देश के 10 सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के 6 शामिल, पंचगांव का AQI 391; बहादुरगढ़-जींद भी टॉप-5 में
Yuva Haryana: हरियाणा में वायु प्रदूषण की स्थिति लगातार चिंताजनक बनी हुई है। प्रदेश के छह शहर देश के 10 सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में शामिल हो गए हैं। गुरुग्राम के पंचगांव में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 391 दर्ज किया गया, जो देश में सबसे अधिक रहा। वहीं बहादुरगढ़, जींद और बल्लभगढ़ भी देश के सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल हैं। कई अन्य शहरों में भी हवा की गुणवत्ता खराब और बेहद खराब श्रेणी में पहुंच गई है।
4 नवंबर को दर्ज आंकड़ों के मुताबिक, पंचगांव 391 AQI के साथ पहले स्थान पर रहा। उत्तर प्रदेश का गजरौला 390 के साथ दूसरे और दिल्ली 377 के साथ तीसरे स्थान पर रहा। हरियाणा के बहादुरगढ़ में 365, जींद में 354 और बल्लभगढ़ में 353 AQI दर्ज किया गया। कैथल 326 के साथ आठवें और गुरुग्राम 322 के साथ दसवें स्थान पर रहा।
हरियाणा के इन शहरों में भी प्रदूषण का स्तर ऊंचा
प्रदेश के अन्य शहरों में भी प्रदूषण से राहत नहीं मिली है। मानेसर में AQI 318 दर्ज किया गया। फरीदाबाद में 160 और सिरसा में 194 AQI रहा। वहीं 12 शहरों में हवा खराब श्रेणी में पहुंच गई।
इनमें पानीपत में 295, अंबाला में 294, भिवानी में 280, हिसार में 278, रोहतक में 249, चरखी दादरी में 245, धारूहेड़ा में 243, कुरुक्षेत्र में 239, सोनीपत और यमुनानगर में 237-237, करनाल में 218 और नारनौल में 216 AQI दर्ज किया गया।
दूसरी ओर, पलवल में 75 और पंचकूला में 99 AQI के साथ हवा अपेक्षाकृत साफ रही। इससे स्पष्ट है कि प्रदूषण का असर पूरे प्रदेश में एक जैसा नहीं है, लेकिन कई जिलों में स्थिति गंभीर बनी हुई है।
301 से 400 AQI बेहद खराब श्रेणी में
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के मानकों के अनुसार, 301 से 400 के बीच AQI को ‘बेहद खराब’ श्रेणी में रखा जाता है। इस स्तर की हवा में लंबे समय तक सांस लेने से लोगों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां हो सकती हैं। विशेष रूप से अस्थमा, सांस और हृदय रोग से पीड़ित लोगों को अधिक सावधानी बरतने की जरूरत है।
प्रदूषण के कारण आंखों में जलन, खांसी, गले में परेशानी और सांस लेने में दिक्कत जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों को भी जोखिम अधिक रहता है।
ठंड, पराली और वाहनों की आवाजाही से बढ़ी परेशानी
विशेषज्ञों के अनुसार, मौसम में बदलाव और सुबह-शाम तापमान गिरने से प्रदूषक कण वातावरण में लंबे समय तक बने रह सकते हैं। इसके अलावा पराली जलाने की घटनाएं, वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण कार्यों की धूल और औद्योगिक गतिविधियां भी प्रदूषण बढ़ाने में योगदान देती हैं।
पीजीआई चंडीगढ़ के सामुदायिक चिकित्सा विभाग के प्रोफेसर डॉ. रविंद्र खैवाल के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया है कि तापमान में गिरावट और त्योहारों के दौरान बढ़ी गतिविधियों के कारण प्रदूषण का असर अधिक हो सकता है। पराली जलाने और वाहनों की आवाजाही से भी हवा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।
14 जिलों में GRAP-2 की पाबंदियां लागू
दिल्ली-NCR में प्रदूषण की गंभीर स्थिति को देखते हुए हरियाणा के 14 NCR जिलों में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के दूसरे चरण की पाबंदियां लागू की गई हैं। इसके तहत सड़कों की मशीनों से सफाई, पानी का छिड़काव और एंटी स्मॉग गन चलाने जैसे कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।
पर्यावरण मंत्री राव नरबीर सिंह के अनुसार, संबंधित विभागों को खुले में कूड़ा और निर्माण मलबा डालने या जलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा गया है। वाहनों की प्रदूषण जांच तेज करने, धुआं छोड़ने वाले वाहनों पर सख्ती और निर्माण गतिविधियों की निगरानी के निर्देश भी दिए गए हैं।
लोगों को सावधानी बरतने की सलाह
प्रदूषण का स्तर बढ़ने पर लोगों को सुबह और देर शाम खुले में ज्यादा देर तक व्यायाम करने से बचना चाहिए। सांस लेने में परेशानी या लगातार खांसी होने पर चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। अस्थमा और हृदय रोग से पीड़ित लोगों को अपनी दवाएं साथ रखने और डॉक्टर के निर्देशों का पालन करने की जरूरत है।
फिलहाल हरियाणा के कई शहरों में प्रदूषण नियंत्रण के लिए प्रशासनिक कदम उठाए जा रहे हैं। हालांकि, हवा की गुणवत्ता में सुधार के लिए वाहनों, निर्माण कार्यों, औद्योगिक उत्सर्जन और पराली जलाने सहित प्रदूषण के सभी स्रोतों पर एक साथ नियंत्रण जरूरी होगा।

