Yuva Haryana: हरियाणा गठन के 60 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में 1 नवंबर को कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी ऑडिटोरियम में राज्यस्तरीय हीरक जयंती समारोह का भव्य आयोजन किया गया। इस ऐतिहासिक कार्यक्रम का शुभारंभ देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने किया।
गुरुकुल के छात्रों की प्रशंसा और जेन-जी को संदेश
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रविवार को कुरुक्षेत्र में स्वतंत्रता सेनानी एवं अमर हुतात्मा स्वामी श्रद्धानंद के बलिदान शताब्दी समारोह में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने जेन-जी (Gen-Z) को संदेश देते हुए कहा कि गुरुकुल के विद्यार्थियों में जो अनुशासन, आत्मविश्वास, संस्कार और राष्ट्र के प्रति समर्पण का भाव दिखाई देता है, वह बेहद प्रशंसनीय है। स्वयं को जेन-जी कहने वाले आज के युवाओं को भी गुरुकुल के विद्यार्थियों से प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल आधुनिक शिक्षा ही काफी नहीं है, बल्कि आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और जीवनोपयोगी संस्कारों का समन्वय ही एक सशक्त एवं जिम्मेदार नागरिक का निर्माण कर सकता है। इसके साथ ही उन्होंने गुरुकुल को भव्य स्वरूप देने के लिए गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत के प्रयासों की सराहना की।
भद्रकाली मंदिर में टेका माथा, चांदी के दो अश्व किए अर्पित
कुरुक्षेत्र प्रवास के दौरान राष्ट्रपति मुर्मू ने भद्रकाली शक्तिपीठ मंदिर में प्रवेश करते ही 105 किलो वजन की घंटी बजाई और विधि-विधान से सती पूजन एवं परिक्रमा की। उन्होंने मां भद्रकाली के चरणों में चांदी के अश्व अर्पित किए तथा गर्भ गृह में स्वर्ण और रजत पोशाक में सुसज्जित मां भद्रकाली के दर्शन किए। इस अवसर पर पीठाध्यक्ष सतपाल शर्मा ने राष्ट्रपति को अष्टधातु से निर्मित अष्टभुजा स्वरूप पूजा विग्रह प्रदान किया।
हरियाणा के गौरवशाली इतिहास और विकास की सराहना
प्रदेशवासियों को हीरक जयंती की बधाई देते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के निष्काम कर्मयोग का अमर संदेश विश्वभर में पहुंचाने वाली इस धरती ने आधुनिक युग में भी मानवीय उपलब्धियों के अनेक कीर्तिमान स्थापित किए हैं। इस अवसर पर गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत, राज्यपाल प्रो। असीम कुमार घोष, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी स्वामी श्रद्धानंद को श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम में सांसद नवीन जिंदल और मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी भी विशेष रूप से मौजूद रहे।
रतावली महोत्सव के शेड्यूल में बदलाव
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से 4 दिवसीय ‘रतावली महोत्सव’ पहले 30 अक्टूबर से 2 नवंबर तक प्रस्तावित था। लेकिन राष्ट्रपति के कार्यक्रमों के चलते इसके शेड्यूल में बदलाव कर इसे 1 नवंबर से 4 नवंबर तक करने का फैसला लिया गया। हालांकि प्रशासन ने राष्ट्रपति के हाथों ही महोत्सव का शुभारंभ कराने की तैयारी की थी, लेकिन व्यस्तता के कारण यह संभव नहीं हो सका। बाद में रतावली महोत्सव का शुभारंभ शाम 3:30 बजे कैबिनेट मंत्री कृष्ण बेदी ने किया।
रेवाड़ी की बेटी की प्रेरक कहानी सुनाई
संबोधन के दौरान राष्ट्रपति मुर्मू ने 20वीं सदी में हरियाणा के प्रथम शहीदों में गिने जाने वाले अंबाला के कांशीराम सैन का जिक्र किया, जो फ्रांसिस्को में लाला हरदयाल के साथ मिलकर गदर पार्टी स्थापित करने वालों में से एक थे। उन्होंने रेवाड़ी की एक 12 वर्षीय बेटी का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे उसने 1930 के सविनय अवज्ञा आंदोलन में निडर होकर भाग लिया था। इस बेटी ने प्रतिदिन 2 पैसे जोड़कर बचत से नमक खरीदा था और कानून तोड़ा था। हरियाणा की इसी पावन धरती पर जन्मी सुचेता कृपलानी ने भारत की प्रथम महिला मुख्यमंत्री बनकर इतिहास रचा था।

