Yuva Haryana: ज़मीन अधिग्रहण और विकास परियोजनाओं को लेकर एक नया और महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश सामने आया है, जिसके तहत ज़मीन मालिकों के हितों और मुआवजे को लेकर कई बड़े प्रावधान किए गए हैं। इस नीति के तहत ज़मीन मालिकों को कई तरह के लाभ और पारदर्शी प्रक्रिया का आश्वासन दिया गया है।
प्रमुख बातें:
50% हिस्सेदारी का प्रावधान: परियोजना के कुल बिक्री योग्य क्षेत्र का 50 प्रतिशत हिस्सा ज़मीन मालिकों को ऑफर किया जाएगा, जबकि शेष 50 प्रतिशत हिस्सा विकास एजेंसी के पास रहेगा।
विकसित प्लॉट का न्यूनतम आकार: आवासीय श्रेणी के लिए न्यूनतम आकार 100 वर्ग मीटर, संस्थागत श्रेणी के लिए 500 वर्ग मीटर और औद्योगिक श्रेणी के लिए 250 वर्ग मीटर तय किया गया है। ज़मीन मालिक अपनी हिस्सेदारी के अनुसार बड़े प्लॉट का विकल्प भी चुन सकते हैं।
व्यापारीक और छोटे भूखंडों के लिए नियम: ज़मीन मालिकों के 50% हिस्से में से कमर्शियल साइट्स भी ऑफर की जाएंगी। 999 वर्ग मीटर से कम भूमि पर कोई कमर्शियल स्पेस नहीं दिया जाएगा:
- 1,000 से 1,999 वर्ग मीटर: 7।56 वर्ग मीटर का एक कियोस्क दिया जाएगा।
- 2,000 से 2,999 वर्ग मीटर: 15।12 वर्ग मीटर के दो कियोस्क दिए जाएंगे।
- 3,000 वर्ग मीटर या उससे अधिक: 22।68 वर्ग मीटर का एक बूथ ऑफर किया जाएगा।
मुआवजा और वित्तीय सहायता:
यदि ऑफर की गई ज़मीन 999 वर्ग मीटर से कम है, तो मालिक को ‘राइट टू फेयर कम्पेसेशन एंड ट्रांसपेरेंसी इन लैंड एक्विजिशन, रिहैबिलिटेशन एंड रिसेटलमेंट एक्ट, 2013’ के प्रावधानों या प्लॉट के रिजर्व प्राइस (जो भी अधिक हो) के अनुसार मौद्रिक मुआवजा दिया जाएगा।
ज़मीन मालिकों को बिक्री विलेख (सेल डीद) पंजीकरण के 15 दिनों के भीतर देय, चार साल के लिए प्रति एकड़ 1 लाख रुपये की वार्षिक अंतरिम वित्तीय सहायता मिलेगी। इसमें देरी होने पर 9 प्रतिशत ब्याज देना होगा।
इसके अलावा, ज़मीन मालिक को प्रति एकड़ 5 लाख रुपये का अतिरिक्त मुआवजा दिया जाएगा। हालांकि, यदि 75 प्रतिशत मालिक सहमत हों, तो एक साल की अवधि बढ़ाई जा सकती है।
विकास की समय-सीमा: विकास एजेंसी को परियोजना की अंतिम स्वीकृति मिलने की तारीख से चार साल के भीतर बुनियादी ढांचा (इंफ्रास्ट्रक्चर) पूरा करना होगा। ऐसा न होने पर ज़मीन वापस मालिकों को सौंप दी जाएगी।
पारदर्शिता और पंजीकरण प्रक्रिया:
परियोजना को सैद्धांतिक मंजूरी मिलने के बाद, विकास एजेंसी को अपनी वेबसाइट पर चिन्हित भूमि, उसके मालिकों और प्रत्येक मालिक के विशिष्ट भूमि योगदान का विवरण प्रकाशित करना होगा।
लैंड रिकॉर्ड में एक टिप्पणी दर्ज की जाएगी और रजिस्ट्रार एजेंसी की मंजूरी के बिना उस ज़मीन पर लेनदेन पंजीकृत नहीं कर सकेंगे।
ज़मीन मालिकों को 30 दिनों के भीतर अपनी सहमति देनी होगी, और अंतिम मंजूरी मिलने के 60 दिनों के भीतर विकास एजेंसी के पक्ष में सेल डीद निष्पादित किए जाएंगे।
एग्रिगेटर्स का कमीशन: हरियाणा प्रॉपर्टी डीलर्स कानून के तहत पंजीकृत एग्रिगेटर्स को सेल डीद निष्पादित होने के बाद एजेंसी द्वारा कृषि कलेक्टर रेट का 0।5 प्रतिशत भुगतान किया जाता है।

