हरियाणा के हर गांव को कूड़ा मुक्त बनाने की तैयारी, 142 ब्लॉकों में लगेंगी सेग्रीगेशन मशीनें
Yuva Haryana: हरियाणा सरकार ने गांवों को साफ-सुथरा बनाने और कचरे का बेहतर प्रबंधन करने के लिए नई योजना पर काम शुरू किया है। स्वच्छ भारत मिशन हरियाणा ग्रामीण के तहत प्रदेश के सभी 142 ब्लॉकों में कूड़ा अलग करने वाली सेग्रीगेशन मशीनें लगाई जाएंगी। इन मशीनों की मदद से गांवों से निकलने वाले कचरे को अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर उसका वैज्ञानिक तरीके से निपटान किया जाएगा। इसके साथ ही कचरे से खाद तैयार करने और जरूरतमंद किसानों को उपलब्ध कराने की योजना भी बनाई जा रही है।
सरकार का लक्ष्य है कि शहरों की तरह गांवों में भी कचरे के ढेर खत्म हों और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता व्यवस्था मजबूत हो। इस योजना से कचरे को समस्या के बजाय उपयोगी संसाधन में बदलने पर जोर दिया जाएगा।
142 ब्लॉकों में लगेंगी सेग्रीगेशन मशीनें
हरियाणा सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में कचरा प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए प्रदेश के सभी 142 ब्लॉकों में सेग्रीगेशन मशीनें स्थापित करने की योजना बनाई है। इन मशीनों के माध्यम से गांवों से एकत्रित कचरे को अलग-अलग किया जाएगा, जिससे उसके निपटान और दोबारा उपयोग की प्रक्रिया आसान हो सकेगी।
अभी कई गांवों में कचरा एकत्रित तो किया जाता है, लेकिन उसके उचित निपटान की व्यवस्था प्रभावी नहीं है। ऐसे में कचरा खुले स्थानों पर जमा होने से गंदगी और पर्यावरण संबंधी समस्याएं पैदा होती हैं। नई व्यवस्था से कचरे को व्यवस्थित तरीके से छांटने और उसके उपयोग की संभावनाएं बढ़ेंगी।
कचरे से बनेगी खाद, किसानों को मिलेगा फायदा
योजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा कचरे से खाद तैयार करना है। गांवों से निकलने वाले जैविक कचरे, जैसे सब्जियों और फलों के छिलके, बचा हुआ भोजन तथा अन्य सड़ने योग्य सामग्री से खाद बनाई जा सकती है। तैयार खाद को जरूरतमंद किसानों तक पहुंचाने की योजना है।
इससे जैविक कचरे का उपयोग बढ़ेगा और उसे खुले में फेंकने की जरूरत कम होगी। किसानों को खाद का विकल्प मिलने से कृषि में उपयोगी संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल भी संभव होगा। हालांकि, खाद की उपलब्धता, वितरण और कीमत से संबंधित विस्तृत नियमों की आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी।
7 हजार से ज्यादा गांवों में व्यवस्था सुधारने पर जोर
प्रदेश के करीब सात हजार गांवों में स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत कचरा प्रबंधन को बेहतर बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। योजना में गांवों से कचरा एकत्र करने, उसे ब्लॉक स्तर पर छांटने और संबंधित सुविधाओं तक पहुंचाने की व्यवस्था पर जोर है।
सरकार का प्रयास है कि प्रत्येक गांव में सफाई व्यवस्था केवल कचरा उठाने तक सीमित न रहे, बल्कि उसके अंतिम निपटान की भी उचित व्यवस्था हो। इसके लिए गांवों और ब्लॉक स्तर पर जरूरी संसाधन विकसित किए जाने की योजना है।
विश्वविद्यालयों में भी लगेंगे बायोगैस प्लांट
हरियाणा में कचरे के उपयोग को बढ़ाने के लिए विश्वविद्यालयों में बायोगैस प्लांट लगाने की योजना भी बनाई जा रही है। प्रदेश में 60 से अधिक विश्वविद्यालय हैं, जहां बड़ी संख्या में विद्यार्थी पढ़ते हैं और रोजाना भोजनालयों, छात्रावासों तथा अन्य स्थानों से जैविक कचरा निकलता है।
रोहतक स्थित महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (MDU) में बायोगैस प्लांट शुरू किए जाने का उल्लेख रिपोर्ट में किया गया है। इस तरह के प्लांट का उद्देश्य जैविक कचरे से बायोगैस बनाना है, जिसका उपयोग खाना पकाने जैसे कार्यों में किया जा सकता है। इससे कचरे का उपयोगी संसाधन के रूप में इस्तेमाल बढ़ेगा और पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
संबंधित टीमें विश्वविद्यालयों में जाकर बायोगैस प्लांट और कचरा प्रबंधन की व्यवस्था का निरीक्षण भी कर रही हैं। नरवाना के उझाना ब्लॉक में सेग्रीगेशन प्लांट का निरीक्षण किए जाने की जानकारी भी दी गई है।
स्वच्छ और स्वस्थ हरियाणा बनाने का लक्ष्य
स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के दूसरे चरण में गांवों को खुले में शौच से मुक्त स्थिति बनाए रखने के साथ ठोस और तरल कचरे के प्रबंधन तथा साफ-सफाई पर ध्यान दिया जाता है। केंद्र सरकार की योजना में भी गांवों में कचरा प्रबंधन की व्यवस्था मजबूत करने और लोगों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर है।
हरियाणा की प्रस्तावित योजना इसी दिशा में एक कदम है। यदि मशीनों की स्थापना, कचरा संग्रहण और खाद वितरण की व्यवस्था प्रभावी तरीके से लागू होती है, तो ग्रामीण क्षेत्रों में सफाई व्यवस्था बेहतर हो सकती है। इससे गांवों में कचरे के ढेर कम करने, पर्यावरण संरक्षण और जैविक कचरे का उपयोग बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

