हरियाणा में ‘वोट चोरी’ मुद्दे को चौपाल तक ले जाएगी कांग्रेस, अगले चुनाव की तैयारी में जुटा संगठन
Yuva Haryana: हरियाणा में कांग्रेस ने चुनावी प्रक्रिया और कथित ‘वोट चोरी’ के मुद्दे को लेकर अपना अभियान तेज करने की तैयारी शुरू कर दी है। दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को आयोजित ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली के बाद पार्टी इस मुद्दे को प्रदेश के गांवों, कस्बों और चौपालों तक ले जाने की योजना बना रही है। कांग्रेस का कहना है कि संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने और लोगों के बीच चुनावी पारदर्शिता का सवाल उठाने के लिए यह अभियान चलाया जाएगा।
पार्टी की रणनीति को आगामी चुनावों की तैयारियों से भी जोड़कर देखा जा रहा है। पिछले चुनाव में सत्ता से बाहर रहने के बाद कांग्रेस अब संगठन को सक्रिय करने और कार्यकर्ताओं को गांव तथा बूथ स्तर तक जोड़ने पर जोर दे रही है।
दिल्ली रैली के बाद गांवों में चलेगा अभियान
कांग्रेस की योजना है कि दिल्ली में हुई रैली के संदेश को हरियाणा के सभी जिलों तक पहुंचाया जाए। इसके लिए पार्टी के पदाधिकारियों, जिला अध्यक्षों, ब्लॉक अध्यक्षों और स्थानीय कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी दी जाएगी। चौपाल कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों से बातचीत की जाएगी और मतदाता सूची, चुनावी प्रक्रिया तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं से जुड़े मुद्दे उठाए जाएंगे।
पार्टी नेतृत्व का मानना है कि केवल बड़ी रैलियां करने से संगठन मजबूत नहीं होगा। इसके लिए गांवों और बूथों तक लगातार संपर्क बनाए रखना जरूरी है। इसी वजह से कांग्रेस अब जमीनी स्तर पर बैठकों और जनसंपर्क कार्यक्रमों की तैयारी कर रही है।
दिल्ली रैली के लिए हरियाणा से जुटाए गए कार्यकर्ता
1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में कांग्रेस और INDIA गठबंधन की ओर से ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली आयोजित की गई। इसमें हरियाणा से बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं और समर्थकों को पहुंचाने के लिए पार्टी ने पहले से तैयारियां की थीं।
हरियाणा कांग्रेस प्रभारी संजय दत्त, प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा सहित वरिष्ठ नेताओं ने अलग-अलग जिलों और ब्लॉक स्तर पर तैयारियों की समीक्षा की थी। पार्टी ने सभी 22 जिलों में कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और परिवहन सहित अन्य व्यवस्थाएं करने की जिम्मेदारी सौंपी थी।
भूपेंद्र हुड्डा और दीपेंद्र हुड्डा ने संभाली जिम्मेदारी
रैली की तैयारियों में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पार्टी नेताओं ने हरियाणा से अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि हरियाणा विधानसभा चुनाव 2024 और मतदाता सूचियों से जुड़े मामलों में अनियमितताओं को लेकर सवाल उठे हैं। पार्टी ने चुनाव आयोग से इन आरोपों पर जवाब देने और निष्पक्ष जांच कराने की मांग भी की है। ये कांग्रेस के राजनीतिक आरोप हैं; इन्हें चुनावी धांधली का प्रमाणित निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।
रैली के दौरान वाहनों को रोकने पर भी हुआ विवाद
दिल्ली रैली में शामिल होने जा रहे कुछ वाहनों को रोकने को लेकर हरियाणा के नूंह क्षेत्र में भी विवाद हुआ। नूंह से कांग्रेस विधायक आफताब अहमद और सोहना विधायक संजय सिंह के बीच इस मुद्दे पर बहस होने की बात सामने आई। पुलिस ने विधायक के काफिले में शामिल कुछ वाहनों को रोककर पूछताछ की थी।
विधायक ने आरोप लगाया कि एसएचओ ने वाहनों को रोकने के मामले में बदसलूकी की। वहीं, पुलिस की ओर से वाहनों की जांच और रोकने की कार्रवाई को लेकर अलग पक्ष सामने आया। इस घटना के बाद राजनीतिक माहौल गर्म हो गया।
भाजपा के कार्यक्रमों के बीच बढ़ी राजनीतिक हलचल
कांग्रेस की दिल्ली रैली के आसपास ही भाजपा ने भी हरियाणा में अपना कार्यक्रम रखा। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने 1 नवंबर को रोहतक में ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान के तहत पदयात्रा की। इसके अलावा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का 5 नवंबर को करनाल में कार्यक्रम निर्धारित था।
इस तरह दोनों प्रमुख दल चुनावी प्रक्रिया और लोकतंत्र से जुड़े मुद्दों पर अपने-अपने अभियान के जरिए कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने में जुटे हैं।
चौपाल और बूथ स्तर पर संगठन मजबूत करने की तैयारी
दिल्ली रैली के बाद कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती इस मुद्दे को लगातार जनता के बीच बनाए रखने की होगी। पार्टी गांवों में चौपाल, जिला स्तरीय बैठकें और बूथ स्तर पर जनसंपर्क कार्यक्रम आयोजित कर सकती है।
कांग्रेस का लक्ष्य मतदाताओं, युवाओं, किसानों और अन्य वर्गों के बीच अपनी बात पहुंचाना तथा संगठन को आगामी चुनावों के लिए तैयार करना है। अब देखना होगा कि दिल्ली की रैली के बाद शुरू होने वाला यह अभियान हरियाणा में पार्टी की जमीनी सक्रियता को कितना बढ़ा पाता है।

