By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
Yuva HaryanaYuva HaryanaYuva Haryana
Notification Show More
Font ResizerAa
  • Home
  • आज की ताजा खबर
  • हरियाणा न्यूज़
  • हरियाणा सरकार
  • भारत
  • स्वास्थ्य एवं जीवनशैली
  • खेल खिलाड़ी
  • राजनीति
  • सोशल-वायरल
  • कृषि
  • धर्म
  • अन्य
  • मनोरंजन
Reading: साल 1956 के बाद विरासत में मिली संपत्ति पर किसका हक? हाईकोर्ट ने सुनाया ये बड़ा फैसला
Share
Font ResizerAa
Yuva HaryanaYuva Haryana
Search
  • Home
  • आज की ताजा खबर
  • हरियाणा न्यूज़
  • हरियाणा सरकार
  • भारत
  • स्वास्थ्य एवं जीवनशैली
  • खेल खिलाड़ी
  • राजनीति
  • सोशल-वायरल
  • कृषि
  • धर्म
  • अन्य
  • मनोरंजन
Have an existing account? Sign In
Follow US
आज की ताजा खबरहरियाणा न्यूज़

साल 1956 के बाद विरासत में मिली संपत्ति पर किसका हक? हाईकोर्ट ने सुनाया ये बड़ा फैसला

Yuva Haryana
Last updated: May 28, 2026 1:06 pm
Yuva Haryana
Published: December 5, 2025
Share
SHARE

Yuva Haryana: साल 1956 के बाद पिता को विरासत में मिली प्रॉपर्टी अब पुश्तैनी नहीं मानी जाएगी, बल्कि उनकी खुद की कमाई संपत्ति कहलाएगी। दरअसल, ये बड़ा फैसला पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने सुनाया है।

इससे पहले 1956 से पहले विरासत में मिली संपति पुश्तैनी हो जाती थी और उस पर बच्चों का जन्म से अधिकार हो जाता था।

अब हाईकोर्ट ने साफ कर दिया है कि 1956 के बाद के कानूनी व्यवस्था में ऐसा कोई अधिकार नहीं है, जिससे अगली पीढ़ी के पास पिता के लेन-देन में दखल दिया जा सके। ऐसे में पिता अपनी मर्जी से ऐसी संपत्ति बेच या ट्रांसफर कर सकते हैं और बच्चे इसे चुनौती नहीं दे सकते।

पानीपत एलिवेटेड एक्सप्रेसवे जनवरी 2027 से होगा टोल-फ्री !

अदालत का मानना है कि 1956 से पहले की कानूनी व्यवस्था में पिता को मिलने वाली संपत्ति पैतृक बन जाती थी और बच्चों को जन्म से हिस्सेदारी मिल जाती थी। लेकिन, हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 लागू होने के बाद स्थिति बदल गई।

अब उत्तराधिकार के आधार पर होता है, न कि जन्म के आधार पर। ऐसे में पिता को मिली विरासत उसकी व्यक्तिगत संपत्ति बन जाती है।

दरअसल, ये मामला साल 1994 में दायर की गई एक नियमित दूसरी अपील से जुड़ा था। जिसमें अदालत को यह तय करना था कि 1956 से पहले और बाद की स्थिति में संपत्ति के स्वरूप में क्या फर्क आया है।

धान-बाजरा खरीद में देरी, किसानों की बढ़ी मुश्किलें

इस पर हाईकोर्ट ने समझाया कि 1956 से पहले संयुक्त हिंदू परिवार की पैतृक मालिक की मृत्यु पर उसकी हिस्सेदारी उसके वारिसों को नहीं जाती थी, बल्कि संयुक्त परिवार में समाहित हो जाती थी और बाकी सदस्यों का हिस्सा बढ़ जाता था। लेकिन 1956 के बाद कानून ने इसे बदल दिया। अब पुरुष हिंदू की मृत्यु पर उसकी संपत्ति पत्नी, बेटे, बेटी आदि को मिलती है।

मेवात इंजीनियरिंग कॉलेज की हालत खराब, छात्रों ने CM से मांगी मदद

You Might Also Like

हरियाणा की खेल नीति फिर चर्चा में, पदक जीतने पर खिलाड़ियों को मिलता है करोड़ों का इनाम
किस्मत हो तो ऐसी ! रातों रात करोड़पति बना हरियाणा का ये शख्स, पढ़ें
हरियाणा में कलयुगी पोते की करतूत, पैसों के लालच में दादा-दादी की कर दी हत्या
दिल्ली-NCR में पेट्रोल पंपों पर ANPR कैमरे नहीं लगे, हरियाणा परिवहन सचिव को आयोग का समन
कांग्रेस छोड़ने वाले पूर्व मंत्री संपत सिंह इस पार्टी का थामेंगे दामन, सामने आई बड़ी अपडेट
TAGGED:Who has rights to property inherited after 1956? The High Court delivered this significant decision
Share This Article
Facebook Email Print
Leave a Comment

Leave a ReplyCancel reply

Follow US

Find US on Social Medias
FacebookLike
XFollow
YoutubeSubscribe

Weekly Newsletter

Subscribe to our newsletter to get our newest articles instantly!
[mc4wp_form]
Popular News
हरियाणा न्यूज़राजनीति

हरियाणा कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष के सामने कांग्रेसियों का हंगामा, राव नरेंद्र बोले- “हमें ऐसे कार्यकर्ताओं की जरूरत नहीं”

Yuva Haryana
Yuva Haryana
October 14, 2025
6.86 लाख टन धान खुला पड़ा, बारिश से बढ़ी चिंता
ASI संदीप लाठर के परिवार से मिले हरियाणा के राज्यपाल, आर्थिक मदद की घोषणा
हरियाणा में पराली जलाने की घटनाओं में 91% की गिरावट, प्रदूषण नियंत्रण के लिए अभी कई मोर्चे बाकी
हरियाणा में अब लावारिस कुत्तों का होगा अपना ठिकाना, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सरकार ने बनाई ये योजना
Global Coronavirus Cases

Confirmed

0

Death

0

More Information:Covid-19 Statistics
© Yuva Haryana. All Rights Reserved.
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?