हरियाणा में डेंगू-मलेरिया पर सख्त कानून, अब नियमों की अनदेखी पर लगेगा इतना जुर्माना

Yuva Haryana : हरियाणा में मलेरिया, डेंगू व अन्य वेक्टर बोर्न बीमारियों को रोकने के लिए राज्य सरकार ने नए नियम लागू करते हुए सख्ती दिखाई है।
दरअसल, राज्य सरकार ने मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया और जापानी इंसेफेलाइटिस जैसे रोगों की रोकथाम के लिए हरियाणा महामारी अधिनियम संशोधन 2024 को नोटिफाई किया है। अब बदले हुए नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सजा का प्रावधान किया गया है।
हरियाणा में ये नए नियम तुरंत प्रभाव से लागू हो गए और 31 मार्च 2027 तक प्रभावी रहेंगे।
नए नियमों के तहत सभी सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों, क्लीनिकों और लेबोरेटरी को अब वेक्टर बोर्न बीमारियों के प्रत्येक कन्फर्म केस की रिपोर्ट पता चलने के 24 घंटे के अंदर रोगी की पूरी जानकारी संबंधित सिविल सर्जन को देना जरूरी है।
रियल टाइम मॉनिटरिंग और कोऑर्डिनेटर रिस्पॉन्स कन्फर्म की जानकारी को इंटीग्रेटेड हेल्थ इंफॉर्मेशन प्लेटफॉर्म पोर्टल पर भी अपडेट करना जरूरी है।
मलेरिया का केस माइक्रोस्कोपी या एंटीजन और बेस्ड रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट से कन्फर्म होने के बाद ही पॉजिटिव बताया जा सकता है। पॉजिटिव मरीज को भारत सरकार की ड्रग पॉलिसी के अनुसार पूरा मेडिकल ट्रीटमेंट दिया जाना चाहिए।
इसी प्रकार डेंगू के केस की पुष्टि सिर्फ एलिसा बेस्ड एनएस 1 एलजीएम या आरटी एवं पीसीआर टेस्ट से ही की जा सकती है। एनएसआई एंटीजन टेस्ट उन मरीजों का किया जाना है, जिन्हें पांच दिन से कम बुखार रहा हो, जबकि एलजीएम एंटीबॉडी टेस्ट उन लोगों के लिए ज़रूरी है जिन्हें पाँच दिन से ज़्यादा बुखार रहा हो। किसी भी मरीज को कन्फर्म टेस्ट किए बिना डेंगू पॉजिटिव घोषित नहीं किया जा सकता।
डेंगू टेस्ट की दरें निर्धारित
- प्राइवेट अस्पतालों और लैब को एलिसा बेस्ड एनएस 1 और एलजीएम टेस्ट के लिए 600 रुपये तक चार्ज करने की अनुमति
- सिंगल डोनर प्लेटलेट्स के लिए 11 हजार रुपए तक चार्ज
वहीं जिन मामलों में प्राइवेट लैब में एलिस टेस्टिंग की सुविधा नहीं है, उन्हें मरीज़ों को कन्फर्मेशन के लिए निर्धारित सरकारी लैब में भेजना होगा या उनके ब्लड सैंपल भेजने होंगे।
नियमों के उल्लंघन करने पर कितना जुर्माना ?
- पहली बार नियम का उल्लंघन करने पर एक हजार रुपए
- दूसरी बार नियम तोड़ने पर पांच हजार रुपए
- तीसरी या उसके बाद नियम तोड़ने पर 10 हजार रुपए
वहीं लगातार नियम न मानने पर महामारी अधिनियम 1897 की धारा 3 के तहत कार्रवाई की जा सकती है। किसी भी जुर्माने के खिलाफ 30 दिनों के अंदर सिविल सर्जन की अध्यक्षता वाली अपीलेट कमेटी के समक्ष अपील की जा सकती है।
First published on: February 14, 2026 02:23 PM