि उत्सर्जन डेटा की उपलब्धता में सुधार भी देखने को मिला है।
उद्योगों को नियमों का पालन करना होगा
दिल्ली-NCR में सर्दियों के दौरान औद्योगिक उत्सर्जन वायु गुणवत्ता को प्रभावित करने वाला एक महत्वपूर्ण कारक बन जाता है। इसी वजह से प्रदूषण नियंत्रण एजेंसियां उद्योगों की निगरानी और निरीक्षण बढ़ा रही हैं।
CPCB ने स्पष्ट किया है कि निगरानी डेटा उपलब्ध कराने और प्रदूषण नियंत्रण के निर्धारित मानकों का पालन करना उद्योगों की जिम्मेदारी है। जिन इकाइयों में कमी मिलेगी, उनके खिलाफ नियमानुसार बंदी और सीलिंग सहित कार्रवाई की जा सकती है।

