Yuva Haryana : हरियाणा में बड़े पैमाने पर धान खरीद में फर्जीवाड़ा सामने आया है। फर्जी गेट पास के सहारे कागजों में ही लाखों क्विंटल धान खरीद डाला। करनाल जिला प्रदेश में धान फर्जीवाड़े का गढ़ बनकर उभरा है।
हालांकि, सरकार इस मामले में सख्त कदम भी उठा रही है। सरकार गड़बड़ियां करने वाले अधिकारियों को लपेट रही है और आने वाले दिनों में खाद्य आपूर्ति विभाग के अधिकारियों पर भी गाज गिरती हुई दिख सकती है।
एक प्रमुख अखबार में प्रकाशित खबर के अनुसार खाद्य आपूर्ति विभाग अगले साल गेट पास और क्यूआर कोड जरिए धान की खरीद करेगा ताकि इस तरह की गड़बड़ियों पर कंट्रोल किया जा सके।
विभाग के अनुसार इस बार जो कमी रही है, उन्हें योजना बनाकर सुधारा जाएगा। अगले सीजन में एआई का प्रयोग या फिर क्यूआर कोड के जरिए गेट पास जारी होंगे। इस बारे में संबंधित जिलों के डीसी से रिपोर्ट भी मांगी गई है और वे निरीक्षण करेंगे। विभाग द्वारा सॉफ्टवेयर तैयार करने की बात भी कही जा रही है।
आपको बता दें कि इस बार हरियाणा में 54 लाख टन धान खरीद का लक्ष्य था। अभी तक 58.70 लाख टन धान सरकार किसानों से खरीद चुकी है जो कि पिछले साल के मुकाबले 4.68 टन ज्यादा है।
सरकार की ओर से धान खरीद के बदले में किसानों को देने के लिए 10 हजार करोड़ रुपए का बजट निर्धारित किया गया था, जिसे ज्यादा खरीद के चलते बढ़ाना पड़ा। पिछले साल प्रदेश में 53.98 लाख टन धान की खरीद हुई थी।
एक चौंकाने वाली बात यह भी है कि इस बार बाढ़ और बारिश के चलते 31 लाख एकड़ फसलों को नुकसान पहुंचा था, इसमें 6.40 लाख एकड़ फसल धान की बताई जा रही है। इतने खराबे के बाद इस बार हरियाणा की मंडियों में धान की फसल पिछले साल के मुकाबले ज्यादा कैसे आई ?
इस बार आरोप है कि मंडी में धान आया ही नहीं और गेट पास काट दिए गए और इसके बाद राशि भी जारी हुई है। कुछ इलाकों में बाहरी राज्य से धान आने की भी सूचना है। अब सभी राइस मिलों की फिजिकल वेरिफिकेशन चल रही है, ताकि पता लगाया जा सके कि मंडी से जो धान मिला है, वह मिल में है या नहीं।
करनाल में धान की फर्जी खरीद करने पर 14 अधिकारियों पर कार्रवाई हुई है। इसमें दो मार्केट कमेटी के सचिव पर केस दर्ज किया गया है। हैफेड के डीएम समेत मार्केट कमेटी के चार अधिकारी भी सस्पेंड किए है।
कुरुक्षेत्र में सहायक खाद्य आपूर्ति अधिकारी और एक निरीक्षक को डेढ़ सप्ताह पहले ही सस्पेंड किया गया था। दरअसल, एक राइस मिलर ने शिकायत की थी कि सभी दस्तावेज पूरे होने पर उसको धान खरीद अलाट नहीं की गई। उसकी बैंक गारंटी के 50 लाख के चेक से एक अन्य मिल की गारंटी दिखा दी। सीएम को शिकायत होने पर यह कार्रवाई हुई।
वहीं किसान नेताओं का कहना है कि गेट पास में गोलमाल हो रहा है। इसकी आड़ में दूसरे प्रदेशों से धान लाया जा रहा है। कुछ दिन पहले करनाल बॉर्डर पर किसान नेताओं ने धान के कई ट्रक पकड़े थे और आरोप है कि उनकी जांच तक सरकार द्वारा नहीं करवाई गई।



