हरियाणा में टैक्स दर नहीं, टैक्स बेस बढ़ाने पर जोर: CM सैनी ने 2047 तक 15प्रतिशत राजस्व का लक्ष्य बताया
Yuva Haryana : हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा है कि राज्य की राजस्व व्यवस्था को मजबूत करने के लिए टैक्स की दरें बढ़ाने के बजाय टैक्स बेस का विस्तार, बेहतर अनुपालन, राजस्व हानि पर रोक और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य ईमानदार करदाताओं पर अतिरिक्त बोझ डाले बिना राज्य की वित्तीय क्षमता बढ़ाना है।
मुख्यमंत्री बुधवार को विकसित हरियाणा-2047 के तहत ‘हरियाणा की अपनी कर-राजस्व व्यवस्था’ के विश्लेषण और मजबूती को लेकर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। सम्मेलन का आयोजन स्वर्ण जयंती हरियाणा इंस्टीट्यूट फॉर फिस्कल मैनेजमेंट (SJHIFM) की ओर से किया गया।
2030 तक 10प्रतिशत और 2047 तक 15प्रतिशत राजस्व का लक्ष्य
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि हरियाणा का अपना कर-राजस्व फिलहाल राज्य के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) के 7 प्रतिशत से कम है। सरकार ने इसे 2030 तक 10 प्रतिशत और 2047 तक 15 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह लक्ष्य टैक्स की दरें बढ़ाकर नहीं, बल्कि मौजूदा कर व्यवस्था की दक्षता और कवरेज बढ़ाकर हासिल किया जाएगा। इसके लिए नए करदाताओं को टैक्स नेटवर्क से जोड़ने, अनुपालन बढ़ाने और राजस्व की संभावित हानि को रोकने पर ध्यान दिया जाएगा।
अप्रैल-अगस्त में SGST संग्रह 29प्रतिशत बढ़ा
मुख्यमंत्री ने बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 के पहले पांच महीनों यानी अप्रैल से अगस्त 2026 के दौरान हरियाणा का राज्य वस्तु एवं सेवा कर (SGST) संग्रह 29 प्रतिशत बढ़कर 24,662 करोड़ रुपये हो गया। पिछले वर्ष इसी अवधि में SGST संग्रह 19,174 करोड़ रुपये था।
अगस्त 2026 में भी राज्य के SGST संग्रह में 21 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि राष्ट्रीय औसत वृद्धि 13 प्रतिशत रही।
उन्होंने बताया कि देश के कुल GST करदाताओं में हरियाणा की हिस्सेदारी 4 प्रतिशत से कम है, जबकि देश के कुल GST संग्रह में राज्य का योगदान करीब 7.7 प्रतिशत है।
आर्थिक विकास से बढ़ेगा टैक्स बेस
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा कृषि आधारित अर्थव्यवस्था से आगे बढ़कर उद्योग और सेवा क्षेत्र आधारित अर्थव्यवस्था के रूप में तेजी से विकसित हो रहा है। गुरुग्राम में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर, आईटी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उन्नत सेवाओं का विस्तार हो रहा है।
इसके अलावा गन्नौर में इंडिया इंटरनेशनल हॉर्टिकल्चर मार्केट, आईएमटी खरखौदा में वाहन निर्माण निवेश तथा रेवाड़ी, हिसार और अन्य क्षेत्रों में औद्योगिक एवं लॉजिस्टिक्स परियोजनाएं आर्थिक गतिविधियों को गति दे रही हैं।
मुख्यमंत्री ने पानीपत के टेक्सटाइल उद्योग, अंबाला के वैज्ञानिक उपकरण उद्योग, हिसार के स्टील उद्योग, यमुनानगर के प्लाईवुड उद्योग और रोहतक के नट-बोल्ट एवं ऑटो-कंपोनेंट उद्योग को भी राज्य की आर्थिक ताकत का महत्वपूर्ण आधार बताया।
वन टाइम सेटलमेंट स्कीम की अवधि 30 नवंबर तक बढ़ी
