Yuva Haryana: हरियाणा सरकार ने राज्य के किसानों के हित में एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। अब मंडियों में औसत (नियत कोटा) से अधिक पैदावार होने पर भी किसानों की धान की फसल छोड़ी नहीं जाएगी, बल्कि उसे निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदा जाएगा। इसके साथ ही, राज्य सरकार ने मंडियों में 17 प्रतिशत तक नमी वाले धान की तुरंत खरीद और उठान तेज करने के सख्त निर्देश जारी किए हैं।
सोमवार को कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा ने कैथल जिले की विभिन्न अनाज मंडियों का दौरा कर धान की खरीद, उठान और भुगतान व्यवस्था का जायजा लिया। दूसरी ओर, खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री राजेश नागर ने भी समीक्षा बैठक कर निर्देश दिए कि बारिश से भीगे धान को सुखाकर खरीदा जाए।
मुख्य बिंदु:
अधिक पैदावार की विशेष प्रक्रिया: औसत से अधिक उत्पादन दर्ज कराने वाले किसानों को अपनी कुल उपज का लिखित विवरण मंडी सचिव को देना होगा। इसके बाद जिला स्तरीय कमेटी द्वारा सत्यापन कर इसे रिकॉर्ड में दर्ज किया जाएगा और खरीद सुनिश्चित होगी।
17% नमी पर तुरंत खरीद: मंडियों में 17% तक नमी वाले धान को तुरंत खरीदने और बारदाने की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश।
भीगा हुआ धान सुखाकर खरीदा जाएगा: हालिया बारिश के कारण नमी वाले या भीगे धान को मंडियों में सुखाकर खरीदा जाएगा।
भुगतान और उठान: सरकार ने निर्देश दिए हैं कि किसानों की फसल का भुगतान निर्धारित समय सीमा के भीतर सीधे उनके बैंक खातों में भेजा जाए।
मंडीवार आंकड़े: राज्य की मंडियों में अब तक 18.21 लाख मीट्रिक टन धान की आवक हो चुकी है, जिसमें से 10.93 लाख मीट्रic टन की खरीद और 5.07 लाख मीट्रिक टन का उठान पूरा हो चुका है।
विस्तृत विवरण
कैथल मंडियों का निरीक्षण और दिशा-निर्देश
कैथल की ढांड, पूंडरी, पाई, राजौंद और कलायत मंडियों के दौरे के दौरान कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने किसानों और आढ़तियों की समस्याएं सुनीं। उन्होंने मौके पर धान की ढेरियों में नमी की जांच करवाई और खरीद एजेंसियों को निर्देश दिए कि नियमों के अनुसार प्रक्रिया सुचारू रूप से चलाई जाए। उन्होंने कहा कि खरीद और उठान में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बारिश के कारण उठान में आई तेजी
खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री राजेश नागर ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए समीक्षा बैठक में बताया कि अंबाला, कुरुक्षेत्र, कैथल और यमुनानगर में बारिश के कारण ट्रकों की आवाजाही प्रभावित हुई थी, जिससे उठान में थोड़ी देरी हुई। अब अधिकारियों को व्यवस्था दुरुस्त करने और जल्द से जल्द मंडियों को खाली कराने के आदेश दिए गए हैं ताकि नई फसल के लिए जगह उपलब्ध हो सके।

