Yuva Haryana: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा के सभी स्कूलों को एंटी-बुलिंग और मानसिक स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़े नियमों को सख्ती से लागू करने का आदेश दिया है। अदालत ने साफ किया है कि छात्र-छात्राओं के खिलाफ लैंगिक पहचान (Gender Identity) और यौन रुझान (Sexual Orientation) के आधार पर होने वाले उत्पीड़न और बुलिंग को रोकने के लिए विशेष कदम उठाए जाएं।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस मनीषा बत्रा की पीठ ने कहा कि “कागजों पर लिखे नियम संकट में फंसे बच्चों को सुरक्षा प्रदान नहीं कर पाते”। कोर्ट ने 31 अक्टूबर को याचिका का निस्तारण करते हुए कहा कि यह मामला इस बात पर गंभीर सवाल उठाता है कि स्कूल प्रशासन द्वारा पीड़ित बच्चों की शिकायतों को किस तरह से निपटाया जाता है।
अदालत के प्रमुख निर्देश
आंतरिक समितियां और शिकायत तंत्र: हाईकोर्ट ने सभी स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे अपनी आंतरिक कमेटियों और शिकायत तंत्र में बुलिंग तथा उत्पीड़न के मामलों को स्पष्ट रूप से शामिल करें। शिकायतों पर त्वरित और गोपनीय तरीके से कार्रवाई होनी चाहिए तथा संज्ञेय अपराध होने पर तुरंत पुलिस को सूचित किया जाना चाहिए।
CBSE को सख्त हिदायत: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) को 2015 के अपने एंटी-बुलिंग सर्कुलर को सख्ती से लागू कराने का निर्देश दिया गया है। स्कूलों को समर्पित एंटी-बुलिंग कमेटी बनाने, शिक्षकों को ट्रेनिंग देने और कड़े अनुशासनात्मक कदम उठाने होंगे। इसके साथ ही CBSE को स्कूलों से वार्षिक वेलनेस रिपोर्ट एकत्र कर जांचने और लापरवाही बरतने वाले स्कूलों पर कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय और NCERT: कोर्ट ने केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय को निर्देश दिया है कि वह NCERT से परामर्श कर छात्र-काउंसलर अनुपात, LGBTQIA+ ट्रेनिंग और पाठ्यक्रम बदलावों पर छह महीने के भीतर तर्कसंगत आदेश जारी करे।
क्या है पूरा मामला?
यह याचिका आरती मल्होत्रा द्वारा अक्टूबर 2022 में दायर की गई थी। आरती मल्होत्रा के 16 वर्षीय बेटे ने दिल्ली पब्लिक स्कूल (DPS), ग्रेटर फरीदाबाद में लगातार हो रही बुलिंग, मानसिक उत्पीड़न और यौन शोषण से तंग आकर 24 फरवरी 2022 को आत्महत्या कर ली थी।
मृतक छात्र ने अपने सुसाइड नोट में स्कूल प्रबंधन को जिम्मेदार ठहराया था। छात्र डिस्लेक्सिया (Dyslexia), डिप्रेशन और पोस्ट-ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD) से पीड़ित था। आरोप है कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद स्कूल प्रशासन ने कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की और 10वीं की बोर्ड परीक्षा के दौरान उसे राइटर (Scribe) देने से भी इनकार कर दिया था।
अदालत ने कहा कि हालांकि आपराधिक जांच पुलिस द्वारा चार्जशीट दाखिल किए जाने के बाद अब ट्रायल कोर्ट के क्षेत्राधिकार में है, लेकिन स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नियमों का जमीनी स्तर पर सख्त पालन अनिवार्य है।

