हरियाणा में पेड़ काटने के नियम होंगे सख्त: बिना अनुमति पेड़ काटने पर 10 हजार रुपये जुर्माना, 3 महीने की जेल का भी प्रस्ताव
Yuva Haryana: हरियाणा में अब अपने घर, प्लॉट या निजी जमीन पर लगा पेड़ काटना भी आसान नहीं होगा। राज्य सरकार गैर-वन क्षेत्रों में पेड़ों की कटाई को नियंत्रित करने के लिए नया कानून लाने की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित हरियाणा प्रिजर्वेशन ऑफ ट्रीज एक्ट, 2026 के मसौदे में बिना अनुमति पेड़ काटने पर 10 हजार रुपये प्रति पेड़ जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही पर्यावरणीय मुआवजा भी देना होगा। यदि कोई व्यक्ति निर्धारित जुर्माना और मुआवजा जमा नहीं करता है, तो उसे कम से कम तीन महीने की जेल हो सकती है।
सरकार की ओर से तैयार किए जा रहे इस कानून का उद्देश्य निजी और गैर-वन क्षेत्रों में पेड़ों की अवैध कटाई रोकना और हरियाली को सुरक्षित रखना है। अभी तक राज्य में निजी जमीन पर पेड़ों की कटाई को लेकर नियमों में कई तरह की सीमाएं और कमियां सामने आती रही हैं। इसी वजह से नया कानून बनाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है।
हर पेड़ काटने पर लगाने होंगे 10 नए पौधे
प्रस्तावित कानून में पेड़ों की कटाई की अनुमति मिलने पर भी पौधारोपण की जिम्मेदारी तय की गई है। मसौदे के अनुसार, किसी व्यक्ति या संस्था को एक हरा पेड़ काटने की अनुमति मिलती है, तो उसके बदले 10 नए पेड़ लगाने होंगे। ये पौधे वन विभाग के माध्यम से लगाए जाएंगे और कोशिश होगी कि पौधारोपण उसी जिले में किया जाए।
यदि आवेदक खुद पौधे लगाने की व्यवस्था नहीं करता है, तो उसे विभाग के निर्धारित नियमों के अनुसार प्रतिपूरक पौधारोपण फंड में राशि जमा करानी होगी। इसमें पौधे लगाने के साथ पांच साल तक उनके रखरखाव का खर्च भी शामिल होगा। कुछ निर्धारित परिस्थितियों में पेड़ों की छंटाई के लिए इस अनिवार्य पौधारोपण से छूट देने का प्रावधान भी मसौदे में रखा गया है।
ऑनलाइन पोर्टल से लेनी होगी अनुमति
नए कानून के तहत पेड़ काटने की अनुमति लेने के लिए आवेदन प्रक्रिया को ऑनलाइन किया जाएगा। इसके लिए वन एवं वन्यजीव विभाग के पोर्टल और हरियाणा ई-सेवा प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जा सकेगा। आवेदन मिलने के बाद संबंधित ट्री ऑफिसर को 30 दिनों के भीतर फैसला लेना होगा।
वहीं, यदि कोई हरा पेड़ गिर गया है और उसे हटाने की अनुमति चाहिए, तो ऐसे आवेदन पर तीन दिन के भीतर निर्णय लेने का प्रस्ताव है। यदि अधिकारी निर्धारित समय में फैसला नहीं करता है, तो आवेदन अपने आप अपीलीय अधिकारी के पास भेज दिया जाएगा। अनुमति से असंतुष्ट आवेदक भी 30 दिनों के भीतर अपील कर सकेगा।
अवैध कटाई पर औजार और वाहन भी होंगे जब्त
मसौदे में बिना अनुमति पेड़ काटने या किसी खड़े हरे पेड़ को ऐसा नुकसान पहुंचाने, जिसकी भरपाई संभव न हो, पर 10 हजार रुपये प्रति पेड़ जुर्माने का प्रावधान है। इसके अलावा प्रतिपूरक पौधारोपण और पांच साल के रखरखाव की निर्धारित लागत का 20 गुना पर्यावरणीय मुआवजा भी देना पड़ सकता है।
अवैध कटाई में इस्तेमाल किए गए आरी, औजार, मशीनें और वाहन जब्त किए जा सकेंगे। पेड़ का कटा हुआ हिस्सा भी जब्ती के दायरे में आएगा। यदि जुर्माना और मुआवजा जमा नहीं कराया जाता है, तो कम से कम तीन महीने की जेल का प्रावधान प्रस्तावित है। कुछ अपराधों का निर्धारित राशि जमा कर निपटारा करने की व्यवस्था भी मसौदे में शामिल है।
NGT में सरकार ने दिया हलफनामा
पेड़ों की कटाई को नियंत्रित करने के लिए नया कानून बनाने की प्रक्रिया राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के निर्देशों के बाद तेज हुई है। अधिकरण ने हरियाणा सरकार से गैर-वन क्षेत्रों में पेड़ों की कटाई को लेकर उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी थी। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने NGT में हलफनामा दाखिल कर प्रस्तावित कानून की प्रगति बताई है।
हलफनामे के अनुसार, प्रस्तावित कानून का मसौदा 18 अगस्त को वन मंत्री के सामने रखा गया था। सुझावों के बाद इसमें बदलाव किए गए और प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने 8 सितंबर को संशोधित प्रस्ताव राज्य सरकार को आगे की कार्रवाई के लिए भेज दिया। इस मामले में NGT में 30 अक्टूबर को सुनवाई निर्धारित है।
दरअसल, गुरुग्राम समेत प्रदेश के कई इलाकों में पेड़ों की कटाई और बदले में पौधारोपण नहीं होने को लेकर सवाल उठते रहे हैं। NGT ने भी मौजूदा व्यवस्था में कमियां बताई थीं। नए कानून के लागू होने के बाद निजी जमीन पर पेड़ों की कटाई के लिए नियम अधिक स्पष्ट और सख्त हो सकते हैं। हालांकि, फिलहाल यह कानून मसौदे के स्तर पर है। इसे लागू करने के लिए सरकार की आगे की मंजूरी और निर्धारित विधायी प्रक्रिया पूरी होना बाकी है।

