हरियाणा सूचना आयोग में बड़ा बदलाव, अब 100% हाइब्रिड सुनवाई और ऑनलाइन अपील की सुविधा
Yuva Haryana: हरियाणा में सूचना का अधिकार यानी RTI व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, तेज और आम नागरिकों के लिए सुविधाजनक बनाने की तैयारी है। हरियाणा राज्य सूचना आयोग अपनी कार्यप्रणाली में बड़े प्रशासनिक और तकनीकी बदलाव करने जा रहा है। इसके तहत आयोग में 100 प्रतिशत हाइब्रिड सुनवाई, दूसरी अपील और शिकायतों की ई-फाइलिंग, पेपरलेस कामकाज और प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। इसके साथ ही प्रदेश के करीब 25 हजार राज्य लोक सूचना अधिकारियों (SPIOs) और प्रथम अपीलीय प्राधिकारियों (FAAs) को प्रशिक्षण देने की योजना भी बनाई गई है।
मुख्य सूचना आयुक्त टीवीएसएन प्रसाद ने बुधवार को पंचकूला में आयोजित कार्यक्रम के दौरान इन सुधारों की जानकारी दी। यह कार्यक्रम हरियाणा राज्य सूचना आयोग के 21वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित किया गया था। इसमें पंजाब राज्य सूचना आयोग के मुख्य सूचना आयुक्त इंदरपाल सिंह धन्ना और राज्य सूचना आयुक्त हरप्रीत सिंह संधू भी शामिल हुए। पंजाब के प्रतिनिधिमंडल ने हरियाणा आयोकार्यप्रणाली और तकनीकी सुविधाओं का जायजा लिया।
घर बैठे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से हो सकेगी सुनवाई
आयोग की सबसे अहम पहल 100 प्रतिशत हाइब्रिड सुनवाई की व्यवस्था है। इसके लागू होने के बाद RTI से जुड़े मामलों में अपीलकर्ता और संबंधित अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई में शामिल हो सकेंगे। इससे लोगों को हर बार पंचकूला स्थित आयोग के कार्यालय तक पहुंचने की जरूरत नहीं पड़ेगी। खासकर दूर-दराज के जिलों में रहने वाले लोगों का समय और यात्रा खर्च बचेगा।
हालांकि, जिन मामलों में जरूरी होगा, उनमें संबंधित पक्ष व्यक्तिगत रूप से भी सुनवाई में शामिल हो सकेंगे। इस व्यवस्था का उद्देश्य सुनवाई की प्रक्रिया को अधिक सुलभ बनाना और अनावश्यक देरी को कम करना है।
दूसरी अपील और शिकायतें भी ऑनलाइन होंगी
अभी तक RTI आवेदन और पहली अपील ऑनलाइन दाखिल करने की सुविधा उपलब्ध है। आयोग अब दूसरी अपील और शिकायतों को भी अपने वेब पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन दाखिल करने की सुविधा शुरू करने की तैयारी कर रहा है। इससे आवेदकों को दस्तावेजों के साथ कार्यालय के चक्कर लगाने की जरूरत कम होगी।
इसके अलावा, आयोग की ओर से मामलों के पंजीकरण और जांच की प्रक्रिया को व्यवस्थित किया जाएगा। पहले मामलों को संबंधित विभागों के आधार पर अलग-अलग सूचना आयुक्तों को सौंपने की व्यवस्था थी। नई प्रणाली में रजिस्ट्रार स्तर पर मामलों का पंजीकरण, जांच और आवंटन किया जाएगा। इससे अलग-अलग विभागों से जुड़े मामलों को भी अधिक व्यवस्थित तरीके से संबंधित बेंच तक पहुंचाया जा सकेगा।
प्राथमिकता वाले मामलों की जल्द होगी सुनवाई
आयोग सुनवाई की तारीख तय करने की प्रक्रिया को भी अधिक सुविधाजनक बनाने पर काम कर रहा है। प्रस्ताव के अनुसार, प्रत्येक सूचना आयुक्त के दैनिक कार्यक्रम में पांच समय स्लॉट प्राथमिकता वाली सुनवाई के लिए उपलब्ध रखे जाएंगे। आवेदक अपनी सुविधा के अनुसार उपलब्ध स्लॉट चुन सकेंगे।
इसके साथ ही पोर्टल पर ‘लाइव लिंक’ जैसी सुविधा विकसित करने की योजना है। इसके जरिए जरूरतमंद आवेदक प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई की मांग कर सकेंगे और उपलब्ध तारीख व समय का चयन कर सकेंगे। इसका मकसद ऐसे मामलों को जल्दी सुनना है, जिनमें सूचना मिलने में देरी से आवेदक को परेशानी हो रही है।
25 हजार अधिकारियों को मिलेगा प्रशिक्षण
RTI कानून को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने के लिए आयोग प्रदेशभर में करीब 25 हजार SPIOs और FAAs को प्रशिक्षित करने का कार्यक्रम चला रहा है। इसमें लगभग 6,300 सरपंच भी शामिल हैं, जो गांवों में राज्य लोक सूचना अधिकारियों की भूमिका निभाते हैं।
प्रशिक्षण में अधिकारियों को RTI अधिनियम के प्रावधानों, समय पर सूचना उपलब्ध कराने, अपीलों का निपटारा करने और उचित कारणों के साथ आदेश जारी करने की जानकारी दी जाएगी। आयोग का मानना है कि प्रथम अपीलीय प्राधिकारियों की भूमिका मजबूत होने से कई शिकायतों का समाधान विभागीय स्तर पर ही हो सकेगा। इससे आयोग के पास पहुंचने वाली अपीलों और लंबित मामलों का दबाव भी घट सकता है। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में हरियाणा इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन और हैदराबाद के एडमिनिस्ट्रेटिव स्टाफ कॉलेज ऑफ इंडिया का सहयोग लिया जा रहा है।
पेपरलेस बनेगा सूचना आयोग
आयोग अपने रिकॉर्ड को डिजिटल करने की दिशा में भी काम कर रहा है। सभी जरूरी दस्तावेजों को डिजिटल रूप में उपलब्ध कराने से केस रिकॉर्ड तक पहुंच आसान होगी। इसके अलावा, अलग-अलग बेंचों के सामने मामलों की सूची व्यवस्थित तरीके से तैयार करने और फैसलों को अधिक सुलभ बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
पंजाब के मुख्य सूचना आयुक्त इंदरपाल सिंह धन्ना ने हरियाणा आयोग की इन प्रशासनिक और तकनीकी पहलों की सराहना की। उन्होंने विशेष रूप से सेंट्रल रजिस्ट्रेशन यूनिट और मामलों को अलग-अलग बेंचों के सामने व्यवस्थित ढंग से सूचीबद्ध करने की व्यवस्था को उपयोगी बताया।
इन सुधारों का अंतिम उद्देश्य RTI अधिनियम के तहत नागरिकों को समय पर सूचना दिलाना और सरकारी विभागों की जवाबदेही बढ़ाना है। यदि प्रस्तावित सुविधाएं प्रभावी ढंग से लागू होती हैं, तो प्रदेश के लोगों के लिए सूचना मांगने और अपील की प्रक्रिया पहले के मुकाबले आसान हो सकती है।

