हरियाणा के 9 शहरों में हवा खराब, कैथल का AQI 310; दिल्ली-NCR में GRAP-2 लागू
Yuva Haryana: नवंबर की शुरुआत के साथ ही हरियाणा के कई शहरों में वायु प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ने लगा है। सुबह और शाम के समय हल्की ठंड, धुंध और स्मॉग के बीच लोगों को सांस लेने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के 2 नवंबर के शाम 4 बजे तक के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के नौ शहरों में हवा की गुणवत्ता खराब से बेहद खराब श्रेणी में दर्ज की गई। कैथल 310 AQI के साथ प्रदेश का सबसे प्रदूषित शहर रहा। वहीं, दिल्ली में प्रदूषण का स्तर 324 तक पहुंचने के बाद राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के दूसरे चरण की पाबंदियां लागू कर दी गई हैं।
कैथल सबसे प्रदूषित, इन शहरों में भी बिगड़ी हवा
2 नवंबर की शाम तक उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, हरियाणा के कई शहरों में AQI 200 से ऊपर दर्ज किया गया। शहरों की स्थिति इस प्रकार रही:
- कैथल – 310
- धारूहेड़ा – 298
- अंबाला – 285
- बल्लभगढ़ – 278
- कुरुक्षेत्र – 258
- गुरुग्राम – 246
- पंचगांव – 214
- मानेसर – 211
- यमुनानगर – 208
इनमें कैथल का AQI 301 से 400 के बीच होने के कारण बेहद खराब श्रेणी में रहा, जबकि बाकी आठ शहरों में हवा खराब श्रेणी में दर्ज की गई। इसके अलावा हिसार का AQI 184, रोहतक का 174 और सोनीपत का 161 रहा। वहीं, पानीपत में 84 और करनाल में 47 AQI दर्ज किया गया, जहां स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर रही।
दिल्ली में AQI 324 पहुंचने पर GRAP-2 की पाबंदियां
दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक 324 तक पहुंचने के बाद वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने NCR में GRAP के दूसरे चरण को लागू करने का फैसला लिया। इसके तहत प्रदूषण कम करने के लिए प्रशासनिक और स्थानीय निकायों को अतिरिक्त कदम उठाने होंगे।
GRAP के तहत सड़कों की मैकेनिकल सफाई, पानी का छिड़काव, निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण और कचरा खुले में जलाने पर रोक जैसे उपायों पर जोर दिया जाता है। दूसरे चरण में सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने, निजी वाहनों का इस्तेमाल कम करने के लिए पार्किंग शुल्क बढ़ाने और डीजल जनरेटर के उपयोग पर सख्ती जैसे कदम भी शामिल हैं। हालांकि, अलग-अलग पाबंदियां संबंधित आदेश और क्षेत्र के अनुसार लागू होती हैं।
वाहनों, निर्माण और कचरा जलाने पर निगरानी
प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन की ओर से वाहनों से निकलने वाले धुएं, निर्माण स्थलों की धूल और खुले में कचरा जलाने की घटनाओं पर निगरानी बढ़ाई जा रही है। दिल्ली में दूसरे राज्यों के कुछ वाहनों के प्रवेश पर भी निर्धारित उत्सर्जन मानकों के आधार पर रोक लागू है। निर्माण स्थलों पर धूल उड़ने से रोकने, मलबे का सही तरीके से निस्तारण करने और सड़कों की सफाई के निर्देश दिए गए हैं।
इसके साथ ही होटल, रेस्टोरेंट और ढाबों में कोयले तथा लकड़ी जैसे ईंधनों के इस्तेमाल पर रोक से जुड़े निर्देशों का पालन कराने पर भी जोर दिया जा रहा है। डीजल जनरेटर के उपयोग को नियंत्रित करने के लिए भी निर्धारित नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
पराली जलाने के मामले भी चिंता का विषय
हरियाणा में धान की कटाई के बाद पराली जलाने की घटनाएं भी प्रदूषण बढ़ने की एक वजह बनी हुई हैं। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार इस सीजन में 2 नवंबर तक प्रदेश में पराली जलाने के कुल 44 मामले सामने आए थे, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में 122 मामले दर्ज किए गए थे। प्रशासन और कृषि विभाग की टीमें खेतों में निगरानी कर रही हैं तथा किसानों को फसल अवशेष नहीं जलाने के लिए जागरूक किया जा रहा है।
बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सावधानी की जरूरत
खराब और बेहद खराब हवा का असर बच्चों, बुजुर्गों तथा अस्थमा और हृदय रोग से जूझ रहे लोगों पर अधिक पड़ सकता है। ऐसे लोगों को प्रदूषण अधिक रहने के दौरान लंबे समय तक खुले में रहने और भारी व्यायाम करने से बचना चाहिए। सांस लेने में परेशानी, खांसी या आंखों में जलन होने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
फिलहाल मौसम में बदलाव और हवा की कम गति के बीच प्रदूषण से राहत मिलने की संभावना मौसम की परिस्थितियों पर निर्भर करेगी। ऐसे में आने वाले दिनों में हरियाणा के शहरों का AQI और प्रशासन की कार्रवाई महत्वपूर्ण रहेगी।

