हरियाणा में अक्टूबर में साढ़े 3 गुना ज्यादा बारिश, गेहूं-सरसों की बिजाई में होगी देरी; धान की फसल को नुकसान
Yuva Haryana: हरियाणा में अक्टूबर के दौरान हुई बेमौसम बारिश ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। चक्रवात अर्नब के प्रभाव और मौसम में आए बदलाव के कारण प्रदेश के कई जिलों में बारिश और तेज हवाओं का दौर देखने को मिला। इससे मंडियों में खुले में रखा धान भीग गया, जबकि खेतों में खड़ी बासमती धान की फसल जमीन पर गिर गई। दूसरी ओर, कई किसानों की ओर से बोई जा चुकी सरसों की फसल को भी नुकसान पहुंचा है। अब इसका असर गेहूं और सरसों की आगामी बिजाई पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, 1 से 30 अक्टूबर के बीच हरियाणा में कुल 33.6 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि इस अवधि का सामान्य औसत 9.4 मिलीमीटर है। इस तरह प्रदेश में सामान्य से करीब 258 प्रतिशत अधिक बारिश हुई। रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर में इतनी बारिश पिछले 26 वर्षों में तीसरी बार दर्ज की गई है। इससे पहले वर्ष 2004 में 58.4 मिलीमीटर और 2022 में 35.9 मिलीमीटर बारिश हुई थी।
मंडियों में भीगा धान, किसानों की बढ़ी परेशानी
बारिश का सबसे ज्यादा असर धान की सरकारी खरीद पर दिखाई दे रहा है। प्रदेश की कई अनाज मंडियों में खरीदा जा चुका और खरीद के इंतजार में रखा धान खुले आसमान के नीचे पड़ा है। बारिश के कारण धान की बोरियां भीगने से उसकी गुणवत्ता प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है।
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, 29 अक्टूबर तक हरियाणा की मंडियों में करीब 42.2 लाख मीट्रिक टन धान पहुंच चुका था। इसमें से लगभग 37.5 लाख मीट्रिक टन की खरीद हुई थी, जबकि करीब 29.2 लाख मीट्रिक टन धान का ही उठान हो पाया था। इस कारण बड़ी मात्रा में धान मंडियों में पड़ा हुआ था। <Cite refs={[“turn662541search2″,”turn662541search8”]}/>
किसानों और आढ़तियों को चिंता है कि बारिश से धान में नमी बढ़ने और उसकी चमक कम होने से सरकारी खरीद में परेशानी आ सकती है। निर्धारित नमी सीमा से अधिक होने पर फसल की खरीद प्रभावित हो सकती है। ऐसे में किसानों को धान सुखाने के लिए अतिरिक्त समय और मेहनत करनी पड़ रही है।
खेतों में खड़ी बासमती धान की फसल गिरी
बारिश के साथ चली तेज हवाओं ने खेतों में पककर तैयार खड़ी बासमती धान की फसल को भी नुकसान पहुंचाया है। सोनीपत के गोहाना क्षेत्र में कई किसानों की फसल जमीन पर बिछ गई। किसानों के मुताबिक, फसल गिरने से दाने की गुणवत्ता और पैदावार प्रभावित होने की आशंका है।
कृषि विभाग ने किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत नुकसान की सूचना दर्ज कराने की सलाह दी है। जिन किसानों ने फसल का बीमा कराया हुआ है, वे टोल फ्री नंबर 14447 पर नुकसान की जानकारी दे सकते हैं। इसके बाद नियमानुसार नुकसान का आकलन किया जा सकेगा। <Cite refs={[“turn662541search3”]}/>
सरसों की दोबारा बिजाई करनी पड़ सकती है
अक्टूबर में हुई बारिश का असर सरसों की फसल पर भी पड़ा है। प्रदेश के कई इलाकों में किसान सरसों की बिजाई कर चुके हैं। लगातार बारिश से खेतों में पानी भरने के कारण शुरुआती अवस्था में लगी फसल खराब होने की आशंका है। कुछ किसानों को दोबारा बिजाई करनी पड़ सकती है।
रेवाड़ी जिले में भी किसानों को नुकसान की खबरें सामने आई हैं। यहां करीब 80 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सरसों की खेती होती है। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, जिन किसानों ने करीब 15 से 20 दिन पहले सरसों की बिजाई की थी, उनकी फसल को खेतों में पानी भरने से नुकसान हो सकता है। <Cite refs={[“turn662541search0”]}/>
गेहूं की बिजाई में हो सकती है देरी
बारिश के कारण खेतों में नमी और जलभराव की स्थिति बनने से गेहूं की बिजाई का काम भी प्रभावित हो सकता है। धान की कटाई और मंडियों में फसल के उठान में देरी होने से किसानों के पास अगली फसल की तैयारी के लिए कम समय बचेगा। ऐसे में गेहूं की बिजाई निर्धारित समय से आगे खिसक सकती है।
हालांकि, कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि खेतों से अतिरिक्त पानी निकलने और मौसम साफ होने के बाद मिट्टी में मौजूद नमी गेहूं की बिजाई के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। किसानों को सलाह दी जा रही है कि खेतों में पानी जमा न रहने दें और मौसम अनुकूल होने पर ही बिजाई करें।
किसानों को फसल बचाने की सलाह
बारिश और तेज हवाओं के बाद कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को कटी हुई फसल और मंडियों में रखे अनाज को तिरपाल से ढकने की सलाह दी है। खेतों में पानी जमा होने पर उसकी निकासी की व्यवस्था करने और फसल में नुकसान दिखाई देने पर संबंधित विभाग को सूचना देने को कहा गया है।
कुल मिलाकर अक्टूबर की असामान्य बारिश ने हरियाणा के किसानों के सामने दोहरी चुनौती खड़ी कर दी है। एक तरफ खरीफ की फसल को सुरक्षित रखने और बेचने की परेशानी है, तो दूसरी ओर रबी सीजन की बिजाई का समय भी प्रभावित हो रहा है। आने वाले दिनों में मौसम साफ रहने और मंडियों से धान का जल्द उठान होने पर ही किसानों को कुछ राहत मिल सकती है।

