Yuva Haryana: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा में पंजीकृत लगभग 54.56 लाख श्रमिकों से जुड़े न्यूनतम मजदूरी के क्रियान्वयन पर राज्य सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है। अदालत ने पूछा है कि ईंट-भट्ठों, छोटी दुकानों और अन्य संस्थानों में न्यूनतम मजदूरी की दरों को प्रभावी ढंग से कैसे लागू किया जाएगा।
वकील न होने पर सिरसा के युवक ने भेजी ई-मेल
सिरसा के मौजगढ़ निवासी हर्षदीप ने 13 अगस्त को हाईकोर्ट को एक ई-मेल भेजा था। इसमें उन्होंने बताया कि हरियाणा सरकार द्वारा अकुशल श्रमिकों के लिए न्यूनतम मजदूरी तय किए जाने के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों, विशेषकर ईंट-भट्ठों और दुकानों पर काम करने वाले मजदूरों का शोषण हो रहा है और उन्हें तय दर से काफी कम भुगतान किया जा रहा है।
हर्षदीप ने ई-मेल में यह भी उल्लेख किया कि उनके पास जनहित याचिका (PIL) दाखिल करने के लिए साधन, वकील और पैसे नहीं हैं। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अश्विनी मिश्रा और न्यायाधीश रोहित कपूर की खंडपीठ ने इन तथ्यों की गंभीरता को देखते हुए इसे स्वयं संज्ञान (Suo Moto) लेते हुए जनहित याचिका के रूप में स्वीकार किया।
एक्शन मोड में आया श्रम विभाग, जारी किए सख्त निर्देश
हाईकोर्ट द्वारा संज्ञान लेते ही श्रम विभाग में हड़कंप मच गया है। श्रम आयुक्त कार्यालय ने तुरंत प्रभाव से सभी डिप्टी लेबर कमिश्नर, असिस्टेंट लेबर कमिश्नर और निरीक्षकों को निर्देश जारी कर दिए हैं। आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि न्यूनतम मजदूरी की अधिसूचना को छोटे प्रतिष्ठानों सहित सभी जगह सख्ती से लागू कराया जाए और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
वहीं, कोर्ट का नोटिस मिलने के सवाल पर विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने मामला विचाराधीन होने का हवाला देते हुए आगे टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
व्यवस्था पर उठे सवाल: 1 अधिकारी पर 3 जिलों का प्रभार
न्यूनतम मजदूरी के प्रावधानों में सभी श्रेणियों के श्रमिक शामिल हैं, लेकिन प्रदेश में श्रम विभाग का ढांचा इसे लागू कराने में कमजोर साबित हो रहा है।
“श्रम निरीक्षकों से अधिकार छीन लिए गए हैं और एक अधिकारी के पास 2 से 3 जिलों का प्रभार है। इस विषय पर सरकार से पहले भी बात की गई थी और दोबारा मजबूती से पक्ष रखा जाएगा।”— पवन कुमार, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, भारतीय मजदूर संघ

