Yuva Haryana: हरियाणा के सिरसा जिले में धान खरीद-बिक्री में एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। किसानों की जमीन पर खेती कपास की थी, लेकिन सरकारी पोर्टल पर फर्जी पंजीकरण कराकर लाखों क्विंटल धान न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर बेच दिया गया। सीएम फ्लाइंग (CM Flying) की करीब एक साल चली गहन जांच के बाद इस बहुचर्चित मामले का पर्दाफाश हुआ है। अब प्रशासन इस मामले में 45 से अधिक चावल मिल (राइस मिल) मालिकों पर प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराने की तैयारी कर रहा है।
क्या है पूरा मामला?
जांच रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 के धान खरीद-बिक्री रिकॉर्ड की जांच के दौरान यह गड़बड़ी पकड़ी गई। सिरसा के गांव मुसाहिब वाला, डिंग, बप्पा, सहराणी और रानियां क्षेत्र के किसानों की जमीन का विवरण ‘मेरी फसल-मेरा ब्योरा’ पोर्टल पर धान की बिक्री के लिए इस्तेमाल किया गया था। जबकि असलियत में इन जमीनों पर किसानों ने कपास (नरमा) की खेती की थी।
बारिश से खराब हुई फसल का उठाया फायदा
जांच अधिकारियों ने बताया कि सितंबर और अक्टूबर के दौरान भारी बारिश के कारण कपास की फसल को नुकसान पहुंचा था, जिस वजह से कई किसानों ने पोर्टल पर पंजीकरण नहीं कराया था। इसी खाली रकबे को भू-माफिया और मिल मालिकों ने निशाना बनाया। किसानों की जानकारी के बिना उनके नाम पर धान का पंजीकरण कर दिया गया।
किसानों का बयान:
“हमने मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर अपनी जमीन का कोई पंजीकरण नहीं कराया था। बाद में पता चला कि हमारे नाम पर पहले ही धान बिक चुका है। पोर्टल पर दर्ज मोबाइल नंबर और बैंक खाते भी हमारे नहीं थे।”
धान कहां से आया? मिल मालिक नहीं दे पाए जवाब
सीएम फ्लाइंग की टीम (जिसका नेतृत्व सब इंस्पेक्टर राजेश कुमार ने किया) ने पटवारी के रिकॉर्ड से लेकर पोर्टल के डेटा का मिलान किया और जमींदारों से सीधी बातचीत की।
जांच में सबसे बड़ा सवाल यह उठा कि जब खेत में कपास बोई गई थी, तो एमएसपी पर बेचा गया धान कहां से आया? जब जांच टीम ने चावल मिल संचालकों से धान के असली स्रोत (Source) के बारे में पूछा, तो वे कोई भी ठोस दस्तावेज या संतोषजनक जवाब पेश नहीं कर सके।
अब क्या होगी कार्रवाई?
45 से अधिक राइस मिलर्स पर शिकंजा: फर्जीवाड़े में शामिल 45 से ज्यादा राइस मिलर्स के खिलाफ प्राथमिक दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
मुख्यालय को सौंपी गई रिपोर्ट: जांच में जुटाए गए फर्जी मोबाइल नंबर, बैंक खातों और पटवारी रिकॉर्ड के सबूतों के आधार पर रिपोर्ट उच्च अधिकारियों/मुख्यालय को भेज दी गई है।
प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई जारी: आगामी दिनों में फर्जीवाड़ा करने वाले बिचौलियों और मिल मालिकों की गिरफ्तारी संभव है।

