पंचकूला की घटना के बाद हरियाणा के स्कूलों में, अब बच्चों के बैग की भी होगी जांच
Yuva Haryana: पंचकूला के सेक्टर-20 स्थित सरकारी स्कूल में छह वर्षीय बच्ची के साथ हुई गंभीर घटना के बाद हरियाणा शिक्षा विभाग ने प्रदेशभर के सरकारी और निजी स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर सख्ती बढ़ा दी है। मौलिक शिक्षा निदेशक ने सभी जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों (DEEO) और खंड शिक्षा अधिकारियों (BEO) को निर्देश जारी कर स्कूलों में सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित कराने को कहा है। नए आदेश के तहत अब रोजाना पहले पीरियड में बच्चों के स्कूल बैग की जांच की जाएगी। इसके साथ ही स्कूल के मुख्य गेट पर पहरा, छुट्टी के समय निगरानी और खाली पीरियड में परिसर की गश्त अनिवार्य होगी।
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि बच्चों की सुरक्षा में किसी भी तरह की लापरवाही मिलने पर संबंधित स्कूल मुखिया की जवाबदेही तय की जाएगी। ये निर्देश सरकारी और निजी दोनों तरह के स्कूलों पर लागू होंगे।
स्कूलों के लिए जारी किए गए पांच प्रमुख निर्देश
मौलिक शिक्षा निदेशक की ओर से जारी आदेश में स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पांच अहम निर्देश दिए गए हैं।
1. पहले पीरियड में बैग की जांच: स्कूल में दिन की पढ़ाई शुरू होने पर पहले पीरियड में कक्षा प्रभारी या संबंधित शिक्षक सभी बच्चों के बैग की जांच करेंगे। यदि किसी विद्यार्थी के बैग में कोई आपत्तिजनक वस्तु मिलती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इसका उद्देश्य ऐसी वस्तुओं को स्कूल परिसर में लाने से रोकना है, जिनसे बच्चों की सुरक्षा को खतरा हो सकता है।
2. मुख्य गेट पर रहेगा पहरा: स्कूल शुरू होने के बाद मुख्य प्रवेश द्वार बंद रखा जाएगा। गेट पर चौकीदार की तैनाती अनिवार्य होगी। यदि किसी स्कूल में चौकीदार उपलब्ध नहीं है तो वहां ग्रुप-डी कर्मचारी की ड्यूटी लगाई जाएगी। इससे अनधिकृत लोगों की आवाजाही पर नजर रखी जा सकेगी।
3. छुट्टी के समय शिक्षकों की जिम्मेदारी: स्कूल की छुट्टी होने पर शिक्षक तभी परिसर से बाहर जा सकेंगे, जब सभी बच्चे अपनी-अपनी कक्षाओं से निकल चुके हों। स्कूल को बंद करने से पहले प्रत्येक कक्षा का निरीक्षण करना भी जरूरी होगा। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि कोई बच्चा किसी कक्षा या कमरे में अकेला न रह जाए।
4. खाली पीरियड में परिसर की निगरानी: जिन पीरियड में शिक्षकों की नियमित कक्षा नहीं होगी, उस दौरान पीटीआई, डीपीई या अन्य शिक्षक स्कूल परिसर में गश्त करेंगे। उन्हें अलग-अलग स्थानों का निरीक्षण करना होगा, ताकि बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके और किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति को समय रहते रोका जा सके।
5. रोजाना लागू होगी हाउस प्रणाली: स्कूलों को बच्चों की सुरक्षा के लिए हाउस प्रणाली प्रतिदिन लागू करनी होगी। इसके जरिए विद्यार्थियों की गतिविधियों और जिम्मेदारियों को व्यवस्थित तरीके से संचालित करने पर जोर दिया गया है।
सेक्टर-20 के स्कूल की घटना के बाद बढ़ी चिंता
पंचकूला के सेक्टर-20 स्थित सरकारी स्कूल में 28 अक्टूबर को छह वर्षीय बच्ची के साथ हुई घटना ने स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। रिपोर्टों के मुताबिक, स्कूल में तीसरी कक्षा के एक छात्र पर बच्ची के साथ मारपीट करने का आरोप है। बच्ची को गंभीर हालत में इलाज के लिए पीजीआई चंडीगढ़ ले जाया गया था। मामले में स्कूल प्रबंधन और कर्मचारियों की भूमिका को लेकर भी जांच शुरू हुई।
इस घटना के बाद शिक्षा विभाग ने स्कूलों में निगरानी और जवाबदेही बढ़ाने का फैसला किया है। विभाग का जोर केवल प्रवेश द्वार की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि कक्षाओं, खाली समय और छुट्टी के दौरान भी बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर है।
स्कूल मुखियाओं की तय होगी जवाबदेही
मौलिक शिक्षा निदेशक ने जिला और खंड स्तर के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे अपने क्षेत्र के सरकारी और निजी स्कूलों में इन आदेशों का पालन सुनिश्चित कराएं। स्कूल मुखियाओं को सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी दी गई है। किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आने पर संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों और स्कूल प्रबंधन के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई हो सकती है।
इन निर्देशों के लागू होने के बाद अब स्कूलों में बच्चों के बैग की नियमित जांच, मुख्य गेट पर निगरानी और कक्षाओं का निरीक्षण रोजमर्रा की व्यवस्था का हिस्सा होगा। इसका उद्देश्य स्कूलों को बच्चों के लिए अधिक सुरक्षित बनाना और भविष्य में ऐसी घटनाओं की आशंका को कम करना है।

