Yuva Haryana: IDFC फर्स्ट बैंक में 504 करोड़ रुपये के कथित घोटाले के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने हरियाणा के पांच IAS अधिकारियों समेत एक पूर्व IAS अधिकारी के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी मांगी है। जांच एजेंसी का आरोप है कि बैंक अधिकारियों ने हरियाणा सरकार के आठ विभागों और सार्वजनिक संस्थाओं से संबंधित धनराशि को कथित तौर पर अवैध तरीके से दूसरे खातों में स्थानांतरित किया। इस मामले में वरिष्ठ अधिकारियों पर बैंककर्मियों के साथ मिलीभगत कर सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप है।
CBI ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 19 के तहत अभियोजन की मंजूरी मांगी है। यह किसी लोकसेवक के खिलाफ अदालत में मुकदमा शुरू करने से पहले आवश्यक कानूनी प्रक्रिया है। एजेंसी ने हरियाणा सरकार को एक रिपोर्ट भी सौंपी है, जिसमें आरोपियों की कथित भूमिका का विवरण दिया गया है।
किन IAS अधिकारियों के नाम सामने आए ?
CBI की जांच में जिन अधिकारियों के नाम सामने आए हैं, उनमें विनीत गर्ग, पंकज अग्रवाल, मोहम्मद शायिन, साकेत कुमार और आरके सिंह शामिल हैं। इनके अलावा पूर्व IAS अधिकारी प्रदीप कुमार का नाम भी मामले में सामने आया है।
जांच एजेंसी के मुताबिक, अधिकारियों ने कथित तौर पर बैंक अधिकारियों के साथ मिलकर हरियाणा सरकार के विभागों और सार्वजनिक संस्थाओं के लिए निर्धारित धनराशि को गलत तरीके से दूसरी जगह भेजने में भूमिका निभाई।
विनीत गर्ग पर कई सावधि जमा कराने का आरोप
CBI ने आरोप लगाया है कि विनीत गर्ग ने IDFC फर्स्ट बैंक में कई सावधि जमा (FD) कराने की अनुमति दी थी। उस समय वह हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HSPCB) के अध्यक्ष थे।
जांच एजेंसी के अनुसार, दिसंबर 2024 में गर्ग के बोर्ड अध्यक्ष बनने से लगभग चार महीने पहले बैंक ने बोर्ड की जमा राशि के लिए बोली लगाई थी, लेकिन उसे निर्धारित जमा राशि नहीं मिली थी। इसके बावजूद गर्ग के कार्यभार संभालने के बाद बैंक में कई सावधि जमा कराई गईं।
CBI के मुताबिक, 8 मार्च 2025 को 50 करोड़ रुपये, 27 मार्च को 17.90 करोड़ रुपये, 2 जुलाई को 37.78 करोड़ रुपये और 18 जुलाई को 5.8 करोड़ रुपये की जमा कराई गई। इसके बाद 1 अक्टूबर को 50 करोड़ रुपये, 24 अक्टूबर को 45.74 करोड़ रुपये और 22 जनवरी 2026 को 45.74 करोड़ रुपये की जमा का भी उल्लेख किया गया है।
एजेंसी का दावा है कि बैंक की निर्धारित जमा सीमा 50 करोड़ रुपये थी, लेकिन कई जमा के जरिए इस सीमा से अधिक राशि रखी गई। जांच में यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ जमा के लिए बैंक की ओर से अधिक ब्याज दर की पेशकश की गई थी।
साकेत कुमार पर मौखिक निर्देश देने का आरोप
CBI ने साकेत कुमार पर आरोप लगाया है कि उन्होंने मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना से संबंधित धनराशि के खातों के चयन में कथित तौर पर हस्तक्षेप किया।
जांच एजेंसी के अनुसार, कुमार ने बैंक अधिकारियों को मौखिक निर्देश देकर दो बैंकों का चयन कराया और लिखित निर्णय लेने से बचते रहे। एजेंसी का दावा है कि इस प्रक्रिया में वित्त विभाग की आवश्यक मंजूरी और औपचारिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
