Yuva Haryana: हरियाणा कांग्रेस में अंदरूनी खींचतान एक बार फिर सामने आई है। भिवानी के बवानीखेड़ा में 20 सितंबर को हुए कांग्रेस के ब्लॉक स्तरीय सम्मेलन के बाद हिसार से कांग्रेस सांसद जयप्रकाश और पूर्व मुख्य संसदीय सचिव (CPS) रामकिशन फौजी के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। कार्यक्रम में सांसद दीपेंद्र हुड्डा समेत कांग्रेस के कई नेता मौजूद थे।
सम्मेलन के दौरान सांसद जयप्रकाश ने बिना नाम लिए उन नेताओं पर निशाना साधा, जिन्हें कांग्रेस ने विधायक और दूसरे पद दिए, लेकिन बाद में पार्टी के खिलाफ जाने और भाजपा की मदद करने के आरोप लगाए। उन्होंने ऐसे नेताओं को सबक सिखाने की बात कही। फौजी ने जयप्रकाश की इस टिप्पणी को अपने खिलाफ माना और इसके बाद पलटवार किया।
फौजी ने जयप्रकाश पर लगाए आरोप
रामकिशन फौजी ने कहा कि जिस कार्यक्रम में कांग्रेस को मजबूत करने और भाजपा सरकार के खिलाफ रणनीति पर चर्चा होनी चाहिए थी, वहां उनके खिलाफ बयान दिया गया। उन्होंने जयप्रकाश के आरोपों को बवानीखेड़ा क्षेत्र के कार्यकर्ताओं का अपमान बताया। फौजी ने जयप्रकाश पर भी पुराने राजनीतिक संबंधों और पार्टी के भीतर उनके रवैये को लेकर कई आरोप लगाए।
फौजी ने कहा कि वह कांग्रेस छोड़ने वाले नहीं हैं और पार्टी में उनका जुड़ाव लंबे समय से रहा है। उन्होंने 2024 के विधानसभा चुनाव का भी जिक्र किया, जब कांग्रेस ने बवानीखेड़ा सीट से प्रदीप नरवाल को उम्मीदवार बनाया था। नरवाल चुनाव हार गए थे।
2024 के टिकट को लेकर भी उठे सवाल
फौजी पांच बार विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं और इनमें से चार बार कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े। 2005 और 2009 में वह कांग्रेस के टिकट पर बवानीखेड़ा से विधायक चुने गए थे। 2014 और 2019 में चुनाव हारने के बाद 2024 में कांग्रेस ने उन्हें टिकट नहीं दिया और प्रदीप नरवाल को उम्मीदवार बनाया था। बाद में नरवाल को भी चुनाव में हार का सामना करना पड़ा।
दिलचस्प बात यह है कि 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान फौजी ने हिसार से कांग्रेस उम्मीदवार रहे जयप्रकाश के समर्थन में प्रचार किया था। उस समय बवानीखेड़ा क्षेत्र में जयप्रकाश को बढ़त दिलाने में फौजी की भूमिका का भी उल्लेख किया गया था। यानी राजनीति ने फिर वही पुराना कमाल दिखाया है, जहां कल का साथ आज के आरोपों में बदल जाता है।
बयानबाजी से बढ़ी कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान
20 सितंबर के सम्मेलन के बाद सामने आए बयानों से कांग्रेस के भीतर चल रही गुटबाजी और नेताओं के बीच मतभेद एक बार फिर चर्चा में हैं। फौजी ने पार्टी नेतृत्व से इस मामले पर संज्ञान लेने की बात कही है। दोनों नेताओं की ओर से लगाए गए आरोप फिलहाल राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा हैं।

