Yuva Haryana : किशाऊ बांध परियोजना को लेकर उत्तर भारत के छह राज्यों का कई दशकों का इंतजार अब खत्म हो चुका है। दरअसल, भारत सरकार ने हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान और दिल्ली में जल व बिजली संकट दूर के लिए इन राज्यों का आपस में बड़ा समझौत कराया है। इस समझौते से हरियाणा को क्या फायदा होगा ? चलिए आपको बताते है…
हरियाणा सरकार के मुताबिक यमुना में हरियाणा के पानी का हिस्सा 48 प्रतिशत है। ऐसे में यमुना में पानी की उपलब्धता बढ़ने से हरियाणा को इसका सीधा लाभ मिलेगा।
किशाऊ परियोजना के साथ-साथ रेणुका जी और लखवार परियोजनाएं भी हरियाणा के लिए महत्वपूर्ण हैं। इन दोनों परियोजनाओं पर पहले से ही निर्माण कार्य चल रहा है और अब जल्द ही किशाऊ परियोजना पर भी काम शुरू होने की उम्मीद है।

राज्य सरकार का मानना है कि रेणुका जी, लखवार और किशाऊ इन तीनों परियोजनाओं से हरियाणा के पानी का शेयर लगभग 1143 एमसीएम होगा। इन तीनों परियोजनाओं से कुल 2676 क्यूसेक पानी की उपलब्धता बढ़ेगी, जिसमें से 1280 क्यूसेक पानी हरियाणा के हिस्से में होगा।
हरियाणा में बढ़ती आबादी और विकास के साथ आने वाले समय में पानी की जरूरत भी बढ़ेगी। ऐसे में इन परियोजनाओं से बढ़ने वाली पानी की उपलब्धता हरियाणा की वर्तमान जरूरतों के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी।
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का कहना है कि वर्षों से लंबित किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना पर अब राज्यों के बीच सहमति बनने से इसके क्रियान्वयन का रास्ता साफ हुआ है। पानी और बिजली के बंटवारे सहित परियोजना से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर सहमति बनना सभी संबंधित राज्यों के लिए सकारात्मक कदम है।
सीएम ने उम्मीद जताई है कि किशाऊ परियोजना पर जल्द काम शुरू होगा और इसका लाभ आने वाले समय में हरियाणा को भी मिलेगा।



