सरकार द्वारा हीमोफीलिया और थैलेसीमिया से पीड़ित मरीजों को वित्तीय सहायता (पेंशन) देने की घोषणा और गजट नोटिफिकेशन जारी हुए लंबा समय बीत चुका है, लेकिन धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। प्रदेशभर में इन बीमारियों से ग्रस्त लगभग 2,500 मरीज हैं, जिनमें से करीब 50% पात्र मरीजों के बैंक खातों में आज तक पेंशन की राशि नहीं पहुंच पाई है। प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद मदद न मिलने से मरीज और उनके परिजन सरकारी विभागों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
वेबसाइट से गायब है योजना का जिक्र
हैरानी की बात यह है कि समाज कल्याण विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर लाभ देने वाली योजनाओं में इन दोनों बीमारियों का कोई जिक्र तक नहीं है। इस लापरवाही को लेकर हीमोफीलिया सोसाइटी के अम्बाला प्रधान सोनू और जींद प्रधान आशुतोष ने मुख्यमंत्री हरियाणा को पत्र लिखकर जल्द से जल्द पेंशन लागू कराने की मांग की है।
उनके अनुसार, केवल अम्बाला में हीमोफीलिया के 22, जींद में 14, महेंद्रगढ़ में 10, झज्जर में 8 और रेवाड़ी में 14 मरीज पेंशन न मिलने से परेशान हैं और यह आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है।
क्या है जमीनी हकीकत?
दो बेटियों की नहीं बन रही पेंशन: जींद की कांता ने बताया कि उनकी दो बेटियां (नायरा और सान्वी) हीमोफीलिया से ग्रस्त हैं। कई बार पेंशन के लिए आवेदन किया गया, लेकिन हर बार यह कहकर वापस लौटा दिया जाता है कि “कागज ऊपर भेज रखे हैं”।
हर माह 12 हजार रुपये की दवा का बोझ: अम्बाला सिटी सेशन कोर्ट के पास रहने वाले 43 वर्षीय राजकुमार (हीमोफीलियाबी से ग्रस्त) ऑटो चलाकर अपने परिवार का गुजरबसर करते हैं। उन्होंने बताया कि हर महीने करीब 12 हजार रुपये की दवा का खर्च आता है, लेकिन उन्हें भी अभी तक कोई पेंशन नहीं मिली है।
अधिकारी का पक्ष:
“हीमोफीलिया व थैलेसीमिया के मरीजों के लिए स्वास्थ्य विभाग की तरफ से प्रपोजल भेजा गया था। मुख्यमंत्री द्वारा सेवा विभाग के जरिए इसे लागू करवा दिया गया था। यह सेवा विभाग की तरफ से दी जानी है। इस तरह के मरीजों को फैमिली आईडी (Family ID) में ही बीमारी से जुड़े दस्तावेज अपडेट करवाने होंगे।”— डॉ. चैरी गुप्ता, नोडल अधिकारी, हीमोफीलिया व थैलेसीमिया हरियाणा

