Yuva Haryana : हरियाणा सरकार की ओर से प्रदेश के सभी शहरी निकायों में 1,646 वार्ड समितियों के गठन की घोषणा के बीच इनके कानूनी आधार को लेकर सवाल उठाए गए हैं। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट और म्यूनिसिपल कानून के जानकार हेमंत कुमार ने राज्य के शहरी स्थानीय निकाय विभाग के अधिकारियों को नोटिस भेजकर वार्ड समितियों के गठन पर आपत्ति जताई है।
वहीं मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के अनुसार, इन वार्ड समितियों का उद्देश्य आमजन की सुविधा बढ़ाना और शिकायतों का समयबद्ध समाधान करना है।
1,646 वार्ड समितियों के जरिए शिकायतों का समाधान
सरकार के अनुसार शहरी निकायों में गठित वार्ड समितियां स्वच्छता, कचरा संग्रहण और स्थानीय समस्याओं के समाधान में भूमिका निभाएंगी। कचरा उठाने वाले वाहनों की निगरानी के लिए जीपीएस आधारित व्यवस्था भी की जा रही है। प्रदेश के 87 में से 83 शहरी स्थानीय निकायों में कचरा उठाने वाले वाहनों में 4जी और 5जी नेटवर्क वाली जीपीएस प्रणाली लगाई जा रही है।
स्थानीय निकायों को वार्ड समितियों के गठन की प्रक्रिया जल्द पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार की योजना में ठोस कचरा प्रबंधन, मार्ग निर्धारण, मशीनरी की उपलब्धता, पोर्टल के माध्यम से भुगतान, स्वच्छता पखवाड़े और अधिक कचरा पैदा करने वालों की पहचान व पंजीकरण जैसे मुद्दों की भी समीक्षा शामिल है।
एडवोकेट ने उठाया वार्ड समितियों के कानूनी आधार पर सवाल
एडवोकेट हेमंत कुमार ने अपने नोटिस में दावा किया है कि प्रदेश के सभी 87 शहरी निकायों में वार्ड समितियों के गठन के लिए हरियाणा म्यूनिसिपल सिटिजन्स पार्टिसिपेशन एक्ट, 2008 को आधार बनाया गया है। उनका तर्क है कि इस कानून की धारा 2(जी) में म्यूनिसिपलिटी की परिभाषा हरियाणा म्यूनिसिपल एक्ट, 1973 के तहत गठित संस्थाओं से जुड़ी है। कानून के उपलब्ध आधिकारिक पाठ में भी धारा 2(जी) में म्यूनिसिपलिटी को हरियाणा म्यूनिसिपल एक्ट, 1973 के तहत गठित संस्था बताया गया है।
उनका कहना है कि प्रदेश के 11 नगर निगम हरियाणा म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन एक्ट, 1994 के तहत गठित हैं। इसलिए 2008 के कानून को नगर निगमों पर लागू करने के आधार पर उन्होंने सवाल उठाया है।
नगर निगमों में वार्ड समितियों के गठन पर भी आपत्ति
हरियाणा म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन एक्ट, 1994 की धारा 10 में वार्ड समितियों के गठन का प्रावधान मौजूद है। आधिकारिक कानून के अनुसार वार्ड समितियों का गठन सरकार द्वारा किया जाना है और इनके गठन व कार्यों का तरीका निर्धारित किया जाना है।
हेमंत कुमार का दावा है कि इस प्रावधान के बावजूद यदि नगर निगम सदनों द्वारा स्वयं वार्ड समितियों का गठन किया गया है, तो इसके अधिकार और वैधानिक आधार पर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने इसे अपने नोटिस में अलग कानूनी आधार पर चुनौती दी है।
अनुच्छेद 243(S) का भी दिया हवाला
नगर परिषदों और नगरपालिका समितियों के संबंध में एडवोकेट ने संविधान के अनुच्छेद 243(S) का हवाला दिया है। संविधान के अनुसार तीन लाख या उससे अधिक आबादी वाली नगरपालिका के क्षेत्र में वार्ड समितियों का गठन किया जाना है। साथ ही, राज्य विधानमंडल को वार्ड समितियों की संरचना और सदस्यों के चयन से संबंधित प्रावधान बनाने का अधिकार है।
नोटिस में हेमंत कुमार ने दावा किया है कि हरियाणा की नगर परिषदों और नगरपालिका समितियों की आबादी के आधार पर सभी संस्थाओं में वार्ड समितियों का गठन संविधान के अनुरूप नहीं माना जा सकता। हालांकि, यह उनकी ओर से उठाई गई कानूनी आपत्ति है; वार्ड समितियों की वैधता पर अंतिम निर्णय सक्षम न्यायालय या संबंधित कानूनी प्राधिकरण द्वारा ही किया जा सकता है।
कानून में संशोधन से समाधान का सुझाव
हेमंत कुमार ने कहा है कि यदि राज्य सरकार वार्ड समितियों की व्यवस्था को नगर निगमों तक स्पष्ट रूप से लागू करना चाहती है, तो संबंधित कानूनों में संशोधन किया जा सकता है। उनके अनुसार 2008 के कानून की धारा 2(जी) में नगर निगमों को स्पष्ट रूप से शामिल करने और 1994 के नगर निगम कानून की धारा 10 में आवश्यक बदलाव करने से नगर निगमों से संबंधित कानूनी स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
उनका यह भी दावा है कि संविधान के अनुच्छेद 243(S) की तीन लाख की आबादी वाली शर्त के कारण नगर परिषदों और नगरपालिका समितियों के संबंध में अलग संवैधानिक प्रश्न बना रहता है।
महत्वपूर्ण बात
सरकार का पक्ष: 1,646 वार्ड समितियां नागरिक शिकायतों, स्वच्छता और कचरा प्रबंधन को बेहतर बनाने के उद्देश्य से गठित की गई हैं।
आपत्ति का पक्ष: एडवोकेट हेमंत कुमार ने इनके कानूनी आधार और अलग-अलग शहरी निकायों में गठन की वैधानिकता पर सवाल उठाए हैं।
कानूनी स्थिति: उपलब्ध कानूनों में वार्ड समितियों से संबंधित प्रावधान मौजूद हैं, लेकिन नोटिस में उठाई गई आपत्तियों का अंतिम कानूनी प्रभाव संबंधित प्राधिकरण या न्यायालय के निर्णय पर निर्भर करेगा।