नायब सिंह सैनी ने बताया कि पुराने लंबित कर विवादों के समाधान के लिए ‘हरियाणा एकबारगी व्यवस्थापन स्कीम-2026’ लागू की गई है। इसका उद्देश्य पुराने मामलों का निपटारा करना और अनावश्यक मुकदमेबाजी को कम करना है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 की योजना का लाभ करीब 1.15 लाख व्यापारियों ने उठाया था। व्यापारियों की सुविधा को देखते हुए इस वर्ष की योजना की अवधि बढ़ाकर 30 नवंबर 2026 कर दी गई है।
सरकार ‘पेपरलेस रजिस्ट्रेशन 2.0’ और ‘ऑटो म्यूटेशन सिस्टम’ के जरिए पंजीकरण और इंतकाल की प्रक्रिया को डिजिटल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने पर भी काम कर रही है।
AI और डेटा एनालिटिक्स से आधुनिक होगा टैक्स प्रशासन
मुख्यमंत्री ने कहा कि भविष्य की राजस्व व्यवस्था डेटा आधारित और आधुनिक तकनीक से सक्षम होनी चाहिए। GST, पंजीकरण, परिवहन, बिजली, शहरी विकास और अन्य सरकारी प्रणालियों के आंकड़ों को आपस में जोड़कर आर्थिक गतिविधियों की व्यापक तस्वीर तैयार की जा सकती है।
उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग और डेटा एनालिटिक्स की मदद से राजस्व हानि के जोखिम की पहचान, अनुपालन में सुधार और कर चोरी पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सकता है। साथ ही तकनीक का इस्तेमाल ईमानदार करदाताओं को बेहतर और आसान सेवाएं देने के लिए भी किया जाना चाहिए।
करदाता को केंद्र में रखकर बनेगी कार्ययोजना
मुख्यमंत्री ने सम्मेलन में विशेषज्ञों से अगले एक-दो वर्षों के तत्काल उपायों, मध्यम अवधि के सुधारों, भविष्य की तकनीक एवं डेटा प्रणालियों और संस्थागत बदलावों को लेकर ठोस कार्ययोजना तैयार करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि पूरी व्यवस्था के केंद्र में करदाता होना चाहिए। विभागों के बीच बेहतर तालमेल से नागरिकों का समय बचाने, अनिश्चितता कम करने और सेवाओं को आसान बनाने पर जोर दिया जाएगा।
मुख्य आर्थिक सलाहकार ने हरियाणा की आर्थिक क्षमता को रेखांकित किया
भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. वी. अनंत नागेश्वरन ने हरियाणा की आर्थिक क्षमता और औद्योगिक आधार का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राज्य के पास वर्ष 2047 तक 1.5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की क्षमता है।
उन्होंने विनियमन को सरल बनाने, अनुपालन का बोझ कम करने और छोटे एवं मध्यम उद्योगों को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने संपत्ति कर आधार को मजबूत करने के लिए संपत्तियों के वार्षिक मूल्यांकन, आपस में जुड़े रिकॉर्ड और कर रियायतों की पारदर्शी जानकारी जैसे उपायों का भी उल्लेख किया।
सम्मेलन में कई विशेषज्ञ हुए शामिल
सम्मेलन में भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. वी. अनंत नागेश्वरन, वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अरुण गुप्ता, आबकारी एवं कराधान विभाग की आयुक्त एवं सचिव आशिमा बराड़, एसजेएचआईएफएम के महानिदेशक डॉ. राज नेहरू और सलाहकार एनके बिश्नोई सहित नीति-निर्माता, कर प्रशासक, अर्थशास्त्री, शिक्षाविद और तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हुए।
मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव एवं वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अरुण गुप्ता ने कहा कि राज्य के संसाधनों को मजबूत और विस्तारित करना विकसित भारत-विकसित हरियाणा के लक्ष्य के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सम्मेलन से मिले विशेषज्ञ सुझावों को नीतिगत स्तर पर आगे बढ़ाकर राज्य की राजस्व व्यवस्था को और मजबूत करने के प्रयास किए जाएंगे।