CBI ने यह भी आरोप लगाया है कि कुमार ने संबंधित खातों में जमा 75 करोड़ रुपये को स्थानांतरित करने की अनुमति दी, जबकि योजना के तहत कोई काम शुरू नहीं हुआ था और भुगतान भी लंबित था। एजेंसी के अनुसार, दिसंबर 2025 के अंतिम सप्ताह में खातों को बंद कर उनका निपटारा कर दिया गया, जिससे कथित अनियमितताओं से संबंधित रिकॉर्ड प्रभावित हो सकते थे।
पंकज अग्रवाल पर धोखाधड़ी को नजरअंदाज करने का आरोप
जांच एजेंसी ने पंकज अग्रवाल की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। उस समय वह कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के प्रधान सचिव थे और हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड से जुड़े थे।
CBI के मुताबिक, जुलाई 2025 में अग्रवाल ने राजेश सांगवान को IDFC फर्स्ट बैंक में खाता खोलने का प्रस्ताव दिया था, जबकि बोर्ड ने पहले ही दूसरे बैंक में खाता खोलने का प्रस्ताव रखा था।
जांच एजेंसी का आरोप है कि अग्रवाल के निर्देश पर खोले गए खाते को बाद में IDFC फर्स्ट बैंक से दूसरे बैंक में स्थानांतरित कर दिया गया। CBI का दावा है कि अग्रवाल ने कथित धोखाधड़ी को नजरअंदाज किया और शिकायत दर्ज कराने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए।
मोहम्मद शायिन पर 1.67 लाख रुपये के लाभ का आरोप
CBI ने हरियाणा पावर जनरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPGCL) के तत्कालीन प्रबंध निदेशक मोहम्मद शायिन पर भी सवाल उठाए हैं।
जांच एजेंसी के अनुसार, शायिन को ऋषि से 1.67 लाख रुपये का कथित लाभ मिला। आरोप है कि उन्हें जानकारी थी कि उनके खर्चों का भुगतान उसी बैंक के जरिए किया जा रहा था, जिसमें HPGCL की धनराशि उनके नियंत्रण में थी।
CBI का कहना है कि वित्त विभाग में स्थानांतरण के बाद भी कथित लाभ जारी रहा। एजेंसी के मुताबिक, अधिकारियों और बैंक के बीच कथित लेन-देन की समय-सीमा तथा शायिन की आधिकारिक भूमिका उनके इरादे की जांच के लिए महत्वपूर्ण है।
आरके सिंह पर सरकारी धन के दुरुपयोग की साजिश का आरोप
CBI ने IAS अधिकारी आरके सिंह पर पंचकूला नगर निगम और कालका नगर परिषद से संबंधित धनराशि के कथित दुरुपयोग की साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया है।
जांच एजेंसी के मुताबिक, सिंह ने बैंक अधिकारियों और अन्य लोगों के साथ मिलकर सरकारी धन को गलत तरीके से इस्तेमाल करने की योजना में भूमिका निभाई। रिपोर्ट के अनुसार, सिंह को गिरफ्तार किया गया था और बाद में उन्हें निलंबित कर दिया गया।
रिटायरमेंट के दिन प्रदीप कुमार गिरफ्तार
इस मामले में पूर्व IAS अधिकारी प्रदीप कुमार का नाम भी सामने आया है। CBI ने उन पर हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के धन के कथित दुरुपयोग के लिए बैंक अधिकारियों के साथ आपराधिक साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया है।
रिपोर्ट के अनुसार, कुमार को उनकी सेवानिवृत्ति के दिन गिरफ्तार किया गया था।
जांच में बैंक अधिकारियों की भूमिका भी सामने आई
CBI का आरोप है कि IDFC फर्स्ट बैंक के अधिकारियों ने हरियाणा सरकार के आठ विभागों और सार्वजनिक संस्थाओं से संबंधित धनराशि को अवैध तरीके से दूसरे खातों में स्थानांतरित किया। इस मामले में बैंक अधिकारियों और संबंधित सरकारी अधिकारियों के बीच कथित मिलीभगत की जांच की जा रही है।
फिलहाल, अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी मांगने की प्रक्रिया मामले में अगला महत्वपूर्ण कदम है। आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत में साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगा।

