Yuva Haryana: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा के स्टेट टीचर अवार्ड विजेताओं को एक बड़ी राहत दी है। जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ की पीठ ने शिक्षा विभाग के उन आदेशों को रद्द कर दिया है, जिनके तहत राज्य स्तरीय पुरस्कार विजेता शिक्षकों को मिले दो अतिरिक्त इंक्रीमेंट वापस लिए जा रहे थे। अदालत ने स्पष्ट किया कि पुरस्कार के तौर पर दिया गया प्रोत्साहन कोई सामान्य वेतन वृद्धि नहीं है, जिसे सरकार अपने मनमाने ढंग से वापस ले सके।
क्या था पूरा मामला?
उमा कुमारी यादव, प्रदीप मलिक समेत 18 याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया था कि उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार दिया गया था, जिसके साथ 2 अतिरिक्त इंक्रीमेंट भी मिले थे।
हालांकि, शिक्षा विभाग ने वित्त विभाग के 12 नवंबर 2024 के एक स्पष्टीकरण का हवाला देते हुए इन्हें वापस लेना शुरू कर दिया था। विभाग का तर्क था कि हरियाणा सिविल सेवा (वेतन) नियम 2016 के तहत ये इंक्रीमेंट मान्य नहीं हैं। इस कार्रवाई के कारण शिक्षकों का वेतन कम हो गया था और सेवानिवृत्त हो चुके शिक्षकों को भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा था।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान रेणु भार्गव के मामले का जिक्र किया गया, जिन्हें 2020 में राजकीय शिक्षक पुरस्कार मिलने के बाद 2 अग्रिम वेतन वृद्धियां मिली थीं।
कोर्ट ने दो टूक शब्दों में कहा कि:
- पुरस्कार योजना और सामान्य वेतन नियम पूरी तरह अलग हैं।
- राजकीय शिक्षक पुरस्कार का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों का मनोबल बढ़ाना और उन्हें सम्मानित करना है।
- समान परिस्थितियों वाले शिक्षकों के साथ अलग-अलग व्यवहार नहीं किया जा सकता।
किसे और क्या मिलेगा फायदा?
सेवारत शिक्षक: जिन शिक्षकों का इंक्रीमेंट विभाग ने काटा था, उनका वेतन फिर से बढ़ेगा।
सेवानिवृत्त शिक्षक: जो शिक्षक रिटायर्ड हो चुके हैं, उनकी पेंशन और अन्य रिटायरमेंट बेनेफिट्स (Retirement Benefits) की गणना अब बढ़े हुए वेतन के आधार पर फिर से की जाएगी।
तत्काल प्रभाव से बहाली: हाईकोर्ट ने संबंधित विभाग को आदेश दिया है कि पुरानी व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से बहाल किया जाए।

