Yuva Haryana : हरियाणा में साल 2024 में हुए विधानसभा चुनाव को लेकर कई विधानसभा सीटों के परिणाम पर निरंतर सावल उठ रहे है। रानियां, उचाना और फरीदाबाद विधानसभा क्षेत्र के बाद अब एक और सीट पर हुए विधानसभा चुनाव पर सवाल उठे हैं। इनमें हरियाणा के दो बीजेपी के मंत्रियों के विधानसभा क्षेत्र शामिल है।
दरअसल, अब पलवल विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी के विजेता उम्मीदवार और राज्य मंत्री गौरव गौतम के खिलाफ कांग्रेस नेता करण सिंह दलाल हाईकोर्ट पहुंचे है। हाल ही में करण दलाल की याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई है।
करण दलाल ने आरोप लगाया है कि बीजेपी उम्मीदवार ने चुनाव प्रचार के दौरान धर्म और सांप्रदायिक भावनाओं का सहारा लिया था, जिससे चलते उन्हें चुनाव में हार का सामना करना पड़ा।

दलाल ने अपनी याचिका में अपील की है कि गौरव का चुनाव भ्रष्ट आचरण के तहत रद्द किया जाए क्योंकि गौतम ने भगवान और धर्म के नाम पर वोट मांगकर जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 का उल्लंघन किया है।
वहीं सुनवाई के दौरान गौरव गौतम की ओर से पेश हुए वकील ने सभी आरोपों से इनकार किया है और कहा कि गौतम ने कभी भी किसी धार्मिक सभा में भगवान या धर्म के नाम पर वोट नहीं मांगे।
करण दलाल की ओर से हाईकोर्ट में एक वीडियो रिकॉर्डिंग भी प्रस्तुत की गई, जिसमें गौरव गौतम कन्हैया मित्तल के साथ एक धार्मिक मंच पर भाषण देते हुए नजर आ रहे है। करण दलाल के वकील के मुताबिक वीडियो में गौतम लोगों से भगवान के नाम पर वोट देने की अपील करते हुए और ऐसे नारे लगाओ कि मेवात तक सुनाई दें कहते हुए दिखाई दे रहे हैं।
दलाल ने अपनी याचिका में दो प्रमुख घटनाओं का भी उल्लेख किया है। पहली 12 सितंबर 2024 को पलवल के देव नगर में आयोजित भागवत गीता कथा में गौतम की भागीदारी और दूसरी 19 सितंबर को ब्राह्मण धर्मशाला में खाटू श्याम बाबा कार्यक्रम में उनकी मौजूदगी।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि दोनों ही मौकों पर गौतम ने सनातन धर्म का हवाला देकर वोट मांगने की अपील की। दलाल ने कोर्ट को यह भी बताया कि 25 सितंबर 2024 को प्रकाशित एक समाचार में इस संबंध में दर्ज शिकायत का उल्लेख है, जिसके आधार पर चुनाव आयोग ने गौरव गौतम को नोटिस जारी किया था।
आपको बता दें कि इससे पहले हरियाणा के फरीदाबाद विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित हुए कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल के भी निर्वाचन को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में कांग्रेस प्रत्याशी द्वारा चुनौती दी गई थी। उस याचिका में भी प्रचार के दौरान विपुल गोयल पर धार्मिक आधार पर वोट मांगने का आरोप लगाया गया।
साथ ही फरीदाबाद चुनाव से संबंधित याचिका में ईवीएम में तकनीकी अनियमितताओं के गंभीर आरोप भी लगाए गए। याचिकाकर्ता ने कहा कि जिन मशीनों की बैटरी का स्तर 90 प्रतिशत से अधिक था, उसमें अधिकांश वोट विपुल गोयल के पक्ष में गए जबकि 60–70 प्रतिशत बैटरी स्तर वाली मशीनों में वोट कांग्रेस को मिले। ऐसे में यह अंतर संभावित छेड़छाड़ का संकेत देता है।
वहीं जींद जिले की उचाना कलां विधानसभा सीट पर भी मात्र 32 मतों के अंतर से चुनाव हारे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बृजेंद्र सिंह ने भी हाईकोर्ट में चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे। बृजेंद्र सिंह द्वारा 215 अमान्य डाक मतों की दोबारा गिनती की मांग उठाई गई।
बृजेंद्र सिंह का आरोप है कि कुल 1377 डाक मतों में से 215 को रिटर्निंग ऑफिसर ने अमान्य घोषित कर दिया था, जबकि शेष बचे 1158 डाक मतों में से 636 उनके पक्ष में पड़े थे।
आपको यह भी बता दें कि सबसे पहले रानियां विधानसभा चुनाव में इनेलो विधायक अर्जुन चौटाला की जीत पर सवाल उठे थे। यहां कांग्रेस प्रत्याशी सर्व मित्र कंबोज ने 9 बूथों की ईवीएम और वीवीपैट की जांच की मांग उठाई थी। सर्व मित्र ने चुनाव परिणाम से असंतुष्ट होकर जिला निर्वाचन अधिकारी को पत्र लिखा था और रीकाउंटिंग करवाई थी। हालांकि, रीकाउंंटिंग से भी कांग्रेस प्रत्याशी संतुष्ट नजर नहीं आए।



