Yuva Haryana: हरियाणा में महिलाओं के बढ़ते वजन और मोटापे को लेकर सामने आए आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं। दरअसल, राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) की रिपोर्ट के मुताबिक राज्य के 22 में से 20 जिलों (जब यह सर्वे हुआ था तब हरियाणा में 22 जिले थे) में महिलाओं के अधिक वजन और मोटापे की दर में बढ़ोतरी हुई है। अंबाला में यह दर सबसे ज्यादा है, जबकि नुंह में सबसे कम दर्ज की गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक अंबाला में 46.8% अधिक वजन या मोटापे की श्रेणी में हैं। वहीं नूंह में यह आंकड़ा 17.6% है। दोनों जिलों के बीच करीब 29.2% अंक का अंतर है।
अंबाला, यमुनानगर और कुरूक्षेत्र में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी
पिछले पांच सालों में अंबाला, यमुनानगर और कुरूक्षेत्र में महिलाओं के वजन में खास बढ़ोतरी दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार अंबाला में महिलाओं में अधिक वजन और मोटापे की दर 46.8% तक पंहुच गई है।
यमुनानगर में यह दर करीब 46.0%, जबकि कुरूक्षेत्र में 45.8% दर्ज की गई। इसके अलावा फरीदाबाद में करीब 44.5% और पंचकूला में 43.2% महिलाएं अधिक वजन या मोटापे की श्रोणी में हैं।
नूंह में सबसे कम दर
नूंह में महिलाओं के अधिक वजन और मोटापे की दर सबसे कम 17.6% रही। हालांकि, यहां भी पिछले पांच वर्षों में इसमें बढ़ोतरी हुई है। नूंह के बाद कुछ अन्य जिलों में भी यह दर 20 से 30% के बीच रही।
रिपोर्ट में बताया गया है कि 22 में से 20 जिलों में महिलाओं के अधिक वजन या मोटापे की दर बढ़ी है। केवल दो जिलों में इसमें कमी दर्ज की गई।
शहरों में मोटापे की समस्या ज्यादा
महिलाओं में बढ़ते वजन का एक कारण बदलती जीवनशैली भी हो सकती है। शहरों में काम के तरीके ओर रोजमर्रा की गतिविधियों में बदलाव के कारण शारीरिक मेहनत कम हुई है। इसके साथ ही खान-पान की आदतों में बदलाव भी वजन बढ़ने से जुड़ा माना जा रहा है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार लंबे समय तक बैठकर काम करना, शारीरिक गतिविधि की कमी और असंतूलित खान-पान महिलाओं में मोटापे का खतरा बढ़ा सकते हैं।
महिलाओं के स्वास्थ्य पर बढ़ता असर
आंकड़ों के अनुसार हरियाणा में ज्यादातर जिलों में पिछले पांच वर्षों के दौरान महिलाओं के अधिक वजन और मोटापे की दर में बढ़ोतरी हुई है। अंबाला में 46.8% के साथ यह आंकड़ा सबसे ज्यादा है, जबकि नूंह में 17.6% के साथ सबसे कम।
रिपोर्ट में महिलाओं के बढ़ते वजन को स्वास्थ्य से जुड़ा महत्तवपूर्ण मुद्दा बताया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित शारीरिक गतिविधि, संतुलित खान-पान और स्वस्थ जीवनशैली पर ध्यान देकर मोटापे से जुड़े जोखिमों को कम किया जा सकता है।

