QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी एशिया रैंकिंग 2027 में GJU हिसार का प्रदर्शन, भारत में 192वां और दक्षिण एशिया में 354वां स्थान
Yuva Haryana: हरियाणा के हिसार स्थित गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJU) ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान मजबूत करने की दिशा में एक और उपलब्धि हासिल की है। विश्वविद्यालय को QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी एशिया रैंकिंग 2027 में भारत के संस्थानों के बीच 192वां और दक्षिण एशिया में 354वां स्थान मिला है। एशिया के 1722 उच्च शिक्षण संस्थानों की इस रैंकिंग में भारत के 327 संस्थानों को जगह मिली है। विश्वविद्यालय ने कुल 17.2 अंक हासिल किए हैं।
इस उपलब्धि पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विजय कुमार ने खुशी जताई। उन्होंने इसे संस्थान की शैक्षणिक गुणवत्ता, शोध गतिविधियों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती पहचान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने शिक्षकों, शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों, कर्मचारियों और पूर्व विद्यार्थियों को इस उपलब्धि का श्रेय दिया है।
एशिया के 1722 विश्वविद्यालयों का हुआ मूल्यांकन
QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग: एशिया 2027 में 26 देशों और शैक्षणिक क्षेत्रों के कुल 1722 विश्वविद्यालयों को शामिल किया गया है। यह रैंकिंग एशिया के उच्च शिक्षा संस्थानों की शैक्षणिक गुणवत्ता, शोध क्षमता, अंतरराष्ट्रीय भागीदारी और प्रतिष्ठा का आकलन करती है।
इस साल भारत के 327 विश्वविद्यालय और उच्च शिक्षण संस्थान रैंकिंग में शामिल हुए हैं। भारत एशिया में सबसे अधिक प्रतिनिधित्व वाले देशों में दूसरे स्थान पर है। चीन के 448 संस्थानों को इस सूची में जगह मिली है। भारत के 34 संस्थान पहली बार रैंकिंग में शामिल हुए हैं।
GJU के लिए इस सूची में जगह बनाना इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय स्तर के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक परिदृश्य में भी अपनी स्थिति का आकलन करने का अवसर मिलता है।
चार प्रमुख मानकों और 11 उप-मानकों पर मूल्यांकन
QS एशिया रैंकिंग में विश्वविद्यालयों का मूल्यांकन चार प्रमुख क्षेत्रों और 11 उप-मानकों के आधार पर किया जाता है। इनमें शैक्षणिक प्रतिष्ठा, नियोक्ता प्रतिष्ठा, शोध प्रदर्शन और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संस्थान की भागीदारी जैसे पहलू शामिल हैं।
शैक्षणिक प्रतिष्ठा को कुल मूल्यांकन में 30 प्रतिशत और नियोक्ता प्रतिष्ठा को 20 प्रतिशत महत्व दिया जाता है। इसके अलावा शिक्षक-विद्यार्थी अनुपात, प्रति शोधपत्र उद्धरण, अंतरराष्ट्रीय शिक्षकों और विद्यार्थियों का अनुपात, प्रति शिक्षक शोधपत्रों की संख्या तथा पीएचडी धारक शिक्षकों की हिस्सेदारी जैसे मानकों को भी शामिल किया जाता है।
विदेशी विश्वविद्यालयों के साथ शोध नेटवर्क, विद्यार्थियों के आदान-प्रदान और अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक गतिविधियों को भी रैंकिंग में महत्व दिया जाता है। इन मानकों के जरिए यह देखा जाता है कि कोई विश्वविद्यालय केवल पढ़ाई तक सीमित है या शोध और वैश्विक सहयोग में भी सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
शोध और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर GJU का जोर
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, संस्थान में शोध व्यवस्था को मजबूत करने, शिक्षण की गुणवत्ता बेहतर बनाने और नवाचार आधारित शैक्षणिक वातावरण विकसित करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय शोध नेटवर्क और दूसरे संस्थानों के साथ शैक्षणिक सहयोग बढ़ाना भी विश्वविद्यालय की प्राथमिकताओं में शामिल है।
कुलसचिव विजय कुमार ने भी इस उपलब्धि पर विश्वविद्यालय परिवार को बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस तरह की रैंकिंग संस्थान के लिए अपनी ताकत और सुधार की जरूरत वाले क्षेत्रों को पहचानने का अवसर देती है।
भारत के शीर्ष संस्थानों में IIT दिल्ली सबसे आगे
QS एशिया रैंकिंग 2027 में भारतीय संस्थानों में IIT दिल्ली ने 66वां स्थान हासिल किया है। इसके बाद भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) बेंगलुरु 79वें और IIT बॉम्बे 83वें स्थान पर है। IIT मद्रास को 85वां और IIT खड़गपुर को 90वां स्थान मिला है।
इस साल भारत के 21 विश्वविद्यालय एशिया के शीर्ष 200 संस्थानों में शामिल हुए हैं। हालांकि, भारतीय विश्वविद्यालयों के सामने शोध की अंतरराष्ट्रीय पहचान, शैक्षणिक प्रतिष्ठा और विदेशी विद्यार्थियों की भागीदारी बढ़ाने जैसी चुनौतियां भी बनी हुई हैं।
हिसार और हरियाणा के लिए क्यों अहम है यह उपलब्धि?
GJU की रैंकिंग में मौजूदगी हिसार के साथ हरियाणा के उच्च शिक्षा क्षेत्र के लिए भी महत्वपूर्ण है। इससे प्रदेश के विश्वविद्यालयों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी शैक्षणिक क्षमता प्रदर्शित करने का मंच मिलता है।
ऐसी रैंकिंग विद्यार्थियों को विश्वविद्यालयों की शैक्षणिक और शोध संबंधी स्थिति समझने में मदद करती है। वहीं संस्थानों को भी अपनी कमियों की पहचान कर शिक्षण, शोध और अंतरराष्ट्रीय सहयोग में सुधार करने की प्रेरणा मिलती है।
विश्वविद्यालय के सामने अब अपनी रैंकिंग और बेहतर करने की चुनौती है। इसके लिए शोध की गुणवत्ता, उद्योगों के साथ सहयोग, अंतरराष्ट्रीय साझेदारी और विद्यार्थियों को वैश्विक अवसर उपलब्ध कराने पर लगातार काम करना होगा।

