Yuva Haryana : हरियाणा में एक अनोखा मामला सामने आया है। एक नगर निगम ने प्रदेश के इतिहास में अजीबोगरीब रिकॉर्ड बनाया है।
दरअसल, हम बात कर रहे है पंचकुला नगर निगम की। यहां कार्यकाल का केवल डेढ़ महीना ही बचा है, लेकिन सीनियर डिप्टी मेयर (वरिष्ठ उप महापौर) और डिप्टी मेयर (उप महापौर) का चुनाव आज तक नहीं हो सका। चलिए अब जानते हैं कि ऐसा क्यूं हो रहा?
जानकारी के अनुसार पंचकूला नगर निगम में इन दोनों पदों का चुनाव कराने में हो रहे देरी के विषय पर वर्ष 2024 में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की, जिसके जवाब में हरियाणा सरकार द्वारा सितंबर, 2024 तक चुनाव कराने का आश्वासन की बात कही और 24 जुलाई 2024 में हाईकोर्ट ने इस मामले का निपटारा कर दिया।
बड़ी बात ये है कि उपरोक्त समय अवधि तक और न ही उसके बाद निर्धारित की गई पिछले वर्ष नवम्बर माह की संशोधित तारीख तक निगम के दोनों पदों का निर्वाचन संभव हो सका।
नवम्बर में तो निगम की जॉइंट कमिश्नर एवं चुनाव के लिए रिटर्निंग ऑफिसर के अचानक बीमार पड़ने पर निर्वाचन टाल दिया गया, जिस पर विपक्षी कांग्रेस ने सवाल भी उठाये थे।
इस बारे पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट एवं म्युनिसिपल कानून जानकार हेमंत कुमार ने बताया कि दिसम्बर, 2020 में अम्बाला, पंचकूला और सोनीपत तीनों नगर निगमों के एक साथ आम चुनाव करवाए गये थे, जिसमें इन तीनों में मेयर का चुनाव प्रत्यक्ष तौर पर सम्बंधित निगम क्षेत्र के मतदाताओं द्वारा किया गया था।
पंचकूला नगर निगम के कुल 20 वार्डों में भाजपा के 9 और उसकी तत्कालीन सहयोगी जेजेपी के 2 अर्थात हरियाणा में तत्कालीन सत्ताधारी गठबंधन के कुल 11 नगर निगम सदस्य जीते थे जबकि कांग्रेस के 7 और 2 अन्य, निर्दलीय विजयी रहे थे जो दोनों बाद में भाजपा में शामिल हो गए।
5 जनवरी 2021 को पंचकूला नगर निगम के प्रत्यक्ष निर्वाचित मेयर भाजपा के कुलभूषण गोयल को अम्बाला डिवीज़न की तत्कालीन मंडल आयुक्त दीप्ति उमाशंकर द्वारा पद और निष्ठा की शपथ दिलाई गई।
हालांकि, पंचकूला नगर निगम के सीनियर डिप्टी और डिप्टी मेयर का चुनाव आज तक लंबित रहा है।
हरियाणा नगर निगम कानून, 1994 में सीनियर डिप्टी और डिप्टी मेयर का निर्वाचन कराने सम्बन्धी समय सीमा का उल्लेख नहीं है, हालांकि हरियाणा नगर निगम निर्वाचन नियमावली, 1994 में ऐसा नव-निर्वाचित निगम सदन के 60 दिनों के भीतर है।
एडवोकेट हेमंत ने यह भी बताया कि कानून अनुसार राज्य चुनाव आयोग द्वारा जारी निर्वाचन नोटिफिकेशन के अधिकतम छह माह के भीतर उन सभी नगर निकायों में उपाध्यक्ष का चुनाव होना कानूनन आवश्यक है। अगर ऐसा नहीं किया जाता है, तो उपरोक्त छह माह की अवधि समाप्त होने पर सम्बंधित नगर निकाय अर्थात नगर परिषद या नगर पालिका को तत्काल प्रभाव से भंग समझा जाएगा।
हेमंत का कानूनी मत है कि ठीक इसी प्रकार का प्रावधान हरियाणा नगर निगम कानून, 1994 में भी डाला जाना चाहिए क्योंकि हरियाणा नगर निगम निर्वाचन नियमावली, 1994 में नगर निगम गठन के 60 दिनों के भीतर सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव कराने का उल्लेख प्रभावी नहीं रहा है।



