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हरियाणा न्यूज़

हरियाणा में बिजली लाइन लॉस 10.81% पर पहुंचा, 7,883 करोड़ रुपये बकाया

Bhawana Vats
Last updated: October 26, 2026 11:56 am
Bhawana Vats - Editor
Published: October 26, 2026
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21.90 लाख उपभोक्ताओं पर 7,883 करोड़ रुपये बकाया, उद्योगों पर सबसे ज्यादा 1,178 करोड़ का बिजली बिल लंबित

Contents
तीन साल बाद फिर बढ़ा बिजली का लाइन लॉसउत्तर और दक्षिण हरियाणा में कितने प्रतिशत लॉस?21.90 लाख बकायेदारों पर 7,883 करोड़ रुपये लंबितलाइन लॉस बढ़ने से आम उपभोक्ताओं पर क्या असर पड़ता है?बिजली निगमों के सामने सुधार की चुनौती

Yuva Haryana: हरियाणा में बिजली वितरण कंपनियों के सामने लाइन लॉस और बकाया बिलों की वसूली बड़ी चुनौती बनती जा रही है।  वित्त वर्ष 2026-27 में जून तक प्रदेश का कुल बिजली लाइन लॉस बढ़कर 10.81 प्रतिशत हो गया है। पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में यह 7.79 प्रतिशत था। यानी एक साल के भीतर लाइन लॉस में 3.02 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

प्रदेश में 21.90 लाख बिजली उपभोक्ताओं पर कुल 7,883 करोड़ रुपये का बकाया है। इनमें से लगभग 15 लाख बकायेदारों के बिजली कनेक्शन अभी भी चालू हैं। इस स्थिति ने बिजली निगमों की राजस्व वसूली और वित्तीय प्रबंधन को लेकर सवाल खड़े किए हैं।

तीन साल बाद फिर बढ़ा बिजली का लाइन लॉस

बिजली वितरण में लाइन लॉस का मतलब है कि बिजली उत्पादन केंद्रों से भेजी गई पूरी बिजली का बिल योग्य खपत के रूप में हिसाब नहीं हो पाता। इसमें तकनीकी कारणों से होने वाली बिजली की हानि के साथ बिजली चोरी, मीटर संबंधी गड़बड़ियों और बिलिंग या वसूली में कमियों का असर भी शामिल हो सकता है। हालांकि, तकनीकी लाइन लॉस और कुल एग्रीगेट टेक्निकल एंड कमर्शियल (AT&C) लॉस अलग-अलग माप हैं।

हरियाणा में कुल लाइन लॉस वित्त वर्ष 2022-23 में 12.32 प्रतिशत, 2023-24 में 10.48 प्रतिशत और 2024-25 में 9.48 प्रतिशत रहा था। वर्ष 2025-26 में यह घटकर 7.79 प्रतिशत पर आ गया, लेकिन 2026-27 में जून तक फिर बढ़कर 10.81 प्रतिशत हो गया।

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इस बढ़ोतरी से बिजली वितरण कंपनियों के लिए उपलब्ध बिजली का पूरा राजस्व हासिल करना मुश्किल हो सकता है। बिजली निगमों को नेटवर्क में सुधार, मीटरिंग, बिलिंग और बकाया वसूली पर ध्यान देने की जरूरत होगी।

उत्तर और दक्षिण हरियाणा में कितने प्रतिशत लॉस?

उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम (UHBVN) में लाइन लॉस 8.34 प्रतिशत दर्ज किया गया। वहीं, दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) में यह 13.29 प्रतिशत तक पहुंच गया।

दोनों निगमों के आंकड़ों में अंतर बताता है कि बिजली वितरण व्यवस्था की चुनौतियां अलग-अलग क्षेत्रों में अलग हो सकती हैं। दक्षिण हरियाणा में लाइन लॉस का अधिक होना बिजली निगम के लिए विशेष चिंता का विषय है। इसे कम करने के लिए बिजली लाइनों, ट्रांसफॉर्मरों, मीटरों और बिलिंग व्यवस्था की नियमित जांच महत्वपूर्ण होगी।

हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (HERC) भी बिजली वितरण कंपनियों को तकनीकी और वाणिज्यिक नुकसान कम करने तथा बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता सुधारने के निर्देश देता रहा है। आयोग ने वित्त वर्ष 2026-27 की राजस्व संबंधी सुनवाई के दौरान भी बिजली वितरण कंपनियों को नुकसान घटाने पर जोर दिया था।

21.90 लाख बकायेदारों पर 7,883 करोड़ रुपये लंबित

बिजली बिलों का बकाया भी प्रदेश के बिजली निगमों के लिए बड़ी समस्या बना हुआ है।  21.90 लाख बकायेदार उपभोक्ताओं पर कुल 7,883 करोड़ रुपये बकाया हैं।

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इनमें से करीब 6.40 लाख उपभोक्ताओं के कनेक्शन काटे जा चुके हैं, जबकि लगभग 15 लाख बकायेदारों को अभी भी बिजली की सप्लाई मिल रही है। इससे बिजली निगमों के सामने बकाया राशि वसूलने और नियमित बिल भुगतान सुनिश्चित करने की चुनौती बनी हुई है।

औद्योगिक उपभोक्ताओं पर भी करीब 1,178 करोड़ रुपये का बकाया है। उद्योगों से समय पर भुगतान नहीं मिलने पर बिजली वितरण कंपनियों की नकदी और वित्तीय स्थिति पर दबाव पड़ सकता है।

लाइन लॉस बढ़ने से आम उपभोक्ताओं पर क्या असर पड़ता है?

लाइन लॉस बढ़ने से बिजली वितरण कंपनियों की लागत और राजस्व के बीच अंतर बढ़ सकता है। बिजली खरीदने, नेटवर्क के रखरखाव और वितरण पर खर्च होने के बावजूद यदि पूरी बिजली का बिल नहीं बनता या भुगतान नहीं मिलता, तो निगमों की वित्तीय स्थिति प्रभावित होती है।

इसका असर सीधे बिजली दरों पर पड़ेगा, ऐसा जरूरी नहीं है। बिजली की दरें तय करने में नियामक आयोग की मंजूरी, बिजली खरीद की लागत, सब्सिडी और अन्य वित्तीय पहलुओं की भूमिका होती है। फिर भी लगातार बढ़ता लाइन लॉस बिजली व्यवस्था की दक्षता सुधारने की जरूरत को रेखांकित करता है।

बिजली निगमों के सामने सुधार की चुनौती

हरियाणा में लाइन लॉस घटाने के लिए बिजली नेटवर्क को मजबूत करना, खराब मीटर बदलना, बिजली चोरी पर कार्रवाई करना और बकाया बिलों की वसूली बढ़ाना महत्वपूर्ण कदम हो सकते हैं। केंद्र सरकार की पुनर्गठित वितरण क्षेत्र योजना (RDSS) का उद्देश्य भी बिजली वितरण कंपनियों की परिचालन दक्षता और वित्तीय स्थिति में सुधार करना है।

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कुल मिलाकर, हरियाणा में बिजली लाइन लॉस का 10.81 प्रतिशत तक पहुंचना और हजारों करोड़ रुपये का बकाया बिजली निगमों के लिए गंभीर चुनौती है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि दोनों वितरण कंपनियां नुकसान कम करने और लंबित बिलों की वसूली के लिए क्या कदम उठाती हैं।

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