Yuva India: सिक्किम मॉडल से प्रेरणा लेते हुए हरियाणा सरकार ने पंचकूला जिले के पहाड़ी क्षेत्र मोरनी में जैविक (ऑर्गेनिक) खेती को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने का फैसला किया है। अगले तीन वर्षों में मोरनी ब्लॉक के लगभग 1,000 एकड़ क्षेत्र में मिर्च, अदरक और हल्दी जैसी बागवानी फसलों की जैविक खेती की जाएगी।
इस योजना के तहत किसानों को पात्र घटकों पर 75 प्रतिशत तक की सब्सिडी/वित्तीय सहायता दी जाएगी। साथ ही, किसानों को बाजार की अनिश्चितताओं से बचाने और उनकी उपज का सही दाम दिलाने के लिए कंपनियों के साथ ‘बाय-बैक’ (Buy-Back) समझौते किए गए हैं।
MDH के साथ 82 किसानों का समझौता
योजना के पहले चरण में मोरनी क्षेत्र के 17 एकड़ क्षेत्रफल में मिर्च की खेती के लिए प्रसिद्ध मसाला निर्माता कंपनी MDH के साथ करार हुआ है। इसके अंतर्गत मोरनी ब्लॉक के 14 गांवों के 82 किसानों (किसान उत्पादक संगठनों – FPOs के माध्यम से) को जोड़ा गया है।
कीमत की गारंटी: MDH ने किसानों को प्रचलित बाजार दर से 10% अधिक मूल्य देने का आश्वासन दिया है।
अग्रिम भुगतान: कंपनी ने चालू वर्ष के लिए अनुमानित उत्पादन मूल्य का 10% अग्रिम (Advance) किसानों को प्रदान किया है।
कीटनाशक-मुक्त खेती: समझौते के तहत किसानों को किसी भी रासायनिक कीटनाशक का उपयोग करने की अनुमति नहीं होगी। MDH किसानों को तीन उच्च गुणवत्ता वाली किस्मों के बीज और आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध करा रहा है।
सिक्किम मॉडल की तर्ज पर विकास
सिक्किम को 18 जनवरी 2016 को भारत का पहला पूर्ण जैविक राज्य घोषित किया गया था। नाबार्ड (NABARD) ने भी सिक्किम के इस मॉडल का अध्ययन कर रिपोर्ट प्रकाशित की है। मोरनी की भौगोलिक और जलवायु स्थितियां सिक्किम से मिलती-जुलती होने के कारण हरियाणा कृषि एवं किसान कल्याण विभाग इसे राज्य में एक ‘मॉडल फार्मिंग ब्लॉक’ के रूप में विकसित कर रहा है।
चरणबद्ध लक्ष्य (Phase-wise Target)
बागवानी विभाग की चरणबद्ध योजना के अनुसार, मोरनी में जैविक खेती का विस्तार इस प्रकार किया जाएगा:
वर्ष 2026-27: 245 एकड़ क्षेत्र में जैविक खेती का विस्तार किया जाएगा।
वर्ष 2027-28: जैविक खेती के दायरे को बढ़ाकर 500 एकड़ किया जाएगा।
वर्ष 2028-29: इसे पूरे लक्ष्य के साथ 1,000 एकड़ क्षेत्र तक पहुंचाया जाएगा।
जंगली जानवरों से सुरक्षा और बेहतर आय
स्थानीय किसानों (जैसे आद्यों गांव के चमेल सिंह और राजी टिकारी गांव के टिक्का सिंह) के अनुसार, मिर्च की फसल में जंगली जानवरों से होने वाला नुकसान अन्य पारम्परिक फसलों की तुलना में काफी कम होता है। कम लागत और कंपनी द्वारा बाजार मूल्य से अधिक दर सुनिश्चित किए जाने से स्थानीय किसानों में जैविक खेती को लेकर नया उत्साह देखा जा रहा है।

