Yuva Haryana : हरियाणा के पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश में जातिगत भेदभाव खत्म करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। यूपी सरकार ने कानूनी दस्तावेजों, पुलिस रिकॉर्ड्स और सार्वजनिक स्थानों पर अब जाति का उल्लेख नहीं करने के आदेश जारी किए है।
दरअसल, यूपी की इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जाति व्यवस्था को लेकर सख्त टिप्पणी करते हुए ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि समाज में जातिगत महिमामंडन बंद किया जाना चाहिए।
अब यूपी सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश की पालना की है।
जातिगत भेदभाव खत्म के लिए यूपी सरकार के फैसले
- जाति आधारित रैलियों पर पूरी तरह से रोक लगा
- गाड़ियों और सार्वजनिक जगहों पर कास्ट नहीं लिखी जाएगी
- पुलिस एफआईआर, अरेस्ट मेमो और सरकारी डॉक्यूमेंट्स में भी किसी की कास्ट का जिक्र नहीं होगा
हाईकोर्ट का स्पष्ट मानना है कि अगर देश को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाना है तो जाति व्यवस्था को खत्म करना होगी।
आपको यह भी बता दें कि यूपी के इटावा से जुड़े कथित शराब तस्करी से संबंधित आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने के लिए याचिकाकर्ता की याचिका को खारिज करते हुए अपने महत्वपूर्ण फैसले में हाईकोर्ट ने यह तल्ख टिप्पणी की थी और यूपी सरकार आदेशों की पालना करने के निर्देश दिए थे।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि जातिगत महिमामंडन राष्ट्र-विरोधी है और वंश के बजाए संविधान के प्रति श्रद्धा ही देशभक्ति का सर्वोच्च रूप और राष्ट्र सेवा की सच्ची अभिव्यक्ति है।
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि नीति और नियम निर्माताओं को सार्वजनिक वाहनों में जाति के प्रतीकों और नारों पर अंकुश लगाने, सोशल मीडिया पर जातिगत महिमामंडन वाली सामग्री को नियंत्रित करने और विशिष्ट जाति आधारित संस्थानों के बजाए अंतर-जातीय संस्थानों और सामुदायिक केंद्रों को बढ़ावा देने पर विचार करना चाहिए।



